CM Yogi Aggressive in West UP: बिजनौर से गाजियाबाद तक... आखिर वेस्ट यूपी में CM योगी इतने आक्रामक क्यों?
CM Yogi Aggressive Politics in West UP: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने आक्रामक राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। बिजनौर रैली में उन्होंने सूर्या चौहान हत्याकांड, गाय, पाकिस्तान और मौलवियों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बयान दिए।
CM Yogi Adityanath
CM Yogi Aggressive Politics in West UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय हो चुके हैं। हाल ही में बिजनौर की एक जनसभा के दौरान उन्होंने राज्य की मौजूदा राजनीति को प्रभावित करने वाले कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की। इस रैली में उन्होंने गाजियाबाद के खोड़ा में हुए सूर्या चौहान हत्याकांड का जिक्र करते हुए सख्त लहजे में कहा कि दोस्ती की आड़ में की जाने वाली छुरेबाजी को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपराधियों के संदर्भ में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कुपुत्रों को सबक सिखाना बेहद जरूरी है और यदि सामने 'खर-दूषण' जैसी प्रवृत्तियां हों, तो शस्त्र उठाना ही पड़ता है।
इसी दौरान उन्होंने उन मौलवियों और मौलानाओं पर भी तीखा तंज कसा जो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज के लिए गाय महज एक जानवर नहीं बल्कि माता का दर्जा रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मां और बेटे के इस पवित्र रिश्ते को किसी सरकारी मुहर या औपचारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह संबंध पूरी तरह से आस्था, संस्कार और गहरी श्रद्धा पर आधारित है। अपनी इस जनसभा में उन्होंने गंगा, पाकिस्तान और नमाज जैसे विषयों को भी छुआ, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि उनका रुख बेहद आक्रामक और स्पष्ट है। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है कि मुख्यमंत्री विकास, बेरोजगारी या महंगाई जैसे पारंपरिक मुद्दों के बजाय इन खास विषयों पर ध्यान क्यों केंद्रित कर रहे हैं।
इसके पीछे मुख्य वजह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, जिसके लिए अब बेहद कम समय बचा है। ऐसे में सभी प्रमुख राजनीतिक दल बंद कमरों की रणनीति से बाहर निकलकर जनता के बीच अपना एजेंडा स्थापित करने में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री भी गाय, पाकिस्तान और मौलवियों जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में लाकर विपक्ष के खिलाफ एक मजबूत माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि चुनावी दृष्टिकोण से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र बेहद निर्णायक माना जाता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 136 सीटें आती हैं। वर्ष 2022 के पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन ने यहाँ 93 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी के गठबंधन को महज 43 सीटें मिली थीं। चूंकि इस क्षेत्र के कई जिलों में मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी संख्या में है, इसलिए यदि समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्ग, दलितों और अल्पसंख्यकों को एक मंच पर लाने में सफल हो जाती है, तो यह सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी समीकरण को साधने और मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए मुख्यमंत्री चुनाव से बहुत पहले ही इस क्षेत्र में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा जैसे प्रमुख मंडलों वाले इस पूरे क्षेत्र में समाजवादी पार्टी अपने 'पीडीए' यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले के सहारे पिछले लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है। यदि सपा आगामी विधानसभा चुनाव में भी इस समीकरण को दोहराने में कामयाब रहती है, तो राज्य के राजनीतिक नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। हालांकि, पिछले चुनाव में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) अब भाजपा के पाले में आ चुकी है, जिससे जाट और मुस्लिम बाहुल्य वाले मुजफ्फरनगर, शामली और बागपत जैसे इलाकों के समीकरण इस बार बदल सकते हैं। पिछले चुनावों में भाजपा ने जाट, गैर-यादव ओबीसी और शहरी मतदाताओं के मजबूत समर्थन से बढ़त बनाई थी, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी चुनावों में भी इसी सामाजिक गठजोड़ के सहारे विपक्ष पर अपनी बढ़त बनाए रखना चाहते हैं।