Meerut News: भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले से विहिप गदगद, बोले आलोक कुमार— यह किसी की हार-जीत नहीं, सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना

Meerut News: धार भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इसे 'सांस्कृतिक न्याय' बताते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक सत्य की जीत है।

Update:2026-05-15 18:59 IST

Meerut News:मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला को हिन्दू मंदिर मानने संबंधी फैसले के बाद विश्व हिन्दू परिषद में उत्साह का माहौल है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में इस निर्णय को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा और ऐतिहासिक सत्य की महत्वपूर्ण पुष्टि बताया।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों और सतत हिन्दू उपासना की परंपरा के आधार पर स्पष्ट माना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। आलोक कुमार ने कहा कि न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) जैसी विशेषज्ञ संस्था से जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद सभी पक्षों को विस्तार से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों ने स्वयं मौके पर जाकर भवन का निरीक्षण भी किया, जिसके बाद यह फैसला सामने आया।

विहिप नेता ने कहा कि अदालत के निर्णय से अब हिन्दुओं को भोजशाला में निरंतर पूजा का अधिकार मिलेगा। साथ ही मुस्लिम पक्ष के लिए भी यह व्यवस्था दी गई है कि वह सरकार से मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान की मांग कर सकते हैं। उन्होंने फैसले को संतुलित और न्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी लोगों को इसका सम्मान करना चाहिए।

आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला केवल पूजा का स्थान बनकर न रह जाए, बल्कि प्राचीन काल की तरह संस्कृत, वेद और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का वैश्विक केंद्र बने। इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का संदेश पहुंचाएगी।

उन्होंने उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का भी स्वागत किया जिसमें केंद्र सरकार से लंदन स्थित British Museum में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने संबंधी अभ्यावेदन पर विचार करने को कहा गया है। आलोक कुमार ने कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है और इसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह विषय किसी समुदाय की हार या जीत का नहीं है। सभी पक्षों को न्यायालय के आदेशों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। विहिप नेता ने समाज में शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह फैसला सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भोजशाला मंदिर के संरक्षण, व्यवस्थापन और संस्कृत अध्ययन की गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवन के लिए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।

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