Pakistan Independence: पाकिस्तान बना, लेकिन नोट भारत के चले, जानें बंटवारे के बाद की कहानी

Pakistan Independence: 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बनने के बाद कुछ समय तक वहां भारतीय रिजर्व बैंक के नोट इस्तेमाल हुए। जानें भारतीय नोटों पर पाकिस्तान की पहचान कैसे जोड़ी गई।

Update:2026-08-14 10:21 IST

Pakistan Independence: Why Indian Currency Was Used in Pakistan After Partition

Pakistan Independence: आज वही ऐतिहासिक तारीख है, जब 14 अगस्त 1947 को भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान एक नए देश के रूप में दुनिया के नक्शे पर आया था। आजादी के साथ पाकिस्तान के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। जिनमें देश बनने के तुरंत बाद उसके सामने एक सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या खड़ी थी वह थी अपनी मुद्रा व्यवस्था। पाकिस्तान के पास न अपना केंद्रीय बैंक था और न ही तुरंत नोट छापने की पर्याप्त व्यवस्था। ऐसे में कुछ समय तक भारत में छपे नोट ही पाकिस्तान में लेनदेन का आधार बने। इन नोटों पर पाकिस्तान की पहचान बताने के लिए अंग्रेजी और उर्दू में खास शब्द छापे गए थे।

बंटवारे के बाद पाकिस्तान में भारतीय नोट क्यों चलाए गए

आजादी और विभाजन के समय भारत की मौद्रिक व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक के हाथ में थी। पाकिस्तान के पास अपना अलग केंद्रीय बैंक और मुद्रा व्यवस्था तैयार नहीं थी। नए देश में अगर तुरंत मुद्रा की व्यवस्था नहीं होती तो बाजार, व्यापार, सरकारी भुगतान और आम लोगों के रोजमर्रा के लेनदेन पर बड़ा असर पड़ सकता था। इसी समस्या को देखते हुए विभाजन के बाद एक अंतरिम व्यवस्था बनाई गई। पाकिस्तान में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटों को ही कुछ समय के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई। इसका मकसद यह था कि पाकिस्तान को अपनी अलग मुद्रा व्यवस्था तैयार करने तक आर्थिक गतिविधियों को चलाने के लिए तत्काल मुद्रा मिलती रहे। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, 14 अगस्त 1947 को ‘पाकिस्तान मौद्रिक व्यवस्था और रिजर्व बैंक आदेश, 1947’ जारी किया गया था। इसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक को एक निर्धारित अवधि तक भारत और पाकिस्तान के लिए साझा मौद्रिक प्राधिकरण की भूमिका निभानी थी।

भारतीय नोटों पर पाकिस्तान सरकार की पहचान कैसे आई

इन नोटों को पाकिस्तान में इस्तेमाल करने के लिए उनकी पहचान में बदलाव किया गया। नोट के खाली हिस्से पर पाकिस्तान सरकार की पहचान से जुड़े शब्द अंग्रेजी और उर्दू में छापे गए। अंग्रेजी में ‘गवर्नमेंट ऑफ पाकिस्तान’ जबकि उर्दू मे ‘हुकूमत-ए-पाकिस्तान’ लिखा गया। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी मूल नोट अब पाकिस्तान में भी अधिकृत रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, ऐसे संशोधित नोट 1, 2, 5, 10 और 100 रुपये के मूल्यवर्ग में इस्तेमाल किए गए। खास बात यह थी कि इन्हें केवल किसी मुहर से चिह्नित नहीं किया गया था, बल्कि नोटों में संशोधन छपाई की प्लेट के माध्यम से किया गया था। इसलिए इनकी छपाई सामान्य ऊपर से की गई छपाई से अलग थी।

पाकिस्तान के पास अपना केंद्रीय बैंक क्यों नहीं था

पाकिस्तान के लिए अपनी बैंकिंग व्यवस्था तैयार करना कोई छोटा काम नहीं था। देश नया था और विभाजन के बाद प्रशासनिक ढांचे का बंटवारा भी हो रहा था। ऐसे में केंद्रीय बैंक, बैंकिंग संस्थानों और मुद्रा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था तुरंत तैयार करना संभव नहीं था। इसी कारण पाकिस्तान को कुछ समय के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ा। इस अस्थायी व्यवस्था के तहत पाकिस्तान में भारतीय नोटों का इस्तेमाल जारी रहा। इससे आम लोगों और कारोबारियों के लिए रोजमर्रा के लेनदेन में अचानक मुद्रा संकट पैदा नहीं हुआ। यह व्यवस्था केवल नोटों तक सीमित नहीं थी। नए देश को अपनी बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं का ढांचा भी खड़ा करना था। इसलिए शुरुआती महीनों में भारत से अलग होने के बावजूद पाकिस्तान को साझा मौद्रिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ा।

1948 में पाकिस्तान ने शुरू की थी अपनी आपातकालीन मुद्रा

भारतीय नोटों पर पाकिस्तान की पहचान जोड़ना स्थायी समाधान नहीं था। पाकिस्तान को आखिरकार अपनी मुद्रा जारी करनी थी। इसके लिए अलग बैंकनोट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, 1 अक्टूबर 1948 को पाकिस्तान सरकार की ओर से आपातकालीन श्रृंखला के बैंकनोट जारी किए गए। इसमें 5, 10 और 100 रुपये के नोट शामिल थे। इन नोटों को ब्रिटिश कंपनी थॉमस डी ला रू एंड कंपनी ने तैयार किया था। इन शुरुआती पाकिस्तानी नोटों की सुरक्षा व्यवस्था आज के मुकाबले काफी साधारण थी। इनमें जलचिह्न और सुरक्षा धागे जैसी आधुनिक सुरक्षा विशेषताएं मौजूद नहीं थीं। उस समय के लिहाज से ये नोट पाकिस्तान की अपनी मुद्रा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थे।

1949 में स्टेट बैंक ने जारी किया अपना पहला नोट

पाकिस्तान की मुद्रा व्यवस्था ने अगले साल एक और बड़ा कदम उठाया। 1 मार्च 1949 को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपना पहला बैंकनोट जारी किया। इसकी शुरुआत 2 रुपये के नोट से हुई।

इस नोट को ब्रिटिश कंपनी ब्रैडबरी विल्किंसन एंड कंपनी ने छापा था। इसके बाद पाकिस्तान की मुद्रा व्यवस्था धीरे-धीरे पूरी तरह अलग और स्वतंत्र होती चली गई।

शुरुआती पाकिस्तानी नोटों में उस समय की भाषाई और राजनीतिक स्थिति की झलक भी दिखाई देती थी। अंग्रेजी और उर्दू के साथ बंगाली भाषा का भी इस्तेमाल किया गया था। इसकी वजह यह थी कि उस समय पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा यानी पूर्वी पाकिस्तान बड़ी संख्या में बंगाली भाषी आबादी वाला क्षेत्र था।

इन पुराने नोटों की आज इतनी अहमियत क्यों है

1947-48 के ये नोट आज केवल पुराने कागज या संग्रह की वस्तु नहीं हैं। इनके जरिए विभाजन के बाद की आर्थिक स्थिति को समझा जा सकता है। एक तरफ ये नोट अविभाजित भारत की मौद्रिक व्यवस्था की पहचान थे, तो दूसरी तरफ नए बने पाकिस्तान की शुरुआती आर्थिक जरूरत को पूरा करने का माध्यम बने। ऐसे नोट आज संग्रहकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास माने जाते हैं। किसी पुराने नोट की संग्रहणीय कीमत उसकी दुर्लभता, स्थिति, सीरियल नंबर, छपाई की विशेषता और ऐतिहासिक महत्व जैसी चीजों पर निर्भर करती है।

मुद्रा संग्रहालयों और प्रदर्शनियों में ऐसे नोट इसलिए भी आकर्षण का केंद्र बनते हैं क्योंकि इनमें भारत-पाकिस्तान विभाजन का एक ऐसा ऐतिहासिक घटनाक्रम दर्ज है, जो आमतौर पर राजनीतिक घटनाओं के बीच कहीं गुम हो जाता है। पाकिस्तान हुकूमत के ये शुरुआती दुर्लभ नोट आज भी लोगों को दोनों देशों के साझा इतिहास के उस दौर की याद दिलाते हैं, जब राजनीतिक सीमाएं तो बेशक बदल गई थीं, लेकिन आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह अलग होने में कुछ समय लगा था।

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