ममता का किला अब खतरे में? मुस्लिम गढ़ों में टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड, जानें कौन मारेगा बाज़ी

West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव 2026 में 90% मतदान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड! लाखों नाम कटने के बावजूद मुस्लिम बहुल 85 सीटों पर 20% तक का भारी उछाल देखा गया है।

Update:2026-05-02 16:17 IST

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने में अभी थोड़ा वक्त बाकी है, लेकिन मतदान के जो शुरुआती आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। बंगाल के चुनावी इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब मतदान का कुल प्रतिशत 90 प्रतिशत के जादुई आंकड़े को पार कर गया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिन 85 मुस्लिम बहुल सीटों पर सबकी नजरें टिकी थीं, वहां वोटिंग में 2 से लेकर 20 प्रतिशत तक का ऐसा जबरदस्त उछाल देखा गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। आखिर इस रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के पीछे क्या कहानी छिपी है? क्या यह सत्ता परिवर्तन की आहट है या ममता बनर्जी के 'खेला' का नया अध्याय? इन आंकड़ों ने हर राजनीतिक दल के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

मुस्लिम गढ़ों में बदली सियासी हवा और बदल गए पुराने समीकरण

राज्य की ये 85 सीटें उन खास जिलों में आती हैं जहां मुस्लिम आबादी का हिस्सा 35 प्रतिशत से ज्यादा है। दशकों तक इन इलाकों पर कांग्रेस और वामदलों का एकछत्र राज रहा था, लेकिन 2021 के चुनाव में समीकरण पूरी तरह पलट गए थे। उस समय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इनमें से 75 सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था और बीजेपी मुख्य चुनौती बनकर उभरी थी। लेकिन 2026 का यह चुनाव कई मायनों में अलग और दिलचस्प है। इस बार कांग्रेस दशकों बाद पहली बार किसी गठबंधन के बिना अकेले चुनाव लड़ रही है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे, फिर भी लोगों के मतदान करने के उत्साह ने सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं।

मुर्शिदाबाद और मालदा में रिकॉर्ड तोड़ मतदान की भारी लहर

अगर जिलेवार आंकड़ों पर गौर करें तो मुर्शिदाबाद ने इस बार सबको पीछे छोड़ दिया है। यहाँ 66 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है और 2021 में TMC ने यहाँ की 22 में से 20 सीटें अपने नाम की थीं। इस बार यहाँ के रघुनाथगंज में मतदान में 20.5 प्रतिशत की सबसे बड़ी ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह जंगीपुर में 17.9 प्रतिशत, सागरदिघी में 16.4 प्रतिशत, शमशेरगंज में 16 प्रतिशत और सुती में 14.5 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई है। मालदा और उत्तर दिनाजपुर, जो कभी कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग माने जाते थे, वहाँ भी जनता ने जमकर मतदान किया है। मालदा की रतुआ सीट पर 16.2 प्रतिशत और चंचल में 15.3 प्रतिशत वोटिंग बढ़ी है। उत्तर दिनाजपुर के ग्वालपोखर में 19.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इस पूरी बेल्ट में दूसरे स्थान पर है।

लाखों नाम कटने के बावजूद नहीं कम हुआ वोटरों का जबरदस्त जोश

हैरानी की बात यह है कि मुर्शिदाबाद और मालदा वही जिले हैं जहाँ से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम सूची से बाहर किए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक मुर्शिदाबाद में 4,55,137 और मालदा में 2,39,375 नाम काटे गए थे। भारी संख्या में नाम हटने के बावजूद कई सीटों पर 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होना यह बताता है कि लोग अपनी राय रखने के लिए कितने व्याकुल थे। बीरभूम जिला, जिसे कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, वहां भी मुरारई और रामपुरहाट जैसी सीटों पर मतदान का ग्राफ काफी ऊपर गया है। दक्षिण 24 परगना की मटियाब्रुज सीट पर 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार साइलेंट नहीं है। अब देखना यह होगा कि 90 प्रतिशत की यह 'महा-वोटिंग' किसके लिए जीत का सेहरा लाती है और किसके लिए हार का सबब बनती है।

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