BJP MLA Ticket Cut: ...तो यूपी में इन विधायकों का पत्ता साफ करेगी बीजेपी? दो गुप्त एजेंसियों के सर्वे से मची खलबली

BJP MLA Ticket Cut: क्या 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में खराब रिपोर्ट वाले विधायकों का टिकट कटेगा? बीजेपी ने सर्वे के जरिए अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज और जनता के फीडबैक पर नजरें टिका दी हैं।

By :  Shivam
Update:2026-05-20 18:22 IST

BJP MLA Ticket Cut: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सूबे की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए अपनी चुनावी रणनीति पर बेहद आक्रामक तरीके से काम शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का पूरा ध्यान अब साल 2022 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे अपने विधायकों के जमीनी प्रदर्शन पर टिक गया है। बीजेपी हाईकमान उन माननीयों की जनता के बीच सक्रियता और पकड़ का बारीकी से आकलन करवा रहा है, जिन्हें लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी या दूरी की शिकायतें आ रही हैं। माना जा रहा है कि सत्ता विरोधी लहर को मात देने के लिए पार्टी ऐसे विधायकों की जगह नए और जिताऊ चेहरों को मौका देने की तैयारी में है।

दो बाहरी एजेंसियां कर रही हैं विधायकों के कामकाज का गुप्त सर्वे

चुनावी तैयारियों को पूरी तरह निष्पक्ष और सटीक रखने के लिए बीजेपी आलाकमान ने इस बार एक विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, विधायकों की जमीनी हकीकत और जनता के फीडबैक को जानने का जिम्मा दो अलग-अलग स्वतंत्र बाहरी एजेंसियों को सौंपा गया है। इन एजेंसियों की गोपनीय टीमें पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के शहरों, कस्बों और गांवों में डेरा डाले हुए हैं। ये टीमें सीधे आम जनता के बीच जाकर मौजूदा विधायकों के कामकाज, उनके व्यवहार और क्षेत्र में उनकी उपलब्धता को लेकर सीधी राय जुटा रही हैं। इस सर्वे का एक बड़ा मकसद यह भी है कि हर सीट पर विकल्प के तौर पर मौजूद अन्य लोकप्रिय और सामाजिक प्रभाव वाले संभावित चेहरों को भी परखा जा सके, ताकि जरूरत पड़ने पर मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारा जा सके।

मंडलवार समीक्षा में मुरादाबाद पर पार्टी का विशेष फोकस

बीजेपी का यह महासर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार तरीके से चलाया जा रहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भाजपा सांगठनिक और चुनावी रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है, लेकिन मुरादाबाद मंडल को लेकर पार्टी नेतृत्व की चिंताएं थोड़ी गहरी नजर आ रही हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद मंडल की कुल 27 सीटों में से 14 पर शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन साल 2022 के चुनाव में यह संख्या घटकर महज 10 सीटों पर सिमट गई थी। सीटों के इस नुकसान को देखते हुए पार्टी इस बार मुरादाबाद मंडल में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। यही वजह है कि इस क्षेत्र के विधायकों के रिपोर्ट कार्ड को बेहद गंभीरता से खंगाला जा रहा है और नए जिताऊ समीकरणों की तलाश तेज कर दी गई है।

संगठन, आरएसएस और बाहरी सर्वे की रिपोर्ट का होगा मिलान

टिकट बंटवारे में किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए बीजेपी इस बार थ्री-लेयर चेकिंग का फॉर्मूला अपना रही है। एक तरफ जहां पार्टी का स्थानीय संगठन जिला और क्षेत्रीय स्तर पर संभावित मजबूत उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी उनका स्वतंत्र फीडबैक मांगा जा रहा है। इसके बाद बाहरी एजेंसियों द्वारा तैयार की गई जमीनी रिपोर्ट का मिलान संगठन और संघ की सूचियों से किया जाएगा। जिन नामों पर संगठन, संघ और बाहरी एजेंसियों के सर्वे में एक राय बनेगी, उन्हें ही आगामी चुनाव में टिकट की दौड़ में सबसे आगे रखा जाएगा। एजेंसियां जल्द ही अपनी अंतिम विस्तृत रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपने वाली हैं।

विधायकों की लोकप्रियता के साथ योगी सरकार के काम पर भी टटोली जा रही नब्ज

इस व्यापक सर्वे के दायरे में सिर्फ विधायकों का व्यक्तिगत आचरण ही नहीं है, बल्कि योगी सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं और कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह गहराई से समझने की कोशिश कर रही है कि सूबे में किन योजनाओं का असर सबसे सकारात्मक है और किन मोर्चों पर जनता के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते मिलने वाला यह सटीक फीडबैक उन्हें अपनी चुनावी रणनीति को समय पर दुरुस्त करने का मौका देगा। कुल मिलाकर पार्टी सूत्रों का साफ संदेश है कि जो नेता विधायक बनने के बाद अपने क्षेत्रों से 'गायब' रहे या जिनका रिपोर्ट कार्ड खराब मिला, उनका पत्ता कटना लगभग तय है।

विपक्षी खेमे में भी बढ़ी हलचल, सभी दलों ने झोंकी ताकत

बीजेपी की इन तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी साल 2027 के महामुकाबले के लिए अपनी कमर कस ली है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी जैसे दल भी संभावित उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने में जुट गए हैं। कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहम सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करने के लिए बाहरी एजेंसियों की मदद ली है, तो वहीं समाजवादी पार्टी भी अंदरूनी सर्वे और कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर अपने उम्मीदवारों का खाका तैयार कर चुकी है। बसपा ने भी चुनावी मैदान में बढ़त बनाने के लिए कई सीटों पर अपने प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों के नामों की घोषणा शुरू कर दी है, जबकि आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के कद्दावर नेताओं को अपने पाले में लाकर नए सामाजिक समीकरण गढ़ने की कोशिश में है। इन तैयारियों को देखकर साफ है कि 2027 का चुनावी रण अभी से बेहद दिलचस्प हो चुका है।


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