UP Vidhan Sabha: काउंसिल हाउस से म्यूजियम तक...यूपी की पुरानी विधानसभा बनेगी संग्रहालय
UP Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नया अत्याधुनिक विधानभवन बनने का रास्ता साफ हो गया है। नई विधानसभा बनने के बाद हजरतगंज स्थित 102 साल पुराने ऐतिहासिक विधानसभा को संग्रहालय में बदल दिया जायेगा।
UP New Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही नए और अत्याधुनिक विधानभवन कॉम्प्लेक्स के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। गोमती नगर स्थित सहारा शहर की भूमि पर बनने वाले इस भव्य विधानसभा परिसर को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही हजरतगंज स्थित ऐतिहासिक पुरानी विधानसभा भवन को संरक्षित कर संग्रहालय के रूप में विकसित करने की तैयारी भी तेज हो गई है।
एलडीए ने नए विधानभवन कॉम्प्लेक्स की डिजाइन और प्लानिंग के लिए कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट के चयन हेतु टेंडर जारी कर दिया है। जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के अनुसार इच्छुक कंपनियां और कंसल्टेंसी फर्में 23 मई से 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर निर्माण लागत और परियोजना की समयसीमा तय होगी।
प्रदेश सरकार की योजना है कि नई विधानसभा आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार की जाए। इसमें ई-विधानसभा प्रणाली, अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, भूकंप-रोधी तकनीक और विधायकों के लिए पर्याप्त स्थान जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
पुरानी विधानसभा बनेगी लोकतांत्रिक विरासत का संग्रहालय
वहीं, हजरतगंज मार्ग पर स्थित मौजूदा ऐतिहासिक विधानभवन को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत के प्रतीक के रूप में संरक्षित किया जाएगा। करीब 102 वर्ष पुरानी इस इमारत को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रदेश की संसदीय परंपरा और स्थापत्य कला की इस धरोहर को करीब से जान सकें।
1928 में हुआ था ऐतिहासिक भवन का उद्घाटन
इस ऐतिहासिक भवन की आधारशिला 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने रखी थी। लगभग छह वर्षों में तैयार हुए इस भवन का उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को तत्कालीन गवर्नर सर विलियम मैरिस ने किया था। ब्रिटिश शासनकाल में इसे “काउंसिल हाउस” के नाम से जाना जाता था।
स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है पुराना विधानभवन
मिर्जापुर से लाए गए चुनार के बलुआ पत्थरों से बने इस भवन की वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है। इसका विशाल अष्टकोणीय गुंबद, रोमन और भारतीय शैली की नक्काशी, नाचते मोरों की आकृतियां और वाराणसी के कारीगरों द्वारा तैयार की गई जालियां इसकी भव्यता को खास बनाती हैं।
हालांकि, समय के साथ यह भवन आधुनिक जरूरतों के लिहाज से सीमित साबित होने लगा है। बढ़ती तकनीकी आवश्यकताओं, सुरक्षा मानकों और भविष्य में विधायकों की संख्या को देखते हुए नए विधानभवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। ऐसे में सरकार ने पुरानी विधानसभा की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए नई आधुनिक विधानसभा बनाने का फैसला लिया है।