फोन पर भिड़ गए दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेता! ट्रंप ने पुतिन को सुनाई खरी-खरी, दे डाली ये सख्त चेतावनी
रूस-ईरान समीकरण, यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की सख्त नीति के बीच वैश्विक राजनीति नए मोड़ पर है। पुतिन शांति की पहल कर रहे हैं, जबकि ट्रम्प प्राथमिकताओं पर टकराव दिखा रहे हैं। क्या दुनिया बातचीत चुनेगी या बढ़ेगा संघर्ष?
दुनिया इस समय एक ऐसी दहलीज पर खड़ी है जहाँ से एक तरफ शांति का रास्ता जाता है और दूसरी तरफ विनाशकारी महायुद्ध का। रूस और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर आ गई है, जिसने वैश्विक राजनीति के समीकरण ही बदल दिए हैं। सेंट पीटर्सबर्ग से लेकर व्हाइट हाउस तक मची इस हलचल ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले कुछ दिन पूरी मानवता के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हाल ही में एक ऐसी बैठक हुई जिसने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ लंबी बातचीत की। इस मुलाकात के बाद जो खबरें बाहर आईं, वे किसी बड़े धमाके से कम नहीं थीं। पुतिन ने खुद को ईरान संकट का समाधानकर्ता बनाकर पेश किया और खुलेआम ईरान को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया। पुतिन का यह संदेश पश्चिमी देशों के लिए एक खुली चुनौती था कि मास्को अब ईरान के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। अराघची ने भी पुतिन का शुक्रिया अदा करते हुए इसे एक नई और मजबूत शुरुआत बताया।
यूरेनियम का वो गुप्त ऑफर और ट्रम्प का गुस्सा
लेकिन असली खेल तो तब शुरू हुआ जब पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन किया। इस बातचीत में पुतिन ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा जिसने वाशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया। पुतिन ने कहा कि रूस ईरान के करीब नौ सौ सत्तर पाउंड समृद्ध यूरेनियम के विशाल भंडार को खुद संभालने के लिए तैयार है। यह एक ऐसा प्रस्ताव था जो परमाणु शक्ति के संतुलन को पूरी तरह बदल सकता था। पुतिन का मानना था कि इससे ईरान का परमाणु संकट सुलझ जाएगा और क्षेत्र में शांति आएगी, लेकिन ट्रम्प का मिजाज कुछ और ही था। ट्रम्प ने इस प्रस्ताव पर बेहद ठंडा और तीखा रुख अपनाते हुए पुतिन को कड़ी नसीहत दे डाली।
यूक्रेन का जिक्र कर ट्रम्प ने दिखाया कड़ा रुख
ट्रम्प ने पुतिन को साफ शब्दों में आईना दिखाते हुए कहा कि अगर वह वाकई में शांति चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के बजाय पहले यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर अपनी पूरी ऊर्जा लगानी चाहिए। यह बयान महज एक सलाह नहीं थी, बल्कि एक सख्त चेतावनी थी कि अमेरिका अब रूस को उसकी सीमाएं याद दिला रहा है। ट्रम्प ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी पहली प्राथमिकता यूक्रेन है और पुतिन का ईरान के मामले में मध्यस्थ बनना उन्हें रास नहीं आ रहा है। उन्होंने पुतिन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले अपनी सीमा पर लगी आग बुझाएं, फिर दुनिया की फिक्र करें।
ईरान की तबाही और हॉर्मुज का वो खतरनाक खेल
ईरान के मोर्चे पर भी ट्रम्प का रुख किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से कम नहीं रहा है। अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर जो नाकेबंदी की है, उसने ईरान की अर्थव्यवस्था की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है। ट्रम्प ने इसे बमबारी से भी ज्यादा घातक हथियार बताया है और कहा है कि ईरान की हालत अब बहुत खराब हो चुकी है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी चाल चलते हुए हॉर्मुज को खोलने की बात तो की है, लेकिन बदले में अमेरिका और इजराइल से लिखित गारंटी मांगी है कि उन पर कभी हमला नहीं होगा। ट्रम्प ने इस मांग को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह तनाव अब किसी भी वक्त एक बड़े विस्फोट का रूप ले सकता है।
शांति की पहल या फिर तीसरे विश्व युद्ध का आगाज
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। रूस ने चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई भी सैन्य हमला दुनिया को भयानक तबाही की ओर ले जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुतिन की यह शांति की पेशकश सिर्फ एक दिखावा है या फिर यह शक्ति विस्तार की कोई गहरी रणनीति? दूसरी तरफ ट्रम्प की जिद दुनिया को एक नए टकराव की ओर धकेल रही है। आज पूरी दुनिया इस सवाल का जवाब ढूंढ रही है कि क्या बातचीत से हल निकलेगा या फिर मिसाइलों के धमाके ही आखिरी फैसला करेंगे।