Raebareli News: रायबरेली में बजट संकट से रुका ‘खेलो इंडिया’ हॉल, खिलाड़ियों के सपने अधूरे
Raebareli News: रायबरेली के जैतपुर में ‘खेलो इंडिया’ मल्टीपर्पज हॉल बजट के अभाव में आठ महीने से अधूरा पड़ा है।
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Raebareli News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के जैतपुर में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के सरकारी दावे अधूरे नजर आ रहे हैं। ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत बनने वाला मल्टीपर्पज हॉल पिछले आठ महीनों से बजट के अभाव में बंद पड़ा है। निर्माण कार्य रुकने से स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों में भारी निराशा देखने को मिल रही हैसमय सीमा बीत जाने के बावजूद स्टेडियम का निर्माण पूरा नहीं हो सका है और निर्माण स्थल पर लंबे समय से सन्नाटा पसरा हुआ है
सरकारी कागजों में पूरी थी तैयारी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू करने के लिए शासन स्तर पर पूरी तैयारी की गई थी। शासनादेश संख्या 1950/बयालीस-2019-60 (बजट)/2018 दिनांक 02 नवंबर 2021 के तहत इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी।मल्टीपर्पज हॉल के निर्माण के लिए कुल 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी। हालांकि विभाग को अब तक केवल 1 करोड़ 19 लाख 73 हजार रुपये ही जारी किए गए।
फरवरी 2025 तक पूरा होना था निर्माण
शासनादेश के अनुसार निर्माण कार्य 5 फरवरी 2024 को शुरू किया गया था। इस परियोजना को 4 फरवरी 2025 तक हर हाल में पूरा किया जाना था।लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। बजट की अगली किस्त जारी न होने की वजह से पिछले आठ महीनों से काम पूरी तरह बंद है।
शुरुआती काम में ही खत्म हो गई राशि
कुल स्वीकृत 4 करोड़ 50 लाख रुपये के मुकाबले विभाग को केवल 1 करोड़ 19 लाख 73 हजार रुपये ही मिले। यह राशि शुरुआती निर्माण कार्य में ही खर्च हो गई।इसके बाद नई धनराशि जारी नहीं हुई, जिसके चलते कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य पूरी तरह रोक दिया। अब निर्माण स्थल पर काम बंद पड़ा हुआ है।
खिलाड़ियों और युवाओं में निराशा
जैतपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के युवाओं को उम्मीद थी कि मल्टीपर्पज हॉल बनने के बाद उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।लेकिन बजट की कमी और निर्माण कार्य रुकने से ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों के सपनों को बड़ा झटका लगा है।
शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि समय पर बजट जारी हो जाता तो यह परियोजना अब तक पूरी हो सकती थी।फिलहाल लोगों की नजरें अब खेल विभाग और शासन पर टिकी हुई हैं कि आखिर कब इस अधूरे पड़े मल्टीपर्पज हॉल को बजट की “संजीवनी” मिलेगी और कब युवाओं का ‘खेलो इंडिया’ का सपना पूरा होगा।