तनाव के बीच ईरान चल रहा बड़ी चाल! सूटकेस उठाए इन देशों के दौरे पर हैं विदेश मंत्री, जानें वजह
US-Iran Conflict: मध्य पूर्व की सियासत इस वक्त बेहद गर्म है और इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार सूटकेस उठाए एक देश से दूसरे देश भागदौड़ कर रहे हैं। जिसके बाद अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह दौरे किसी बड़े कूटनीतिक मिशन की ओर इशारा कर रहे हैं। आइए इसकी पड़ताल करते हैं।
US-Iran Conflict: मध्य पूर्व की सियासत इस वक्त बेहद गर्म है और इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार सूटकेस उठाए एक देश से दूसरे देश भागदौड़ कर रहे हैं। जिसके बाद अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका के साथ डील करने के लिए ईरान अब बेचैन हो चुका है या फिर यह दौरे किसी बड़े कूटनीतिक मिशन की ओर इशारा कार रहे हैं। आइए इसकी पड़ताल करते हैं।
पाकिस्तान से ओमान और फिर रूस का सफर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्बास अराघची सबसे पहले पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर से लंबी बातचीत की। इसके बाद वह सीधे ओमान की राजधानी मस्कट रवाना हो गए। ओमान हमेशा से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच एक भरोसेमंद बिचौलिए की भूमिका निभाता रहा है। मस्कट में अराघची ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की और अहम मुद्दों पर चर्चा की।
वहीं इस पूरे दौरे में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब उनकी टीम का एक हिस्सा आगे जाने के बजाय वापस ईरान लौट गया। इसका मकसद साफ था कि अब तक हुई बातचीत की जानकारी देश की शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई जाए और आगे की रणनीति के लिए नई हिदायतें ली जाएं।
जिसके बाद अब अराघची मस्कट से वापस इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जहां एक बार फिर पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ विस्तार से बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद उनका अगला पड़ाव रूस बताया जा रहा है। इससे साफ है कि ईरान हर मोर्चे पर समर्थन जुटाने में लगा है और किसी भी तरह इस तनाव को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप का यू-टर्न और ‘10 मिनट’ वाला दबाव वाला खेल
वहीं इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रोल भी काफी अहम नजर आ रहा है। यहां पहले यह तय हुआ था कि ट्रंप के शांति दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर पाकिस्तान जाकर ईरान के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। लेकिन आखिरी समय पर ट्रंप ने इस दौरे को रद्द कर दिया।
एक समाचार चैनल से बातचीत में ट्रंप ने साफ कहा कि बिना किसी नतीजे के बैठकर बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है और ईरान का प्रस्ताव अमेरिका को मंजूर नहीं है। लेकिन वहीं इसके बाद जो हुआ, वह और भी दिलचस्प था।
यहां ट्रंप ने दावा किया कि उनके दौरा रद्द करने के महज 10 मिनट के अंदर ही ईरान की तरफ से एक नया और बेहतर प्रस्ताव आ गया। यह बयान साफ तौर पर ईरान पर मानसिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे यह संदेश जाए कि पूरी बातचीत का कंट्रोल अमेरिका के हाथ में है।
वहीं अराघची ने भी अपने पाकिस्तान दौरे को सकारात्मक बताया, लेकिन यह तंज कसना नहीं भूले कि अभी यह देखना बाकी है कि अमेरिका कूटनीति को लेकर कितना गंभीर है।
दोनों देशों में क्यों मची है शांति की इतनी जल्दी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे तनाव के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया का अहम तेल और गैस मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जो इस समय बंद पड़ा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कर दिया है कि वे इस नाकेबंदी को हटाने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने खुलकर कहा है कि होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना और अमेरिका व उसके सहयोगियों पर दबाव बनाना उनकी रणनीति का हिस्सा है।
इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। ईरान की सेना इसे समुद्री डकैती बता रही है और इसके गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दे रही है।
असल में यह स्थिति ऐसी बन गई है जहां दोनों देश एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था पर चोट कर रहे हैं और हालात एक प्रेशर कुकर की तरह बन चुके हैं, जो कभी भी फट सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए दोनों पक्ष जल्द से जल्द किसी समझौते पर पहुंचना चाहते हैं।
तुर्की बनना चाहता है गारंटर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब इतनी बड़ी डील की बात हो रही हो तो क्षेत्रीय ताकतें भी पीछे नहीं रहना चाहतीं। तुर्की भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय हो गया है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान लगातार एक्टिव हैं और दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए हैं।
उन्होंने एक तरफ अमेरिकी वार्ताकारों से बातचीत की है, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी फोन पर लंबी चर्चा की है। तुर्की पर्दे के पीछे से इस डील में एक गारंटर की भूमिका निभाना चाहता है, ताकि भविष्य में मध्य पूर्व की राजनीति में उसकी अहमियत बनी रहे।
क्या इजरायल बिगाड़ देगा पूरा खेल?
वहीं जहां एक तरफ बड़े नेता बातचीत की टेबल पर समाधान ढूंढ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। खबर आ रही है कि, लेबनान में सीजफायर बढ़ाए जाने के बावजूद इजरायल ने हिजबुल्लाह पर हवाई हमले कर दिए हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का आरोप है कि हिजबुल्लाह ने सीजफायर का उल्लंघन किया है। लेबनान के नबातियेह और बिंट जेबेल इलाकों में हुए इन हमलों में छह लोगों की मौत हो गई है।
इजरायल का कहना है कि उसने हथियारों से लदी गाड़ी और हिजबुल्लाह के लड़ाकों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई के बाद हिजबुल्लाह के नेता मोहम्मद राद भड़क गए हैं और उन्होंने लेबनान सरकार से शांति वार्ता से बाहर आने की मांग कर दी है।
डील की दौड़ और बढ़ता दबाव
तो अब अगर इन सभी घटनाक्रमों को गौर से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि हालत अब ऐसे बन गए है, जहां एक तरफ कूटनीति की तेज रफ्तार दौड़ चल रही है, तो वहीं दूसरी तरफ जमीन पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान, अमेरिका, पाकिस्तान, ओमान, रूस और तुर्की जैसे देशों की सक्रियता यह दिखा रही है कि पर्दे के पीछे बहुत बड़ा खेल चल रहा है।
अब देखना यह होगा कि यह भागदौड़ किसी ठोस समझौते में बदलती है या फिर यह तनाव और ज्यादा भड़कता है। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि इस पूरे खेल में हर देश अपनी चाल चल रहा है और दांव बहुत बड़ा लगा हुआ है।