छात्र नेता से बसपा के इकलौते विधायक तक...जानिए कौन थे Umashankar Singh, जिनके निधन से पसरा शोक

Umashankar Singh Death: बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का 55 साल की उम्र में निधन हो गया। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले उमाशंकर सिंह तीन बार रसड़ा से विधायक बने और 2022 में विधानसभा में बसपा की इकलौती आवाज बने। जानिए उनके राजनीतिक सफर और मायावती से करीबी रिश्ते की पूरी कहानी।

Update:2026-08-05 22:32 IST

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Umashankar Singh Death: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम निधन हो गया। वह 55 साल के थे और लंबे समय से कैंसर (Cancer) से जूझ रहे थे। लखनऊ (Lucknow) में आइसोलेट होकर उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे नेता का सफर खत्म हो गया, जिन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर विधानसभा तक अपनी मजबूत पहचान बनाई।

मायावती उन्हें भाई मानती थीं, BJP से भी रहे करीबी संबंध

उमाशंकर सिंह का बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) के साथ बेहद करीबी रिश्ता था। मायावती उन्हें अपना भाई मानती थीं।

वहीं प्रदेश की भाजपा (BJP) सरकार से भी उनके अच्छे संबंध रहे। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह (Dinesh Pratap Singh) और उमाशंकर सिंह रिश्तेदार थे। दिनेश प्रताप सिंह की बेटी का विवाह उमाशंकर सिंह के बेटे से हुआ था।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। साल 1990 में वह बलिया (Ballia) के एएसी कॉलेज (AAC College) से छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत हुई।

इसके बाद साल 2000 में वह बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष बने और स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

लगातार तीन बार बने विधायक

साल 2011 में उमाशंकर सिंह ने बसपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा विधानसभा (Rasra Assembly) सीट से पहली बार विधायक चुने गए।

उस चुनाव में बसपा की सीटें 206 से घटकर 80 रह गई थीं, लेकिन उमाशंकर सिंह ने 84 हजार से अधिक वोट हासिल किए और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) (SP) के उम्मीदवार सनातन पांडेय (Sanatan Pandey) को करीब 52 हजार वोटों से हराया। उन्होंने 2017 में अपनी जीत बरकरार रखी और 2022 में लगातार तीसरी बार विधायक बने।

2022 में बसपा का अकेला खाता खोला

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का विधानसभा में खाता सिर्फ उमाशंकर सिंह के दम पर खुला था। वह पार्टी के इकलौते विधायक बनकर उभरे। लगातार तीन चुनाव जीतकर उन्होंने रसड़ा क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।

सामूहिक विवाह कार्यक्रमों से भी बटोरी थी सुर्खियां

उमाशंकर सिंह सामाजिक कार्यों को लेकर भी चर्चा में रहे। साल 2012 में उन्होंने 251 लड़कियों का सामूहिक विवाह कराया था।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया, जिसकी काफी चर्चा हुई थी।

2017 में सदस्यता हुई थी रद्द

14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक (Ram Naik) ने उमाशंकर सिंह को अयोग्य घोषित कर दिया था। उन पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के उल्लंघन का आरोप लगा था।

मामला सरकारी ठेके अपने नाम पर लेने से जुड़ा था। लोकायुक्त (Lokayukta) की जांच में आरोप सही पाए गए थे। बाद में हाईकोर्ट (High Court) के निर्देश पर चुनाव आयोग (Election Commission) की सिफारिश के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

यह उत्तर प्रदेश का पहला मामला था, जिसमें किसी विधायक की सदस्यता पिछली तारीख से समाप्त की गई थी।

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