Apna Dal Politics: सिर्फ एक जाति नहीं, अब पिछड़े और दलितों को साधकर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में अनुप्रिया पटेल

Apna Dal Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अपना दल (एस) ने बड़ी रणनीति बनाई है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संगठन की ताकत बढ़ाने और सिर्फ एक जाति नहीं, बल्कि पिछड़े और दलितों को साधकर गठबंधन में अपना रसूख मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।

Update:2026-06-04 15:50 IST

Apna Dal Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लखनऊ में प्रदेश स्तरीय संगठन पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक कर चुनावी रणनीतियों की समीक्षा की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी भी दल का अस्तित्व और सम्मान उसके संगठन की ताकत पर टिका होता है। चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, इसलिए संगठन के विस्तार और जनसंपर्क के कामों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक पकड़ मजबूत करने और 'हर घर झंडा अभियान' को और गति देने के निर्देश दिए।

पार्टी ने राज्य के सभी 75 जिलों में अपनी जड़ों को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं को जिलावार जिम्मेदारी सौंपकर वहां की राजनीतिक स्थिति, स्थानीय समीकरणों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

पारंपरिक रूप से मुख्य रूप से कुर्मी समाज की नुमाइंदगी करने वाली अपना दल (एस) अब अपनी इस छवि को बदलकर सामाजिक आधार को बड़ा करने की कोशिश में है। पार्टी अब पिछड़े, अति पिछड़े और दलित समुदायों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन के पदों पर विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि उसका दायरा किसी एक जाति विशेष तक सीमित नहीं है।

राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस सक्रियता का एक बड़ा मकसद भविष्य में बीजेपी के साथ होने वाले सीट बंटवारे में मोलभाव की क्षमता को बढ़ाना भी है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में 12 सीटें जीतकर अपना दल (एस) बीजेपी गठबंधन में सबसे कामयाब सहयोगी बनकर उभरी थी। पार्टी नेतृत्व को पूरा भरोसा है कि 2027 के चुनाव में उनका जनाधार और मजबूत होगा, जिससे वे पहले के मुकाबले ज्यादा सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकेंगे। गैर-यादव पिछड़े वर्ग में अच्छा प्रभाव रखने वाली यह पार्टी चुनाव से पहले अपनी सांगठनिक ताकत दिखाकर गठबंधन के भीतर अपनी हिस्सेदारी और राजनीतिक रसूख को और ज्यादा बढ़ाना चाहती है।

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