बम-बम के नारों से गूंज रहे शिवालय, देखने को मिली हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

एसएसपी आनंद कुलकर्णी के मुताबिक सिक्योरिटी को लेकर खास इंतजाम किया गया है। समस्त सर्किल आफिसर व थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया है। किसी भी तरह की कोई बात होती है तो श्रद्धालु अपनी शिकायत थाना में दर्ज करा सकते है।

वाराणसी: महाशिवरात्रि  के पर्व पर शिवभक्त कंधे पर कांवर रख कर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके महादेवा मंदिर पहुंचे हुए है। कांवड़ियों का तांता लगा हुआ है। उन्नाव, कानपुर, रायबरेली समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों से शिवभक्त शिव मंदिर महादेवा पहुंचे हुए हैं और जिले में सभी जगह बम भोले, शिव शंकर के जयकारे गूंज रहे हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है।

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बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर में बम भोले के उद्घोष से गूंज रहीं चारों दिशाएं

शिवरात्री पर आज लोधेश्वर महादेवा में चारों दिशाएं बम भोले के उद्घोष से गूंज रहीं हैं। शिवभक्त कंधे पर कांवर रख कर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके महादेवा मंदिर पहुंचे हुए है। कांवड़ियों का तांता लगा हुआ है। उन्नाव, कानपुर, रायबरेली समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों से शिवभक्त बाराबंकी के महाभारत कालीन प्राचीन शिव मंदिर महादेवा पहुंचे हुए हैं और जिले में सभी जगह बम भोले, शिव शंकर के जयकारे गूंज रहे हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है।

ये है मान्यता

बाराबंकी का ये महादेवा मंदिर हजारों वर्ष पुराना महाभारत कालीन समय का है। ये मंदिर लोधेश्वर महादेव के नाम से भी प्रसिद्द है। घाघरा नदी के किनारे स्थित इस महादेवा शिवमंदिर की शिवलिंग एक खेत से निकली थी और ये खेत किसान लोधेराम का था। पौराणिक कहानी के अनुसार मान्यता है की इस शिव मंदिर में जो भी शिवभक्त जलाभिषेक करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। इसी महत्ता को देखते हुए आज शिवरात्रि पर शिवभक्त अपने आराध्य महादेव को गंगाजल, दूध, घी, बेलपत्र, धतूरा, फूल व फल चढ़ाकर आशुतोष अवढरदानी से अभीष्ट की कामना कर रहे हैं।

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भांग की बूटी, गुलाल की मस्ती के बीच हाथों में गंगाजल लिए भक्त, जुबान पर हर-हर बम-बम का तराना महादेवा में गूंज रहा है। भोले बाबा की मस्ती में डूबे शिवभक्तों का रेला महादेवा पहुंच रहा है। बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारे लगाते कांवरियों व शिवभक्तों का समूह भोले बाबा की नगरी महादेवा में झूम रहा है। महादेवा पहुंचे शिवभक्तों के गीतों, नृत्य व जयकारों की गूंज ने समूचे रामनगर क्षेत्र को शिवमय कर दिया।

लखनऊ व्यापार मंडल से जुड़े मनोज अवस्थी की मानें तो वह सालों से महादेवा आकर यहां दूर-दूर से आने वाले भक्तों को भंडारा करा रहे हैं। उनका कहना है कि यहां आकर भोलेनाथ के दर्शन करके सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। वहीं दूसरे कई भक्तों ने बताया कि उनकी रोजी-रोटी और पारिवारिक विवादों से संबंधित कई समस्याएं दूर हो गई। लोधेश्वर महादेव की चौखट से कोई खाली हाथ नहीं जाता है। जब से वह यहां आने लगे हैं जिंदगी की तमाम समस्याएं दूर हो गई हैं।

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प्राचीन काल महाभारत के समय का है शिवलिंग

महादेवा मंदिर के पुजारी रामदास की मानें तो ये शिवलिंग प्राचीन काल महाभारत के समय का है। पाचों पांडवों ने इस शिवलिंग को स्थापित कर पूजा अर्चना की थी और ये शिवलिंग कालांतर में लुप्त हो गयी थी। बाद में ये शिवलिंग किसान लोधेराम के खेत से मिला थी। तभी से लेकर आज तक यहां आस्था सिर चढ़ कर बोलती है। जबकि कई विद्वानों का मानना है की भारत में कुछ विशेष स्थानों पर शिवलिंग का खुद से प्रकट हुआ। उनमे से एक महादेवा भी है। यही वजह है की लोधेश्वर महादेव की आराधना कभी खाली नहीं जाती और यहां भक्तों की सारी मनोकामना पूरी होती हैं।

हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल

वहीं यूपी के शाहजहांपुर में  महाशिवरात्रि पर्व के मौके पर यहां हिंदू मुस्लिम की अटूट देखने को मिली। जहां शिव बारात के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगो ने फल बांटे। एकता की मिसाल कायम करने वाले लोगो ने उन लोगो को करारा जवाब दिया है। जो लोग धर्म के नाम पर हिंदू मुस्लिम को बांटने का काम करते है।

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महाशिवरात्रि पर्व के मौके पर आज बंडा ब्लाक क्षेत्र मे विशाल शिव बारात निकाली जाती है। जहां बड़ी तातद मे इस बारात मे शामिल होते है। लेकिन इस बार इस बारात मे हिंदू समुदाए के अलावा मुस्लिमों ने भी बङ चङकर हिस्सा लिया। जब बारात निकाली गई तो मुस्लिम समाज के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने फल का इंतजाम किया। मुस्लिम समुदाए के लोग शिव बारात मे शामिल हुए और हिंदू समुदाए के लोगो को फल बांटे। देखकर शिव बारात निकालने वाले लोग भी बेहद खुश हुए। इसके साथ ही शिव बारात का दूसरे समुदाए लोग जोरशोर से स्वागत किया।

स्वागत करने वाले इशहाक अहमद का कहना है कि त्योहार किसी भी समुदाए का हो उसको सभी धर्मों के लोगो को मनाना चहिए। इससे दोनो धर्मो के लोगो मे प्यार और धर्म के प्रति सम्मान बङता है। इसलिए आज शिव बारात मे फल बांटे है। हमने उनका स्वागत किया उन्होंने हमारी पहल का स्वागत किया है। उनकी अपील है कि ऐसे लोगो के बहकावे मे न आए जो धर्मो के नाम पर हिंदू मुस्लिम को बांटने का काम करते है। ये पहल ऐसे लोगो के मुंह पर तमाचा है।

मेरठ के बाबा औघड़नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में महाशिवरात्रि पर्व पर शिवालयों में जलाभिषेक और कांवड़ चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सोमवार सुबह से ही देवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गईं। पूरा जनपद बम भोले के उद्घोष से गूंजायमान है। सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में कांवड़ियो ने चढ़ाना प्रारंभ कर दिया।

श्रद्धालुओं की सबसे लंबी लाइन मेरठ शहर के एतिहासिक काली पलटन स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर में में देखी गई जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया। यहां पर सुबह से ही हाथ में गंगाजल और पूजा की थाली लिए शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया। लंबी लाइनों में लगे श्रद्धालु बोल बम,बम-बम के जयकारे लगा रहे थे। सुबह 4:00 बजे से ही आरती के बाद त्रयोदशी जलाभिषेक शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र,शहद,दूध-दही धतूरा,कमल के साथ पूजा-अर्चना की। जलाभिषेक करने के बाद युवतियों ने मंदिर परिसर में सेल्फी ली। बाबा औघड़नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि शाम 4:15 बजे चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। कांवड़ियों के लिए जलाभिषेक का यही समय है।

बाबा औघड़नाथ मंदिर से सेना की 17वीं यूनिट में तैनात सैन्य अधिकारियों के परिवारों ने कलश यात्रा निकाली। मंदिर परिसर के बाहर खेल खिलौने और चाट पकौड़ों ठेले लगे थे। मंदिर के बाहर मेले सरीखा माहौल रहा। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के हवाले रही।

इसी के साथ ही सदर स्थित पौराणिक महत्व के बिल्वेश्वर महादेव मंदिर, मोहन पुरी स्थित दयालेश्वर महादेव मंदिर, बुढ़ाना गेट स्थित श्री धर्म धर्मेश्वर महादेव मंदिर सहित नगर के अन्य विभिन्न मंदरों में भी भक्तों ने महादेव पर जल चढ़ाकर भगवान का आशीर्वाद लिया। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर्व के चलते कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। इनमें तरह-तरह की झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। साथ ही शोभा यात्रा में महाआरती का भी आयोजन हुआ।