Lucknow News: IIT कानपुर की सस्ती तकनीक से धूप, रेत और जिंक ऑक्साइड से होगा औद्योगिक जल शोधन

Lucknow News: IIT कानपुर ने धूप, रेत और जिंक ऑक्साइड से औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन की सस्ती तकनीक विकसित की।

Update:2026-08-20 14:50 IST

Lucknow News(Photo-Social Media)

Lucknow News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के इंजीनियरों ने औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए एक अभिनव, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध रेत, सौर विकिरण यानी धूप और जिंक ऑक्साइड की मदद से औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ किया जा सकेगा।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस तकनीक का सफल परीक्षण जयपुर स्थित एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में किया गया है। सफलता के बाद इस तकनीक को पेटेंट भी कराया जा चुका है। इससे औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार की लागत कम करने और मौजूदा ट्रीटमेंट सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

मौजूदा सिस्टम में जोड़ी गई नई तकनीक

IIT कानपुर में प्रो. शांतनु भट्टाचार्य के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने मौजूदा वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम में एक विशेष फोटोकैटेलिटिक ट्रीटमेंट प्रक्रिया को शामिल किया है। इसका उद्देश्य पानी में मौजूद रासायनिक और जैविक प्रदूषकों को कम करना है। इस प्रक्रिया के परीक्षण के दौरान पानी के बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। BOD और COD पानी में मौजूद जैविक एवं रासायनिक प्रदूषण को मापने के महत्वपूर्ण मानक माने जाते हैं।

दो चरणों में साफ होगा औद्योगिक पानी

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को मुख्य रूप से दो चरणों में विकसित किया है। पहले चरण में पानी का प्रारंभिक उपचार किया जाता है, जबकि दूसरे चरण में सौर ऊर्जा और फोटोकैटेलिटिक प्रक्रिया के जरिए प्रदूषकों को हटाया जाता है।

1. कोगुलेशन-फ्लोकुलेशन यूनिट

मुख्य शोधन प्रक्रिया से पहले पानी को विशेष रूप से तैयार किए गए ‘ग्रीन टैंक’ में भेजा जाता है। यहां पानी के pH स्तर को संतुलित करने के साथ उसका रंग भी कम किया जाता है। इस प्रक्रिया में कुछ सुरक्षित रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके प्रभाव से पानी में घुली भारी गंदगी और अन्य ठोस कण आपस में जुड़कर नीचे बैठ जाते हैं। इससे स्लज को अलग करना आसान हो जाता है और पानी अगले उपचार चरण के लिए तैयार हो जाता है।

2. धूप और जिंक ऑक्साइड से फोटोकैटेलिटिक शोधन

दूसरे चरण में पानी को फोटोकैटेलिटिक यूनिट से गुजारा जाता है। इस यूनिट में रेत और जिंक ऑक्साइड का इस्तेमाल किया गया है। जब इस सिस्टम पर सूर्य की रोशनी पड़ती है तो फोटोकैटेलिटिक प्रक्रिया सक्रिय होती है। इसके बाद पानी में मौजूद कई रासायनिक प्रदूषकों का विघटन शुरू होता है। इस प्रक्रिया से उपचारित पानी की गुणवत्ता में सुधार आता है और उसे निर्धारित मानकों के अनुरूप दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जा सकता है।

उद्योगों का खर्च कम करने में मिलेगी मदद

औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में कई तरह के रासायनिक प्रदूषक और रंग मौजूद हो सकते हैं। ऐसे पानी का उपचार करने के लिए उद्योगों को महंगी प्रणालियों और ऊर्जा आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। IIT कानपुर की विकसित तकनीक में सूर्य की रोशनी जैसे प्राकृतिक संसाधन का इस्तेमाल होने से ऊर्जा की जरूरत कम करने की संभावना है। वहीं सामान्य रेत और जिंक ऑक्साइड के उपयोग से प्रणाली को अपेक्षाकृत किफायती बनाने का प्रयास किया गया है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक मौजूदा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स के साथ एकीकृत की जा सकती है। इससे नए और महंगे बुनियादी ढांचे की आवश्यकता कम हो सकती है और औद्योगिक इकाइयों पर अपशिष्ट जल उपचार का वित्तीय बोझ भी घटाया जा सकता है। औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां धूप की उपलब्धता अधिक है, सौर विकिरण आधारित यह प्रक्रिया जल उपचार के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है।

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