वाराणसी में CM योगी का दलित कार्ड! एक फैसले से बदल दिए UP के सियासी समीकरण, पलटा अखिलेश का फैसला

CM Yogi Dalit Politics In Varanasi: वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए भदोही जिले का नाम फिर से 'संत रविदास नगर' करने की घोषणा की। इस फैसले को उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति और 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

Update:2026-07-29 22:02 IST

CM Yogi Dalit Politics In Varanasi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मनगरी वाराणसी में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बड़ा राजनीतिक फैसला सुना दिया है। मुख्यमंत्री ने मंच से आधिकारिक रूप से घोषणा की कि भदोही जिले की पुरानी पहचान को बहाल करते हुए इसका नाम एक बार फिर 'संत रविदास नगर' किया जाएगा। वर्ष 2012 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस फैसले को निरस्त कर दिया था, योगी सरकार ने उसे पुनः लागू करके राज्य के राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है।

दलित प्रतीकों पर गरमाई राजनीति

उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित अस्मिता और उनके सम्मान से जुड़ा यह विषय हमेशा से अत्यंत संवेदनशील रहा है। वर्ष 2012 में सत्ता में आते ही समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने दलित महापुरुषों और संतों के नाम पर रखे गए कई जिलों और मेडिकल कॉलेजों के नाम बदल दिए थे। इस कदम को लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती और भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार अखिलेश यादव को कटघरे में खड़ा करती रही हैं। वाराणसी में आयोजित इस विशाल दलित समागम में मुख्यमंत्री योगी ने भदोही का नाम बदलकर सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की घेराबंदी कर दी है।

बीजेपी अध्यक्ष का दौरा रद्द

वाराणसी के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उपस्थिति भी प्रस्तावित थी। हालांकि, बिहार की बांकीपुर सीट पर होने वाले महत्वपूर्ण उपचुनाव की वोटिंग और व्यस्तताओं के चलते उनका यह दौरा अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा। राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुपस्थित रहने के बावजूद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस इकलौते ऐलान ने पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

योगी का मास्टरस्ट्रोक

दलित संतों और महापुरुषों की विरासत को सहेजना हमेशा से बीएसपी की राजनीति की धुरी रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को पुनः 'संत रविदास नगर' का दर्जा देकर यूपी की दलित राजनीति में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। लगभग 650 वर्ष पूर्व संत रविदास ने समाज में व्याप्त छुआछूत और गैर-बराबरी के खिलाफ आवाज उठाई थी और उन्हें सामाजिक समरसता का अग्रदूत माना जाता है। इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए बीजेपी ने समाजवादी पार्टी को बैकफुट पर धकेलने की मजबूत जमीन तैयार कर ली है।

2027 चुनाव की बिसात

संत रविदास महाराज के अनुयायियों की संख्या भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में फैली हुई है। देश के भीतर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में रविदासिया समाज का एक बहुत बड़ा प्रभाव क्षेत्र है। ऐतिहासिक रूप से यह बड़ा वोट बैंक शुरुआत में कांग्रेस और उसके उपरांत बहुजन समाज पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ा रहा। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत बीजेपी इस विशाल वोट बैंक के भीतर अपनी पकड़ को और गहरा करने के प्रयास में जुट गई है।

'सपा के आदर्श औरंगजेब और बाबर हैं'

वाराणसी के अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखे बाण चलाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने संत रविदास जी के नाम पर स्थापित जिले की पहचान मिटाने का पाप किया था। सीएम ने कहा कि जो लोग समाज को आपस में बांटने का काम करते हैं, उनके वास्तविक आदर्श औरंगजेब और बाबर हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कन्नौज के मेडिकल कॉलेज से बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का नाम हटा दिया गया था, जिसे उनकी सरकार ने पुनः बहाल किया था।

Tags:    

Similar News