'वोट देने रोक रहे TMC वर्कर्स...', बंगाल में री-पोलिंग के बीच भड़का सियासी तूफान! 1 बजे तक 55.57% मतदान, हाई वोल्टेज ड्रामा जारी
West Bengal re-polling 2026: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आज 2 मई यानी शनिवार को री-पोलिंग के दौरान एक बार फिर सियासी तनाव और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल गरमा गया है।
West Bengal re-polling 2026 (PHOTO: SOCIAL MEDIA)
West Bengal re-polling 2026: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आज 2 मई यानी शनिवार को री-पोलिंग के दौरान एक बार फिर सियासी तनाव और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल गरमा गया है। डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, दोपहर 1 बजे तक कुल 55.57 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो कि मतदाताओं की सक्रिय हिस्सेदारी को स्पष्टता से दर्शाता है, लेकिन इसके साथ ही कई विवाद भी सामने आए हैं।
इन 15 बूथों में से 11 मगराहाट पश्चिम और 4 डायमंड हार्बर क्षेत्र में स्थित हैं। सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। मगराहाट पश्चिम के चार बूथों पर 1 बजे तक 56.33 फीसदी और डायमंड हार्बर के 11 बूथों पर 54.9 फीसदी मतदान दर्ज किया गया।
EVM छेड़छाड़ के आरोपों के बाद री-पोलिंग का निर्णय
री-पोलिंग का यह फैसला भाजपा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद लिया गया। भाजपा ने दावा किया था कि कुछ मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के साथ छेड़छाड़ की गई। खासतौर से फलता इलाके के एक बूथ पर कथित तौर पर कमल के निशान वाले बटन को टेप लगाकर ढक दिया गया था, जिससे वोटर्स भ्रमित हो सकते थे।
इस घटना का फोटो और वीडियो वायरल
इस घटना के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने मामले का संज्ञान लिया। मतदाताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें बूथ कैप्चरिंग, धांधली और प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप शामिल थे।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के अंतर्गत चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि यदि किसी मतदान केंद्र पर गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो वह मतदान को रद्द कर फिर से मतदान कराने का आदेश दे सकता है। इसी प्रावधान के अंतर्गत इन 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया जा रहा है।
TMC पर धमकी और मतदाताओं को रोकने के आरोप
री-पोलिंग के दौरान सबसे बड़ा विवाद फलता विधानसभा क्षेत्र से सामने आया, जहां स्थानीय लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। मतदाताओं का स्पष्ट कहना है कि उन्हें वोट देने से रोका गया और डराया-धमकाया गया।
इसे लेकर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि TMC विधायक जहांगीर खान के समर्थकों ने दोपहर के बाद मतदान करने से रोकने का प्रयास किया। एक महिला मतदाता ने दावा किया कि उसे धमकी दी गई कि यदि विपक्ष जीत गया तो उसके घर को जला दिया जाएगा और हिंसा होगी। एक अन्य महिला ने कहा, "हम पर हमला किया गया और हमें डराया गया। हम चाहते हैं कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।"
इन आरोपों के बाद इलाके में भयंकर तनाव बढ़ गया और लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है।
मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें, लोग भ्रमित
री-पोलिंग के दौरान बाहिरापुरा कुरकुरिया एफपी स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, कई मतदाताओं ने यह भी कहा कि उन्हें यह साफ़ जानकारी नहीं है कि फिर से मतदान क्यों कराया जा रहा है।
ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि पहले चरण में उनके बूथ पर किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई थी, फिर भी उन्हें फिर से वोट डालने के लिए बुलाया गया है। इससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति स्पष्ट रूप से देखी गई।
स्थानीय मुद्दों पर भी फूटा गुस्सा
री-पोलिंग के दौरान केवल चुनावी विवाद ही नहीं, बल्कि स्थानीय दिक्कतों को लेकर भी लोगों का गुस्सा सामने आया। कई मतदाताओं ने खराब सड़कों, पानी की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर नाराजगी जताई।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें पीने के पानी और नल की सुविधा तक ठीक से उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। चुनाव के दौरान इन मुद्दों को लेकर सरकार के प्रति असंतोष स्पष्ट दिखाई दिया।
30 और बूथों पर भी हो सकता है री-पोलिंग
जानकारी के मुताबिक, फलता विधानसभा क्षेत्र के लगभग 30 और बूथों पर भी पुनर्मतदान की संभावना जताई जा रही है। इस पर आखिरी फैसला निर्वाचन आयोग द्वारा जिला अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने साफ़ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को किसी भी हक में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग की नीति "जीरो टॉलरेंस" की है और जहां भी गड़बड़ी साबित होगी, वहां तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड मतदान के बीच बढ़ा विवाद
पश्चिम बंगाल में इस बार मतदान प्रतिशत बहुत ज्यादा रहा है। राज्य में दो चरणों में कुल 92.93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो आजादी के बाद सबसे अधिक माना जा रहा है। पहले चरण में 93.19 फीसदी और दूसरे चरण में 92.67 फीसदी मतदान हुआ था।
हालांकि, इस रिकॉर्ड मतदान के बीच जिस तरह के आरोप और विवाद सामने आ रहे हैं, उन्होंने चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती
निर्वाचन आयोग ने यह साफ़ कर दिया है कि EVM के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ गंभीर अपराध है। बटन पर टेप लगाना, स्याही डालना या किसी भी तरह से मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करना कानूनन दंडनीय है।
आयोग ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, मतदाताओं को सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल में मतदान करने का पूरा विश्वास दिया गया है।
बता दे, पश्चिम बंगाल में री-पोलिंग के दौरान एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की परीक्षा होती नज़र आ रही है। एक तरफ जहां बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोप-प्रत्यारोप और विवाद चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना रहे हैं। अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग के अगले कदम और अंतिम नतीजों पर टिकी हुई हैं।