खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चली बड़ी चाल, UAE में हाई-लेवल मीटिंग के बाद चर्चाएं तेज!
NSA Visit to UAE: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। जानें क्या है खास।
NSA Visit to UAE: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इस अहम बैठक में दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, क्षेत्रीय हालात और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
यूएई में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि एनएसए अजीत डोभाल ने आधिकारिक दौरे के दौरान राष्ट्रपति से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन दिया और दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने के उपायों पर बातचीत की।
जयशंकर के दौरे के बाद दूसरा बड़ा कदम
दरअसल यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब इसी महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी दो दिन के दौरे पर यूएई गए थे। उस दौरान उन्होंने अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश दिया था।
इस बैठक में जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति का आभार भी जताया था। इस दौरान दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी मौजूद थे।
सऊदी से शुरू हुई कूटनीतिक कवायद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई पहुंचने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब का भी आधिकारिक दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां के ऊर्जा मंत्री, विदेश मंत्री और अपने समकक्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी।
जिसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि, प्रधानमंत्री के निर्देश पर खाड़ी देशों के साथ लगातार बातचीत जारी है। यह पूरी कवायद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के हितों को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा है।
सुरक्षा और व्यापार दोनों पर फोकस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब में हुई बातचीत के दौरान चार अहम मुद्दों पर खास चर्चा हुई थी। इसमें वैश्विक व्यापार मार्गों पर मंडरा रहे खतरे के बीच सप्लाई चेन को बनाए रखना, होर्मुज और फारस की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं पर बातचीत, खुफिया जानकारी साझा करने और तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना शामिल रहा।
इन सभी मुद्दों का सीधा संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों से है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत की रणनीति
वहीं मौजूदा हालात को देखते हुए विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल के खाड़ी देशों के दौरे बेहद अहम माने जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्र में अस्थिरता के माहौल में भारत अपनी कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने में जुटा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर की गई इस पहल के तहत 20 अप्रैल को सऊदी अरब में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें हुई थीं, जिनमें ऊर्जा, विदेश और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद यूएई में भी वार्ता का फोकस खाड़ी के हालात और व्यापारिक मार्गों पर ही रहा।
क्षेत्रीय स्थिरता और बढ़ते तनाव पर मंथन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में चल रहे जियो पॉलिटिकल घटनाक्रमों और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहराई से बातचीत की।
इस चर्चा में सुरक्षा चिंताओं, आर्थिक हितों और इजरायल-ईरान युद्ध के बाद बढ़े तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कुल मिलाकर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती उथल-पुथल के बीच भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और कूटनीतिक स्तर पर हर जरूरी कदम उठा रहा है, ताकि बदलते हालात में भी उसका संतुलन और पकड़ बनी रहे।