Lucknow News: लखनऊ में नकली दवाओं के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, चार के खिलाफ FIR

Lucknow News: लखनऊ के अमीनाबाद में नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के कथित नेटवर्क का खुलासा। एफएसडीए ने चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच तेज की।

Update:2026-08-12 21:30 IST

लखनऊ, 12 अगस्त। उत्तर प्रदेश में नकली, काउंटरफिट और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में कथित तौर पर फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए दवाओं की खरीद-बिक्री का नेटवर्क संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग की जांच के आधार पर चार लोगों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कराई गई है।

FSDA के अनुसार, मामले में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है। विभाग का आरोप है कि संबंधित फर्मों के बीच वास्तविक दवा आपूर्ति के बिना बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

बिना लाइसेंस दवा कारोबार का आरोप

विभाग के मुताबिक अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के संबंध में जांच के दौरान बिना वैध औषधि लाइसेंस के दवाओं के भंडारण और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड सामने आए। जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है।

FSDA के अनुसार, हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे। विभाग को आशंका है कि इन फर्मों के जरिए दवाओं के अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था। वहीं सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस नामक फर्म पिछले करीब दो वर्षों से बंद बताई गई है। विभाग का आरोप है कि इस फर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी लेनदेन के लिए किया गया।

8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद का रिकॉर्ड

जांच में एमके फार्मा भी विभाग के निशाने पर आई है। FSDA के अनुसार, फर्म के संचालक मनीष बाजपेयी ने वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई।

जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है, जिनमें Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup जैसी दवाओं की खरीद अलग-अलग फर्मों के नाम पर दर्शाई गई थी। विभाग के मुताबिक संबंधित निर्माताओं और फर्मों से सत्यापन कराने पर इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया गया। संबंधित बैचों को भी कथित तौर पर काउंटरफिट बताया गया।

FSDA का यह भी आरोप है कि साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप में मौजूद पुराने डेटा को डिलीट किया गया।

39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब

जांच के दौरान एमके फार्मा से करीब 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। विभाग को आशंका है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया हो सकता है।

FSDA के मुताबिक, मामले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, कूटरचना, नकली दवाओं के कारोबार और अवैध धन अर्जित करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इसी आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत FIR दर्ज की गई है।

लखनऊ में पहले भी हुई हैं कार्रवाई

नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत लखनऊ में इससे पहले भी कई कार्रवाई हो चुकी हैं। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में कथित हेरफेर के मामले में FIR दर्ज कराई गई थी।

जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। इसके अलावा आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी अवैध भंडारण और परिवहन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई।

आगरा में भी सामने आया दवाओं का कथित नेटवर्क

FSDA के अभियान के दौरान आगरा में भी नकली, री-लेबल और सरकारी सप्लाई की दवाओं के कथित अवैध कारोबार के कई मामले सामने आए हैं। विभाग के अनुसार, कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में कार्रवाई के दौरान 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ FIR दर्ज कराई गईं।

जांच में कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए नकली Chymoral Forte और Aciloc जैसी दवाओं की बिक्री तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी के मामले सामने आए। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों और संस्थानों के लिए भेजी गई दवाओं के मूल लेबल हटाकर नए लेबल और मनमानी MRP के साथ बाजार में बेचने के आरोप भी सामने आए हैं।

एक अन्य कार्रवाई में Telma-H और Jardiance जैसी दवाओं की कथित री-लेबलिंग तथा निरस्त या कागजी फर्मों के माध्यम से करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का खुलासा होने की बात विभाग ने कही है।

FSDA के अनुसार, आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी या डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। मई 2026 में एक कथित अवैध गोदाम से करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस/ESI सप्लाई की दवाएं बिना आवश्यक कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं। करीब 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP भी जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

दूसरे राज्यों तक नेटवर्क की जांच

FSDA अब इस कथित नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से बरामद दवाओं के स्रोत की जांच राजस्थान तक पहुंची है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी FIR दर्ज कराई गई है।

देहरादून में विभिन्न ब्रांड की कथित नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। मामले में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चन्द्र के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।

दोषियों के लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने प्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

विभाग के मुताबिक जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग का लक्ष्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन का पता लगाकर उसके स्रोत तक पहुंचना और उसे समाप्त करना है।

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