Assam UCC Bill: असम में यूसीसी विधेयक पास, ,बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, विपक्ष ने किया विरोध
Assam UCC Bill: असम विधानसभा ने UCC विधेयक को मंजूरी दे दी है। नए कानून के तहत बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
Assam UCC Bill: असम विधानसभा ने लंबे समय तक चली बहस और विपक्ष के विरोध के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद असम देश का तीसरा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी लागू किया गया है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में भी यह कानून लागू हो चुका है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों को मजबूत करने के लिए लाया गया है।
बहुविवाह पर पूरी तरह रोक
नए कानून के तहत अब असम में एक से ज्यादा शादी करना गैरकानूनी माना जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बहुविवाह करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कानून तोड़ने पर अधिकतम सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और समाज में समानता बढ़ेगी।
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी
यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। अब राज्य में साथ रहने वाले जोड़ों को अपने रिश्ते का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई ऐसा नहीं करता है तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और रिश्तों में पारदर्शिता आएगी।
जनजातीय समुदाय को कानून से छूट
असम सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून से बाहर रखा है। यानी जनजातीय समुदायों पर यह यूसीसी लागू नहीं होगा। सरकार का कहना है कि उनकी परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया बड़ा कदम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान सबसे जरूरी है और इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार देना है। उनके अनुसार समाज में सुधार के लिए ऐसे फैसले जरूरी हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ जैसे दलों का कहना है कि यह कानून राजनीतिक फायदे के लिए लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि जब जनजातीय समुदाय को इससे बाहर रखा गया है, तब इसे पूरी तरह “समान” कानून नहीं कहा जा सकता।
कानूनी बहस भी तेज
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन भविष्य में अदालतों में चुनौती बन सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि यह नागरिकों की निजी जिंदगी और गोपनीयता के अधिकार से जुड़ा मामला है। वहीं सरकार का पक्ष है कि यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए जरूरी है।
देशभर में बढ़ी यूसीसी पर चर्चा
असम में यूसीसी लागू होने के बाद देशभर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले समय में इस कानून के असर और इसके कानूनी पहलुओं पर नजर बनी रहेगी।