Temple Gold Rumour 2026: अफवाह या सच? मंदिरों के सोने पर केंद्र सरकार ने जारी किया बड़ा बयान
Temple Gold Rumour India 2026: क्या सरकार मंदिरों का सोना अपने नियंत्रण में लेगी? वायरल दावों पर वित्त मंत्रालय ने दिया बड़ा जवाब
Temple Gold Rumor Fact Check India 2026 Gold Monetization Scheme
Temple Gold Rumor Fact Check India 2026: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीद को लेकर की गई अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक नया दावा तेजी से वायरल होने लगा। जिसमें यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार जल्द ही मंदिरों, ट्रस्टों और धार्मिक संस्थाओं के पास जमा सोने को गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत लाने वाली है। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि मंदिरों के शिखरों, दरवाजों और दीवारों पर लगी सोने की परत को देश का रणनीतिक स्वर्ण भंडार माना जाएगा और इसके बदले संस्थाओं को गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे। हालांकि, अब इन सभी दावों पर केंद्र सरकार ने साफ और सख्त जवाब दिया है। वित्त मंत्रालय ने ऐसी खबरों को पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और बेबुनियाद बताया है। मंत्रालय ने कहा है कि सरकार की तरफ से मंदिरों या किसी धार्मिक संस्था के सोने को लेकर कोई नई मुद्रीकरण योजना लाने का प्रस्ताव नहीं है।
https://x.com/i/status/2056415825477927031
सोशल मीडिया पर कैसे फैली अफवाह?
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ज्योतिष वैज्ञानिक बताए जाने वाले प्रशांत किनी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि भारत सरकार मंदिरों के स्वर्ण भंडार के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी कर सकती है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि मंदिरों में लगे सोने को भारत के रणनीतिक गोल्ड रिजर्व का हिस्सा माना जाएगा। इसके बाद यह दावा तेजी से वायरल हो गया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे शेयर करना शुरू कर दिया। कुछ यूट्यूब चैनलों और वेबसाइटों पर भी इस तरह की बातें दिखाई देने लगीं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
इन वायरल दावों के बाद वित्त मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार मंदिरों के गोल्ड रिजर्व के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करेगी या धार्मिक संस्थाओं के गोल्ड होल्डिंग्स को मोनेटाइज करने की योजना ला रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह झूठी, गुमराह करने वाली और बिना किसी आधार की खबरें हैं। सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है, न ही किसी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
साथ ही वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि मंदिरों के टावर, दरवाजों या अन्य संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को भारत का रणनीतिक गोल्ड रिजर्व मानने का दावा भी पूरी तरह गलत है।
आखिर क्या होती है गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम?
भारत सरकार ने साल 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) शुरू की थी। इसका उद्देश्य घरों और संस्थाओं में निष्क्रिय पड़े सोने को बैंकिंग सिस्टम में लाना था ताकि देश में सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सके। इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था अपना सोना बैंक में जमा कर सकती थी। बदले में उन्हें ब्याज मिलता था। बैंक इस सोने का इस्तेमाल ज्वेलर्स या अन्य जरूरतों के लिए करते थे। हालांकि, यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक थी। किसी व्यक्ति, मंदिर या संस्था पर इसमें शामिल होने का कोई दबाव नहीं था। कई बड़े मंदिरों ने समय-समय पर इस योजना में हिस्सा लिया भी था, लेकिन वह पूरी तरह उनकी इच्छा पर आधारित था।
मंदिरों के सोने को लेकर पहले भी होती रही है चर्चा
भारत के कई प्रसिद्ध मंदिरों में बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है। पद्मनाभस्वामी मंदिर,
तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर, शिरडी साईं बाबा मंदिर जैसे मंदिरों के पास भारी मात्रा में स्वर्ण भंडार होने की चर्चा अक्सर होती रहती है।
इसी वजह से समय-समय पर यह बहस भी उठती रही है कि क्या इस सोने का इस्तेमाल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है। लेकिन सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है जिसमें मंदिरों के सोने को अनिवार्य रूप से सरकार के नियंत्रण में लेने की बात कही गई हो।
सरकार ने लोगों से क्या अपील की?
वित्त मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें। मंत्रालय ने कहा कि बिना सत्यापन के ऐसी जानकारी शेयर करने से समाज में भ्रम फैलता है और लोग गुमराह होते हैं।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हर जानकारी सही नहीं होती। खासकर आर्थिक और धार्मिक मामलों से जुड़ी खबरों को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी है।
आज के डिजिटल दौर में फर्जी खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं। कई बार अधूरी जानकारी या मनगढ़ंत दावे लोगों के बीच डर और भ्रम पैदा कर देते हैं। मंदिरों के सोने को लेकर वायरल हुई यह खबर भी ऐसा ही एक उदाहरण है।