Meerut News: भू-माफियाओं के कब्जे से छुड़ाई 158 हेक्टेयर जमीन पर उगेंगे जंगल, बनेगा 'कपि वन'
Meerut News: हस्तिनापुर में भू-माफियाओं से मुक्त कराई गई 158 हेक्टेयर जमीन पर बड़ा वन विकसित किया जाएगा। यहां ‘कपि वन’, ‘अविरल धारा वन’ और ‘अन्नपूर्णा वन’ बनाए जाएंगे।
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Meerut News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई अब पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल में बदलती नजर आ रही है। हस्तिनापुर क्षेत्र में भू-माफियाओं से मुक्त कराई गई 158 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर वन विभाग विशाल वन विकसित करने जा रहा है। यहां 'अविरल धारा वन', 'कपि वन' और 'अन्नपूर्णा वन' तैयार किए जाएंगे। इसके लिए 2.83 लाख पौधे लगाने की तैयारी अंतिम चरण में है।
वन विभाग ने खेड़ी कलां में 130 हेक्टेयर और बधवा में 28 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है। गंगा तट पर स्थित खेड़ी कलां में बनने वाला 'अविरल धारा वन' नदी के किनारों पर कटान रोकने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और गंगा की पारिस्थितिकी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। विभाग ने पौधारोपण के लिए भूमि समतलीकरण और गड्ढों की खुदाई का काम लगभग पूरा कर लिया है। अगले सप्ताह से बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान शुरू होगा।
वन विभाग की योजना के तहत हस्तिनापुर के कौरवान वन ब्लॉक और राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र में 'कपि वन' और 'अन्नपूर्णा वन' भी विकसित किए जाएंगे। इन वनों में शहतूत, जामुन, अमरूद, आंवला समेत फलदार और कंदमूल वाले पौधे लगाए जाएंगे, ताकि बंदरों को जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे बंदरों का आबादी और खेतों की ओर रुख कम होगा तथा किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।वन विभाग ने हस्तिनापुर और मवाना क्षेत्र की नर्सरियों में करीब साढ़े छह लाख पौधे तैयार किए हैं। इनमें नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, शीशम, खैर, पाकड़, सहजन, जंगल जलेबी, अमलतास, अनार और अन्य स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार कौरवान वन ब्लॉक और राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र में पारंपरिक विधि से करीब 1.45 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जबकि खादर क्षेत्र में बीज रोपण विधि से 1.37 लाख पौधे विकसित किए जाएंगे। इस तरह हस्तिनापुर क्षेत्र में कुल 2.83 लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है।वन विभाग का कहना है कि कब्जामुक्त भूमि पर विकसित होने वाले ये वन केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गंगा संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, मिट्टी संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कर जनहित और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में उपयोग करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।