Jammu Kashmir News: उमर अब्दुल्ला का महबूबा मुफ्ती पर तीखा प्रहार... उन्हें अंग्रेजी नहीं आती

Jammu Kashmir News: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के बैकडोर नियुक्तियों वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पीडीपी को आउटसोर्सिंग और बैकडोर नियुक्तियों में अंतर ही नहीं पता है।

Update:2026-05-10 17:34 IST

Omar Abdullah

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के 'बैकडोर' नियुक्तियों वाले बयान पर पलटवार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उर्दू नहीं आती और अंग्रेजी समझ नहीं आती। क्या मैं उन्हें फ्रेंच में समझाऊं। मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम ने कहा कि मुझे एक भी ऐसी जगह बताइए जहां 'बैकडोर' से नियुक्ति हुई हो। सिर्फ एक व्यक्ति का नाम बताइए। आउटसोर्सिंग 'बैकडोर' नहीं है। मैं पीडीपी वालों को समझाने की कोशिश करते-करते थक गया हूं। उन्हें उर्दू नहीं आती, उन्हें अंग्रेजी समझ नहीं आती। क्या मैं उन्हें फ्रेंच में समझाऊं। 'बैकडोर' नियुक्तियों और आउटसोर्सिंग में जमीन-आसमान का फर्क है। हम रोजगार दे रहे हैं। जहां योजना की जरूरत होती है, वहां हम आउटसोर्सिंग का इस्तेमाल करते हैं लेकिन यह 'बैकडोर' नियुक्ति नहीं है।

पीडीपी वाले अपने गुनाह को छिपाने के लिए हम पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने मजाकिए अंदाज में कहा कि पीडीपी वाले झूठ भी ऐसा बोलते हैं कि जो चंद सेकंड में पकड़ लिया जाता है। सीएम ने गांदरबल विधानसभा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए बताया कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र गांदरबल में हमने उन विकास कार्यों को जारी रखा है जो मेरे चुनाव जीतने के बाद शुरू हुए थे। हमने विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिनमें युवाओं के लिए एक पुस्तकालय, एक यूथ हॉस्टल और अलग-अलग स्थानों पर कई नई सड़कें शामिल हैं। खूबसूरती को बढ़ाने के लिए रिवर फ्रंट की आधारशिला रखी गई है, इससे शहर को लाभ होगा। साथ ही यह जगह टूरिस्टों को ज्यादा आकर्षित करेगी।

उन्होंने कहा कि गांदरबल में जिला अस्पताल को ओर बेहतर किया जा रहा है। यहां कुछ नई मशीन लाई जा रही हैं, जहां मरीजों को बेहद कम दाम में इलाज की सुविधा मिलेगी। जो टेस्ट लोग निजी अस्पतालों में 4 से 5 हजार रुपए में कराते थे, वही टेस्ट 400 से 500 रुपए में होगा। नशा अभियान और युवाओं के भविष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी ने किसी को शराब पीने के लिए मजबूर नहीं किया। शराब की दुकानों में अपनी मर्जी से जा रहे हैं। किसी को कोई जबरदस्ती नहीं कर सकता।

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