UP Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दांव! OBC आरक्षण पर बना नया आयोग, बदलेगा पूरा खेल
UP Panchayat Election 2026: कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया।
UP Panchayat Election 2026
UP Panchayat Election 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने हेतु उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की समकालीन एवं अनुभवजन्य जांच करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया।
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी संस्तुतियां देगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है तथा आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा और निकायवार आनुपातिक आरक्षण की संस्तुति देगा। इसके आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो।
सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।