सांसद Kakoli Ghosh दस्तीदार ने TMC के सभी पदों से दिया इस्तीफा, चुनावी हार की ली जिम्मेदारी
Kakoli Ghosh Resigns: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आई-पैक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और ममता बनर्जी से पुराने कार्यकर्ताओं को महत्व देने की अपील की।
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Kakoli Ghosh Resigns: पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रदर्शन को लेकर तृणमूल कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था और चुनाव में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी ली थी।
खराब प्रदर्शन पर उठाया कदम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात और उत्तर 24 परगना के कुछ हिस्सों में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर कुछ दिनों पहले खुद को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि चुनावी नतीजों के बाद संगठन को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
आई-पैक पर साधा परोक्ष निशाना
वहीं बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफे के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा था। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि संगठन के तौर-तरीके और कार्यकर्ताओं के साथ उनका व्यवहार ठीक नहीं था।
उन्होंने कहा था कि पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी से की खास अपील
यहां काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा था कि बाहरी संगठनों पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी को अपनी संगठनात्मक रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत बना रहे और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार?
आपको बताते चलें कि, काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का एक बड़ा और चर्चित चेहरा रही हैं। वह पेशे से डॉक्टर भी हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। काकोली घोष कई बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और उत्तर 24 परगना तथा बारासात इलाके में उनका अच्छा राजनीतिक प्रभाव माना जाता रहा है। पार्टी के भीतर उन्हें ममता बनर्जी की भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था।
केवल सांसद तक सीमित नहीं थी भूमिका
टीएमसी में उनकी भूमिका सिर्फ सांसद तक सीमित नहीं थी। वह संगठन स्तर पर भी काफी सक्रिय थीं और बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उत्तर 24 परगना जैसे राजनीतिक रूप से अहम जिले में संगठन को मजबूत रखने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू कराने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी। इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच भी उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती रही है।
बारासात और आसपास के इलाकों में वर्चस्व
काकोली घोष का वर्चस्व खासतौर पर बारासात और आसपास के इलाकों में काफी मजबूत माना जाता था। यही वजह है कि जब उन इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर हुआ तो उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पहले जिला अध्यक्ष पद और फिर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे को टीएमसी के अंदर एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि वह पार्टी की पुरानी और प्रभावशाली नेताओं में शामिल रही हैं।