बंगाल में बद से बद्तर हुए हालात! CEC ज्ञानेश कुमार ने पुलिस को दी खुली छूट, देखते ही दबोचने के आदेश
CEC Gyanesh Kumar: बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भड़की हिंसा! CEC ज्ञानेश कुमार के सख्त आदेश उपद्रवियों को देखते ही गिरफ्तार करें। BJP-TMC कार्यकर्ताओं के बीच टकराव से हालात बिगड़े, जानिए पूरी स्थिति।
CEC Gyanesh Kumar: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद राज्य की फिजां में जश्न की जगह बारूद की गंध और चीखें सुनाई दे रही हैं। सत्ता परिवर्तन की आहट के साथ ही बंगाल के कई जिले हिंसा की आग में झुलस रहे हैं। कहीं भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हो रही है, तो कहीं टीएमसी के दफ्तरों को आग के हवाले किया जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने साफ लहजे में राज्य के आला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो भी हिंसा फैला रहा है, उसे तुरंत सलाखों के पीछे डाला जाए। बंगाल में शांति बहाली के लिए अब पुलिस और केंद्रीय बलों को 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने को कहा गया है।
कोलकाता से आसनसोल तक खूनी खेल और आगजनी
चुनावी रंजिश का सबसे खौफनाक मंजर कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में देखने को मिला। यहाँ भाजपा कार्यकर्ता मधु मंडल की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि इस वारदात को टीएमसी समर्थकों ने अंजाम दिया है। इस हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और आक्रोशित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। हिंसा की यह आग केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रही। हावड़ा के जगतबल्लभपुर में टीएमसी कार्यालय को फूंक दिया गया, जबकि जलपाईगुड़ी, दक्षिण 24 परगना और आसनसोल जैसे इलाकों में दोनों पार्टियों के समर्थक आमने-सामने आ गए। पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं ने आम जनता के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
CEC का कड़ा संदेश: 'बख्शे नहीं जाएंगे उपद्रवी'
बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के साथ हाई-लेवल मीटिंग की। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को छोड़ा न जाए। राज्य के सभी डीएम और एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद सड़कों पर उतरकर गश्त करें और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का घेरा बढ़ाएं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की टुकड़ियों को भी उपद्रवियों से कड़ाई से निपटने की छूट दी गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न होने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी कानून हाथ में ले ले।
ममता का इस्तीफे से इनकार और शुभेंदु का तीखा प्रहार
हिंसा के बीच बंगाल में सियासी संग्राम भी अपने चरम पर है। ऐतिहासिक हार के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। ममता का दावा है कि वह जनता से नहीं हारी हैं, बल्कि उन्हें ईवीएम में गड़बड़ी और 'वोटों की लूट' के जरिए हराया गया है। उन्होंने अपनी हार को एक बड़ी साजिश करार दिया है। दूसरी तरफ, भाजपा के दिग्गज नेता और नंदीग्राम-भवानीपुर के विजेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जनादेश का अपमान कर रही हैं और उनका इस्तीफा न देना 'संविधान विरोधी' कृत्य है। शुभेंदु ने मांग की है कि ममता को हार स्वीकार कर तुरंत पद छोड़ना चाहिए ताकि नई सरकार कामकाज संभाल सके।
बढ़ता तनाव और भविष्य की चिंता
फिलहाल बंगाल में डर और अनिश्चितता का माहौल है। एक तरफ नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही हैं, तो दूसरी तरफ सड़कों पर मची हिंसा ने लोकतंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शपथ ग्रहण समारोह तक शांति बनाए रखने की है। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद छिटपुट हिंसा की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी संवैधानिक गरिमा का पालन करते हुए पद छोड़ेंगी या बंगाल में यह सियासी और जमीनी लड़ाई अभी और लंबी खिंचेगी।