ईरान में 'महा-तख्तापलट'! सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का पावर 'हाईजैक', IRGC कमांडरों ने छीनी सत्ता की चाबी

अमेरिका से संघर्ष के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव आया है। रिपोर्ट के अनुसार IRGC के कमांडर अहम फैसले ले रहे हैं, जबकि सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की भूमिका सीमित होकर औपचारिक रह गई है।

By :  Shivam
Update:2026-04-29 20:38 IST

अमेरिका के साथ जारी संघर्ष ने ईरान की सत्ता संरचना को पूरी तरह बदल दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अब मुज्तबा खामेनेई की भूमिका काफी सीमित हो गई है और वे केवल औपचारिक मंजूरी देने वाले नेता बनकर रह गए हैं। ईरान से जुड़े अधिकांश अहम फैसले अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के चुनिंदा कमांडर ले रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका ने बातचीत में रुकावट के लिए भी IRGC को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्ट बताती है कि बड़े फैसले पहले ही IRGC द्वारा लिए जाते हैं और बाद में सिर्फ जानकारी के तौर पर मुज्तबा खामेनेई तक पहुंचाए जाते हैं। यानी निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भूमिका लगभग नहीं के बराबर रह गई है।

मार्च 2026 में सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मुज्तबा सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इजराइल के हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके कारण उन्हें बोलने में भी दिक्कत हो रही है। इसमें यह भी कहा गया कि उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी कराई है। हालांकि, इन दावों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। खास बात यह है कि यह पहला मौका है जब ईरान का कोई सुप्रीम लीडर इतने लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से गायब रहा है।

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त होता है और वही अंतिम निर्णय लेते हैं। मुज्तबा से पहले अयातुल्ला अली खामेनेई इस पद पर थे और वे वरिष्ठ कमांडरों से सलाह लेकर अंतिम फैसला स्वयं करते थे।

लेकिन मौजूदा हालात में तस्वीर बदल चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध की वजह से IRGC ने प्रभावी रूप से सत्ता अपने हाथ में ले ली है और मुज्तबा की भूमिका केवल औपचारिक रह गई है।

इस समय IRGC की कमान अहमद वाहिदी के हाथ में है, जिन्हें खामेनेई परिवार का करीबी माना जाता है। मार्च में ही उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने पाकपूर की जगह ली, जिनकी एक बैठक के दौरान मौत हो गई थी।

1979 में स्थापित IRGC का मुख्य उद्देश्य ईरान की इस्लामिक व्यवस्था और सुप्रीम लीडर के पद की रक्षा करना है। वर्तमान में इस संगठन में लगभग दो लाख सदस्य शामिल हैं।

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