Jhansi News: बसपा में भाईचारे का दावा, लेकिन संगठन में महिलाओं की भागीदारी और जिम्मेदारी सीमित
Jhansi News: बहुजन समाज पार्टी में जातीय और धार्मिक भाईचारे पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन संगठन में महिलाओं की भागीदारी सीमित नजर आती है। झांसी सहित कई स्तरों पर महिला पदाधिकारियों की संख्या कम होने और उन्हें पर्याप्त जिम्मेदारियां न मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Jhansi News(Photo-Social Media)
Jhansi News: बहुजन समाज पार्टी में बड़े जोरशोर से जातीय और धार्मिक समीकरणों के आधार पर भाईचारे की बात तो की जा रही है लेकिन आधी आबादी यानि महिलाओं में चंद नेत्रियों जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर रेखा रानी, प्रदेश स्तर पर इंदु चौधरी, सीमा कुशवाहा,रागिनी तिवारी,वंदना यादव, करिश्मा ठाकुर,गायत्री आदि को छोड़ किसी भी तरह की कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। झांसी में मंडल स्तर हो या जिला, सेक्टर हो या बूथ स्तर पर महिलाओं की भागीदारी ज्यादा देखने को नहीं मिलती है। इस बात को लेकर स्थानीय स्तर के पदाधिकारी खुद मानते हैं।
जिस पार्टी की मुखिया स्वयं महिला हों और उस पार्टी में महिलाओं को जिम्मेदारी या पद न दिया जाना आश्चर्यजनक लगता है। लेकिन ऐसा बहुजन समाज पार्टी में देखा जा रहा है। दरअसल, देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की जिला-शहर या ब्लॉक स्तर की कमेटियों में महिलाओं के लिए लगभग एक तिहाई स्थान होते हैं। महिलाओं को पद और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं, लेकिन बसपा में फिलहाल इस तरह का कोई प्रावधान नजर नहीं आ रहा है। उल्लेखनीय है कि बहुजन समाज पार्टी में जिला-शहर या ब्लॉक कमेटियों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। इन सबके ऊपर को-आर्डीनेटर का पद सृजित कर दिया गया है, यानि पार्टी में स्थानीय स्तर पर को-आर्डीनेटर को ही सर्वेसर्वा बनाया जाता है। वहीं भाईचारा कमेटियां बनाई गईं हैं। मसलन मुस्लिम भाईचारा, ओबासी भाईचारा, एससी भाईचारा जैसी कमेटियां गठित की गईं हैं।
अक्सर बहुजन समाज पार्टी की जनसभा में भारी भीड़ दिखाई पड़ती है, जिसमें बड़ी संख्या में नारीशक्ति की भागीदारी भी होती है। सवाल यह उठता है कि जब पार्टी में महिला पदाधिकारी ही नहीं हैं तो नारीशक्ति की भागीदारी इतनी अधिक कैसे होती है। इस सवाल पर पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है कि हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 400 बूथ कमेटियां होती हैं। हर बूथ पर पांच लोगों कमेटियां बनाई जातीं हैं। इस तरह से विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2000 पदाधिकारी होते हैं। वहीं बामसेफ और पार्टी के कैडर कार्यकर्ता भी होते हैं। इसके अलावा कांग्रेस सेवादल की तरह बसपा में वालेंटियर फोर्स होती है जिसमें महिलाएं भी शामिल होती हैं, जोकि रैली या जनसभा में आने वाले कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करतीं हैं।
बॉक्स किसी जमाने में बुंदेलखंड में बहुजन समाज पार्टी का बहुत असर था। बुंदेलखंड की ज्यादातर विधानसभा या लोकसभा सीटों में से बसपा का बहुत प्रभाव था। लेकिन अब यह स्थिति है कि झांसी में बसपा का कोई कार्यालय तक नहीं है। पार्टी की बैठकों के लिए को-आर्डीनेटर या जिला प्रभारी किसी होटल या विवाहघर को किराए पर लेते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक प्रमुख कार्यकर्ता ने बताया कि यदि पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करानी है तो पार्टी में महिलाओं को उचित स्थान देना चाहिए। कम से कम पार्टी का कार्यालय तो बनाना चाहिए, जहां पार्टी की नियमित बैठकें हो सकें।