UP Politics: 2027 में ब्राह्मण होंगे UP के किंगमेकर? मायावती ने 2007 के 'दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण' फॉर्मूले पर फिर लगाया दांव

Brahmin Vote Bank: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने फिर से अपने ऐतिहासिक दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण फॉर्मूले पर दांव लगा दिया है।

By :  Shivam
Update:2026-05-20 15:47 IST

Mayawati statement on Congress (photo: social media)

BSP Politics: बहुजन समाज पार्टी (BSP) उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर अपने सबसे कामयाब और पुराने ऐतिहासिक फॉर्मूले को जिंदा करने की तैयारी में जुट गई है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी पुरानी और कद्दावर रणनीति 'सोशल इंजीनियरिंग' पर दांव लगाना शुरू कर दिया है। इसके तहत दलित, मुस्लिम और ब्राह्मणों के पुराने पारंपरिक गठजोड़ को दोबारा एकजुट करने की कवायद तेज हो गई है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने सूबे में अपने पहले प्रत्याशी के नाम का भी ऐलान कर दिया है।

पार्टी के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो मान्यवर कांशीराम के देहांत के बाद बसपा ने साल 2007 का विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ा था। उस वक्त इसी सोशल इंजीनियरिंग के अचूक फॉर्मूले की बदौलत बसपा ने सूबे में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि, साल 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी के जनाधार में लगातार गिरावट देखने को मिली। साल 2012 में पार्टी 80 सीटों पर आई, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खुल सका। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी महज 19 सीटों पर सिमट गई। साल 2019 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके बसपा ने 10 लोकसभा सीटें जरूर जीतीं, लेकिन यह गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले चुनावी मैदान में उतरी बसपा का एक भी सांसद चुनाव नहीं जीत पाया।

लगातार कमजोर होते जनाधार को दोबारा मजबूत करने के लिए बसपा प्रमुख अब सीधे तौर पर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही हैं। मायावती पिछले काफी समय से सरकार पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाकर हमलावर हैं, साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण प्रेम को भी महज एक दिखावा करार दिया है। इस सिलसिले में सियासी बढ़त बनाने के लिए मायावती ने जनपद जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट से आशीष पांडेय को पार्टी का पहला आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है। चुनाव की तारीखों के औपचारिक ऐलान से काफी पहले ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेलकर बसपा ने विरोधियों के सामने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

ब्राह्मण समाज को वापस पार्टी के पाले में लाने के लिए बसपा सुप्रीमो ने अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे और राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा समेत कई बड़े ब्राह्मण नेताओं को इस मिशन में उतार दिया है। इसके साथ ही 'ब्राह्मण भाईचारा कमेटी' के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जिलों में जाकर डेरा डालने के निर्देश दिए गए हैं। ये तमाम बड़े चेहरे और पदाधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर घर-घर संपर्क करेंगे और समाज के लोगों को पार्टी की नीतियों से जोड़ेंगे।

चुनावी मशीनरी को धार देने के साथ ही बसपा संगठन को मजबूत करने की कवायद भी युद्धस्तर पर शुरू हो चुकी है। मायावती ने अपने कोर वोटर्स को पूरी तरह एकजुट रखने की जिम्मेदारी सीधे जिला अध्यक्षों को सौंपी है। इसके साथ ही प्रदेश संगठन के आला पदाधिकारियों को जिलावार समीक्षा करने का कड़ा फरमान सुनाया गया है। पार्टी आलाकमान अब हर महीने जिलों की जमीनी प्रगति और सांगठनिक मजबूती का जायजा लेगा, ताकि आने वाले चुनाव में पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर सके।

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