पाकिस्तान में शिया समुदाय पर आईएस का कहर, लोग बन रहे शरणार्थी

ईरान और पाकिस्तान में भी इनके पाँच-पाँच लाख लोग बसे हुए हैं। आईएस के कहर के कारण ये लोग पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में जाने पर मजबूर हो गए थे और अधिकतर क्वेट्टा शहर में बसे हुए हैं।

Update: 2021-01-06 11:41 GMT
पाकिस्तान में शिया समुदाय पर आईएस का कहर, लोग बन रहे शरणार्थी (PC: social media)

लखनऊ: पाकिस्तान में आईएस यानी इस्लामिक स्टेट अल्पसंख्यक शिया हजारा समुदाय के पीछे पड़ गया है। आईएस ने बलूचिस्तान में इस समुदाय के 11 लोगों की हत्या कर दी है। आईएस के सदस्य सुन्नी होते हैं और इस आतंकी संगठन ने बीते कुछ सालों में पाकिस्तान के शियाओं पर कई हमले किए हैं।

हज़ारा लोग मध्य अफगानिस्तान के हैं। यह अफगानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय हैं। इनकी जनसँख्या २६ से ५४ लाख के बीच में मानी जाती है।

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ईरान और पाकिस्तान में भी इनके पाँच-पाँच लाख लोग बसे हुए हैं। आईएस के कहर के कारण ये लोग पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में जाने पर मजबूर हो गए थे और अधिकतर क्वेट्टा शहर में बसे हुए हैं। जब अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में थी तो हज़ारा लोगों पर उनके शिया होने की वजह से बहुत जुल्म ढाए गए थे। जिसकी वजह से बामियान प्रान्त और दायकुंदी प्रान्त जैसे हज़ारा-प्रधान क्षेत्रों में भुखमरी और अन्य विपदाएँ फैली थीं।

मंगोल मूल के हैं हजारा

हजारा शिया मुसलमानों को मंगोल मूल का माना जाता है। फारसी भाषा का एक रूप ‘हजारगी’ बोलने वाले इन मुसलमानों के बारे में अलग-अलग जानकारियां हैं कि ये असल में कहां से आए। ये भी माना जाता है कि ये तुर्क और मंगोल मूल का मिश्रण हैं। जो भी हो, कुछ सालों पहले पाकिस्तान में जगह-जगह एक बात आम थी कि पाक यानी शुद्ध लोगों की जगह और यहां शिया या हजारा शिया समुदाय को बसने नहीं दिया जाएगा। मंगोलों की तरह चेहरे-मोहरे वाला ये समुदाय अलग से पहचान में आ जाता है और फिर इन्हें छांट-छांटकर सजा मिलती है। साल 2013 में बड़ा नरसंहार हुआ था, जिसमें लगभग महीनेभर में ही सैकड़ों मुस्लिमों को मार दिया गया।

कोयले की खदान में किया हमला

आईएस के आतंकी बलूचिस्तान की एक कोयला खदान में आये और वहां काम करने वाले अल्पसंख्यक शिया हजारा समुदाय के 11 लोगों को पकड़ कर ले गए। बाद में पास के पहाड़ों में इनकी ह्त्या कर दी गयी।

शिया हजारा समुदाय के लोगों को इस्लामिक स्टेट जैसे सुन्नी आतंकी संगठन कई बार निशाना बना चुके हैं। आईएस ने अफगानिस्तान में भी अल्पसंख्यक शियाओं के खिलाफ जंग छेड़ी हुई है और 2014 में वहां सक्रिय होने के बाद कई घातक हमलों की जिम्मेदारी ली है। क्वेट्टा में अप्रैल 2019 में एक खुले बाजार में एक आत्मघाती बम हमले में 20 लोग मारे गए थे। उस समय आईएस ने कहा था कि उसने शियाओं और पाकिस्तानी सेना के कुछ लोगों को निशाना बनाया था। पिछले साल जनवरी में क्वेट्टा में ही एक मस्जिद में हुए शक्तिशाली विस्फोट की जिम्मेदारी भी आईएस ने ही ली थी।

विस्फोट में एक वरिष्ठ पुलिस अफसर और 13 अन्य लोग मारे गए थे और 20 श्रद्धालु घायल हो गए थे। बलूचिस्तान में बलोच अलगाववादी समूहों द्वारा एक विद्रोह आंदोलन भी चलाया जा रहा है। वो भी गैर-बलोच श्रमिकों को निशाना बनाते हैं लेकिन उन्होंने अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों पर कभी हमला नहीं किया।

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मजबूत और मेहनतकश

पाकिस्तान में हाजरा समुदाय के चंद लोग ऊंचे पदों पर भी पहुंचे हैं। जैसे कि जनरल मुहम्मद मूसा खान हजारा कमांडर इन चीफ थे। ये समुदाय काफी मेहनती और शारीरिक तौर पर बहुत मजबूत होता है। लेकिन इसके अलावा आमतौर पर पाकिस्तान में ये लोग मुख्यधारा में नहीं हैं, बल्कि खनन जैसे कामों में इनका इस्तेमाल होता है। ताजा मामले में खनन मजदूरों का ही आतंकियों ने कत्ल किया।

रिपोर्ट- नीलमणि लाल

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