KGMU की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का आईसीयू इंचार्ज पर यौन उत्पीड़न का आरोप, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

Lucknow News: लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के क्वीन मेरी अस्पताल की एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने आईसीयू इंचार्ज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

Update:2025-09-28 01:57 IST

Lucknow News: राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के क्वीन मेरी अस्पताल में एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने गंभीर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह आरोप अस्पताल में आईसीयू वार्ड के इंचार्ज पर लगाएं गए हैं। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने बताया कि 17 सितंबर को मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराने की जानकारी देने गई थी, तभी आईसीयू इंचार्ज ने कथित तौर पर हाथ पकड़ लिया और कहा कि मुझे तुम अच्छी लगती हो। 

शिकायत और कार्रवाई में देरी

पीड़िता क्वीन मेरी अस्पताल में द्वितीय वर्ष की जूनियर रेजिडेंट और कश्मीर की रहने वाली (एससी कम्युनिटी) से हैं। उसने बताया कि 17 सितंबर की शाम को एचडीयू से एक मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराया गया था। इसकी जानकारी आईसीयू इंचार्ज को देने उनके चैंबर पहुंची, तो आरोपी डॉक्टर ने हाथ पकड़ कर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इस घटना से घबराई जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने तत्काल विभाग की चार सीनियर फैकल्टी और रेजिडेंट इंचार्ज को आपबीती सुनाई। 

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

इसके बावजूद आरोपी डॉक्टर पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने 19 सितंबर को क्वीन मेरी प्रशासन को पांच पेज की लिखित शिकायत दर्ज कराई। उसी दिन लखनऊ में कार्रवाई में देरी से परेशान होकर, जूनियर डॉक्टर घर लौट गईं। कुछ दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने केजीएमयू को लीगल नोटिस भिजवाया है। इस मामले पर केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत की जांच 'विशाखा कमेटी को दी गई है। 

सिफारिशें कुलसचिव के समक्ष 

जिस कमेटी ने दोनों पक्षों को सुना है। उस कमेटी ने अपनी सिफारिशें कुलसचिव के समक्ष भेज दी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता ने शिकायत में सवाल उठाया कि क्वीन मेरी अस्पताल पूरी तरह से महिलाओं को समर्पित होने के बावजूद आईसीयू का प्रमुख पुरुष डॉक्टर को क्यों बनाया गया है। पीड़ित के साथ घटना हुए सात दिन से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई न होने से मामला जस का तस बना हुआ है। जिससे जूनियर डॉक्टरों में नाराजगी है।

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