'पंडित जी बोलेंगे तो ही बाल कटेंगे...', अखिलेश यादव बोले- बिना पूछे घर से नहीं निकलूंगा
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ में चुटीले अंदाज में कहा कि अब वे बाल कटवाने से लेकर घर से बाहर निकलने तक का हर काम 'पंडित जी' से पूछकर करेंगे।
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इन दिनों एक बेहद दिलचस्प वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कुछ ऐसा कहा जिसने न केवल वहां मौजूद पत्रकारों को हैरान कर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा चुनावों में अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूछे गए सवाल पर सपा प्रमुख ने मुस्कराते हुए कहा कि अब वह अपनी जिंदगी और राजनीति का हर बड़ा कदम 'पंडित जी' से पूछकर ही उठाएंगे।
अखिलेश यादव ने अपनी बात को विस्तार देते हुए एक 'एआई पंडित' और बड़े ऋषि-मुनियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने भगवान केदारेश्वर के मंदिर का निर्माण शुरू करवाया है, तब से कई महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक लोग उनके संपर्क में आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक रोचक किस्सा साझा करते हुए दावा किया कि हाल ही में उनके कार्यालय में एक ऐसे विद्वान व्यक्ति आए जो मन की बात पढ़ लेने की क्षमता रखते हैं। अखिलेश के अनुसार, उस व्यक्ति ने न केवल उनके मन की बात बताई बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी के कौन से नेता उनके संपर्क में थे।
अपनी बात की पुष्टि के लिए अखिलेश यादव ने एक प्रयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने रजिस्टर पर दो इच्छाएं लिखी थीं—प्रदेश में समाजवादी सरकार की वापसी और उत्तर प्रदेश की खुशहाली। उनके अनुसार, उस विद्वान व्यक्ति ने बिना देखे ही वे दोनों बातें हूबहू बता दीं। इसी अनुभव से प्रभावित होकर अखिलेश ने मजाकिया लहजे में लेकिन जोर देते हुए कहा कि अब वह पूरी तरह से ज्योतिषीय सलाह पर चलेंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अब पंडित जी के कहे अनुसार ही वह तय करेंगे कि उन्हें बाल कटवाने हैं या बढ़ाने, या फिर घर से निकलते समय पहला कदम कौन सा रखना है।
खुद को 'नियो समाजवादी' करार देते हुए अखिलेश यादव ने जिस अंदाज में अपनी भावी रणनीति को ज्योतिष और तकनीक (AI) के संगम से जोड़ा है, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जहां एक तरफ समर्थक इसे उनकी हाजिरजवाबी और 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की ओर एक कदम के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे में इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या वाकई समाजवादी पार्टी अब वैज्ञानिक समाजवाद के बजाय सितारों की चाल पर भरोसा करने लगी है। चुनाव से पहले अखिलेश का यह 'धार्मिक और आध्यात्मिक' अवतार यूपी की राजनीति में क्या रंग लाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।