पाकिस्तान की मध्यस्थ बनने की औकात नहीं...वार्ता को लेकर ईरान में दो फाड़! भड़के सांसद ने उठाए सवाल

US-Iran Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में जहां पाकिस्तान खुद को एक बड़े बिचौलिए के तौर पर पेश कर रहा था, वहीं अब इसी कोशिश पर ईरान के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। हालात ऐसे बनें हैं कि ईरान की संसद से आई एक आवाज ने इस पूरी कूटनीति की दिशा ही बदल दी है। जानें क्या है पूरा मामला।

Update:2026-04-26 22:43 IST

US-Iran Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में जहां पाकिस्तान खुद को एक बड़े बिचौलिए के तौर पर पेश कर रहा था, वहीं अब इसी कोशिश पर ईरान के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। यहां हालात ऐसे थे कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार सूटकेस उठाए इस्लामाबाद के चक्कर काट रहे थे। लेकिन अब ईरान की संसद से आई एक आवाज ने इस पूरी कूटनीति की दिशा ही बदल दी है। ईरानी सांसद इब्राहिम रेजई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘भरोसे लायक नहीं पाकिस्तान’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इब्राहिम रेजई ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का अच्छा दोस्त और पड़ोसी देश हो, लेकिन इस तरह की बड़ी और संवेदनशील बातचीत के लिए वह एक उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऐसी नाजुक कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए जिस तरह की विश्वसनीयता और स्वतंत्र रुख की जरूरत होती है, वह पाकिस्तान के पास नहीं है।

अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेजई ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि उसकी सरकार और उसके वार्ताकार हमेशा अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान कभी भी अमेरिकियों की इच्छा के खिलाफ जाकर कोई ठोस स्टैंड नहीं ले पाता। ऐसे में वह एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका कैसे निभा सकता है, जबकि एक बिचौलिए के लिए सबसे जरूरी चीज निष्पक्षता होती है।

पाकिस्तान की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

वहीं इब्राहिम रेजई ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दो बड़े उदाहरण भी दिए हैं। उन्होंने दावा किया है कि, अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के एक शांति प्रस्ताव को मान लिया था, लेकिन बाद में डोनाल्ड ट्रंप अपने वादे से पीछे हट गए।

रेजई के मुताबिक सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब अमेरिका ने खुद पाकिस्तान के प्रस्ताव को नजरअंदाज किया, तब भी पाकिस्तान ने दुनिया के सामने यह सच नहीं रखा कि उसे धोखा दिया गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जो देश अपने लिए आवाज नहीं उठा सकता, वह ईरान के लिए क्या खड़ा होगा।

अमेरिका के वादों की पोल खोलने का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेजई ने यह भी कहा है कि, बातचीत के दौरान अमेरिका ने लेबनान के मौजूदा संकट और विदेशों में फंसी ईरान की अरबों की संपत्तियों को लेकर कई वादे किए थे।

लेकिन उनका आरोप है कि अमेरिका ने इन वादों में से एक भी पूरा नहीं किया। पाकिस्तान इन सब बातों से अच्छी तरह वाकिफ है, फिर भी वह खुलकर कुछ नहीं कह रहा और लगातार अमेरिका की लाइन पर चलता नजर आ रहा है।

पाकिस्तान की भूमिका पर संकट

वहीं इन बयानों के बाद से ये साफ हो गया है कि ईरान के भीतर ही पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर भरोसा नहीं है। इससे न केवल पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि शांति वार्ता के पूरे समीकरण पर भी असर पड़ सकता है।

जिसके बाद अब देखना यह होगा कि, इस विवाद के बाद पाकिस्तान खुद को कैसे पेश करता है और क्या वह वाकई इस वार्ता में अपनी जगह बना पाता है या फिर ईरान किसी दूसरे विकल्प की तलाश करेगा।

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