UP Prabhari Mantri Reshuffle: यूपी की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज, जानिये जिलों का हाल
UP Prabhari Mantri Reshuffle: आज किए गए फेरबदल को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिलों में संगठन और प्रशासनिक स्तर पर पकड़ मजबूत बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Etah News: प्रभारी मंत्री बदले, उम्मीदें भी बदलीं: एटा में नई जिम्मेदारी के साथ बढ़ीं जनता की अपेक्षाएं एटा के नये प्रभारी कब आये और कब चले गये पता ही नहीं मीडिया से बनाई दूरी
Sunil Mishra की रिपोर्ट
Etah News: जनपद में प्रभारी मंत्री बदलने के साथ ही राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पूर्व प्रभारी मंत्री और प्रदेश सरकार में मंत्री संदीप सिंह के स्थान पर ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के राज्य मंत्री कैलाश सिंह Rajput को एटा का नया प्रभारी मंत्री बनाए जाने के बाद लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या नई जिम्मेदारी के साथ जनपद में कार्यशैली भी बदलेगी।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो पूर्व प्रभारी मंत्री संदीप सिंह का एटा में प्रभाव सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं था। उनका परिवार लंबे समय से एटा की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत और पूर्व सांसद राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया का प्रभाव लंबे समय तक जनपद की राजनीति में दिखाई देता रहा। सांसद का चुनाव हारने के बाद भी राजू भैया का राजनीतिक कद कम नहीं दिखा और उनके कार्यक्रमों में बड़ी राजनीतिक व प्रशासनिक मौजूदगी अक्सर देखने को मिलती रही।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों से अधिक उपलब्धता और सीधा संवाद चाहती है। कुछ लोगों का मानना है कि नेताओं के सीमित जनसंपर्क और बाहरी जनपदों से जुड़े होने की धारणा ने भी नाराजगी को जन्म दिया।
वहीं नवनियुक्त प्रभारी मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के एटा दौरे को लेकर भी चर्चाएं रहीं। उनका पहला दौरा विभागीय समीक्षा बैठक तक सीमित रहा और वे कम समय रुककर लौट गए।उन्होने प्रथमवार आगमन पर मीडिया से भी दूरी बनाये रखी । इससे कुछ लोगों में यह सवाल भी उठा कि क्या जनता और मीडिया से संवाद के लिए आगे अधिक समय दिया जाएगा या नही विचारर्णीय है।
अधिवक्ता उज्जवल पांडे का कहना है कि प्रभारी मंत्री जब जनपद आएं तो विभागीय बैठकों के साथ आम लोगों अधिवक्ताओ समाज सेवियों से भी संवाद करें, ताकि समस्याएं सीधे उनके सामने रखी जा सकें। उनका मानना है कि इससे सरकार की योजनाओं और जनता के बीच बेहतर समन्वय बनेगा।
अब जनपद की निगाहें इस बात पर हैं कि नए प्रभारी मंत्री प्रशासनिक बैठकों से आगे बढ़कर जनसुनवाई, जनसंवाद और स्थानीय मुद्दों पर कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं या---