इस्लामाबाद में ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ मीट बना विवाद, पाक पत्रकारों पर भड़का अमेरिकी दल - “हमारा गलत इस्तेमाल हुआ”
Islamabad press club controversy: अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को कवर करने पाकिस्तान पहुंचे विदेशी पत्रकारों की एक अनौपचारिक मुलाकात अब बड़े विवाद में बदल गई है।
Islamabad press club controversy (photo: social media)
Islamabad press club controversy: अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को कवर करने पाकिस्तान पहुंचे विदेशी पत्रकारों की एक अनौपचारिक मुलाकात अब बड़े विवाद में बदल गई है। इस्लामाबाद प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम को पहले केवल बातचीत और नेटवर्किंग का मंच बताया गया था, लेकिन देखते ही देखते यह राजनीतिक बयानबाज़ी का केंद्र बन गया। इस घटनाक्रम से नाराज़ विदेशी पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें धोखे में रखकर उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे के लिए किया गया।
विदेशी पत्रकारों को दिया था मुलाकात का निमंत्रण
जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विदेशी पत्रकारों को केवल अनौपचारिक मुलाकात का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नीतियों पर खुलेआम आलोचना शुरू हो गई। इसमें सरकार-विरोधी पत्रकार मतीउल्लाह जान और असद अली तूर ने देश में प्रेस की आजादी, कथित उत्पीड़न और फर्जी मुठभेड़ों जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया।
यह पूरा घटनाक्रम विदेशी पत्रकारों के लिए अप्रत्याशित था, क्योंकि वे इसे सिर्फ एक पेशेवर और सामाजिक मुलाकात समझकर पहुंचे थे। लेकिन विवाद तब और बढ़ गया जब इस कार्यक्रम की एक ग्रुप फोटो को एक राजनीतिक बयान के साथ जारी कर दिया गया। इस बयान में पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए और तस्वीरों को इस तरह पेश किया गया मानो विदेशी पत्रकार भी इन आरोपों से सहमत हों।
अमेरिकी पत्रकार कैटलिन डोर्नबोस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें “धोखा दिया गया और इस्तेमाल किया गया” महसूस हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी ने उन विदेशी पत्रकारों से उनकी सहमति ली, जिनकी तस्वीरें इस बयान के साथ जोड़ी गईं। उन्होंने कहा, “हम एक मेहमान देश में पेशेवर काम के लिए आए थे, लेकिन हमें अनजाने में सरकार का आलोचक बना दिया गया।”
डोर्नबोस, जिन्हें न्यूयॉर्क पोस्ट से जुड़ा माना जाता है और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी पत्रकारों में गिना जाता है, इस कार्यक्रम से दूरी बनाने वाली पहली पत्रकार बनीं। उनके अलावा सीएनएन और अल जज़ीरा जैसे बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकार भी इस बैठक में मौजूद थे।
विवाद को और हवा तब मिली जब कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए बयान में नेशनल प्रेस क्लब (NPC) का लोगो लगाया गया, जिससे यह आयोजन आधिकारिक प्रतीत हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि विदेशी पत्रकारों को जो शील्ड दी गई, उस पर कथित रूप से भारतीय झंडा बना हुआ था, जिसने संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया।
इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए पाकिस्तानी पत्रकार मरियम नवाज खान ने कहा कि कार्यक्रम का एक छोटा हिस्सा ही प्रेस की स्वतंत्रता पर चर्चा के लिए था और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में असहमति को अपराध बना दिया गया है और कई पत्रकारों को “एंटी-पाकिस्तान” नैरेटिव के नाम पर निशाना बनाया जाता है।
इस विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब मतीउल्लाह जान ने Neo News से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी यह यात्रा अचानक समाप्त हो गई है, हालांकि उन्होंने इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की। वहीं, असद अली तूर ने संकेत दिया कि इस इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है।
मीडिया जगत में इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ पत्रकारों ने मतीउल्लाह जान के समर्थन में आवाज उठाई, जबकि बलूच पत्रकार किय्या बलूच ने आरोप लगाया कि कैटलिन डोर्नबोस की प्रतिक्रिया के बाद ही जान को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।
इस पूरे विवाद ने पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या विदेशी पत्रकारों को बुलाकर इस तरह राजनीतिक संदेश देना एक सुनियोजित रणनीति थी या फिर यह एक बड़ी चूक।