Chandauli News: गंगा पुल के बैरिकेडिंग को लेकर व्यापारी व सपा आमने सामने, प्रशासन ने किया निरीक्षण
Chandauli News: चंदौली में बलुआ–सैदपुर घाट मार्ग पर गंगा पुल की बैरिकेडिंग को लेकर व्यापारियों और समाजवादी पार्टी के बीच विवाद गहरा गया है। व्यापारियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग हटाने का विरोध किया है, जबकि सपा इसे हटाने की मांग कर रही है।
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Chandauli News: चंदौली में बलुआ-सैदपुर घाट मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेडिंग को लेकर जारी विवाद के बीच प्रशासन सक्रिय हो गया है। व्यापारियों की मांग और समाजवादी पार्टी द्वारा आंदोलन की चेतावनी के बाद बुधवार को प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
उप जिलाधिकारी सकलडीहा कुंदन राज कपूर और क्षेत्राधिकारी कृष्ण मुरारी शर्मा ने थानाध्यक्ष बलुआ सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ चंदौली से तिरगांवा होते हुए सैदपुर घाट तक निर्माणाधीन स्टेट हाईवे के गंगा पुल पर पहुंचकर बैरिकेडिंग व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके की स्थिति का अवलोकन करते हुए यातायात व्यवस्था, सड़क निर्माण की प्रगति और संभावित प्रभावों का आकलन किया।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी लगातार बैरिकेडिंग हटाने की मांग कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बैरिकेडिंग के कारण आम जनता और क्षेत्रीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर व्यापार मंडल इसका विरोध कर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है और ऐसे में भारी वाहनों के आवागमन की अनुमति देने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी।व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि निर्माण कार्य पूर्ण होने तक बैरिकेडिंग को यथावत रखा जाए। व्यापारियों ने चेतावनी भी दी थी कि यदि समय से पहले बैरिकेडिंग हटाई गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों की जानकारी जुटाई और विभिन्न पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी। प्रशासन अब जनहित, यातायात व्यवस्था और सड़क निर्माण कार्य की प्रगति को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लेने की तैयारी में जुटा है।फिलहाल बैरिकेडिंग को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। एक ओर राजनीतिक दल अपनी मांगों को लेकर मुखर हो कर आंदोलन की चेतावनी दिया है तो दूसरी ओर व्यापारी संगठन सुरक्षा और जनहित का हवाला देते हुए वर्तमान व्यवस्था बनाए रखने की पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के आगामी निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।