किसी कारण नहीं कर पा रहे छठ तो ना हो निराश, ऐसे आपका भी भाग जाएगा सूर्यदेव के पास

छठ पर्व सूर्य की उपासना का प्रकृति पर्व है। छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व का व्रत बहुत कठिन होता है। मान्यता है कि छठ के 4 दिनों में सूर्यदेव और उनकी बहन छठी देवी की पूजा से व्रतियों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

Published by suman Published: October 30, 2019 | 7:25 am
Modified: October 30, 2019 | 7:59 am
chhath mahaparv festival photos

जयपुर: छठ पर्व सूर्य की उपासना का प्रकृति पर्व है। छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व का व्रत बहुत कठिन होता है। मान्यता है कि छठ के 4 दिनों में सूर्यदेव और उनकी बहन छठी देवी की पूजा से व्रतियों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

छठी मईया की उपासना से धन, दौलत, संतान के साथ-साथ अच्छी सेहत की कामना पूरी होती है। त्वचा से संबंधित रोग छठी मईया की कृपा से ठीक हो जाता है। साक्षात देवता की पूजा का यह ऐसा पर्व है जिसे छोटा से छोटा और बड़ा से बड़ा व्यक्ति करना चाहता है। जो छठ व्रत नहीं करते हैं उन्हें क्या करना चाहिए।

जो छठ व्रत नहीं करते हैं उन्हें चार दिनों तक सूर्य की पूजा करनी चाहिए। सूर्य देव को ठीक सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल देना चाहिए। साथ ही धूप, दीप दिखाना चाहिए। सूर्य देव को जल से भरा नारियल, फल और मिठाई इत्यादि चढाएं।

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छठ पर्व के दौरान सात्विक और साफ-सुथरा रहें। अपने आसपास किसी छठ व्रती की सहायता करें। साथ ही संभव हो तो व्रती को छठ घाट तक पहुचाएं। गुड़ और आटें का बना ठेकुवा और पुरी जरूर बनाएं। सूर्य देव की पूजा के बाद इसे बांटें।

छठ का दोनों ही अर्घ्य (शाम और सुबह) अवश्य देना चाहिए। सूर्य देव से अपने जीवन को प्रकाशमय करने की कामना करें। छठ व्रत करने वाले महिला या पुरुष के पैर छूकर आशीर्वाद लें।

जो हर साल करते हैं व्रत और इस साल किसी कारणवश नहीं कर कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसी दूसरे छठव्रती से अपना बना अपना पकवान भोग लगवाएं। इसके अलावे अपने पड़ोस के किसी व्रती को अपना प्रसाद दे सकते हैं जो आपके बदले छठी मईया को प्रसाद चढ़ा देंगे।

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