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बिहार चुनाव: एनडीए- महागठबंधन के बड़े-बड़े दावे, आखिर मतदान में बढ़त किसको...

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण वाली 71 सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद दोनों मुख्य गठबंधनों की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। पहले चरण में मतदाताओं के उत्साह को देखते हुए महागठबंधन की ओर से दावा किया गया है कि उसे 71 में से 55 सीटों पर विजय मिलती दिख रही है।

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MonikaBy Monika

Published on 29 Oct 2020 3:40 AM GMT

बिहार चुनाव: एनडीए- महागठबंधन के बड़े-बड़े दावे, आखिर मतदान में बढ़त किसको...
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बिहार चुनाव: एनडीए व महागठबंधन के बड़े-बड़े दावे, दोनों ने किया बढ़त मिलने का दावा
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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण वाली 71 सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद दोनों मुख्य गठबंधनों की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। पहले चरण में मतदाताओं के उत्साह को देखते हुए महागठबंधन की ओर से दावा किया गया है कि उसे 71 में से 55 सीटों पर विजय मिलती दिख रही है। महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि मतदाताओं का रुख पूरी तरह महागठबंधन के पक्ष में दिखा। इसलिए पहले चरण में ही उसे एनडीए पर बढ़त हासिल हो गई है। दूसरी ओर एनडीए के नेताओं का कहना है कि पहले चरण में बिहार की जनता के मिजाज का पता चल गया है और एक बार फिर राज्य में बड़े बहुमत के साथ नीतीश की अगुवाई में एनडीए सरकार बनने जा रही है।

कोरोना संकट काल में भी दिखा उत्साह

कोरोना संकट काल में हो रहे बिहार विधानसभा के चुनाव में मतदाताओं ने सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए पहले चरण में उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के मुताबिक 54.26 फ़ीसदी मतदान हुआ। 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान पहले चरण में 54.94 फ़ीसदी मतदान हुआ था। कोरोना संकट के कारण पहले आशंका जताई जा रही थी कि इस बार मतदान का प्रतिशत काफी कम हो सकता है मगर मतदाता सुबह से ही पोलिंग बूथों पर पहुंचने लगे थे और उन्होंने देर शाम तक पूरे उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा लेते हुए सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया। चुनाव आयोग की ओर से भी बिहार के मतदाताओं को यह उत्साह दिखाने के लिए बधाई दी गई है। पहले चरण में मतदाताओं ने 952 पुरुष और 114 महिला प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कर दिया है।

महागठबंधन का 55 सीटें जीतने का दावा

पहले चरण में 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद एनडीए व महागठबंधन की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। पहले चरण के बाद महागठबंधन की ओर से 71 में से 55 सीटों पर विजय का दावा किया गया है। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा का कहना है कि महागठबंधन के नेताओं को मिले फीडबैक के मुताबिक एनडीए को करारा झटका लगना तय है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में ही महागठबंधन पूरी मजबूती के साथ एनडीए पर भारी साबित हुआ है।

महागठबंधन के पक्ष में दिखी हवा

कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि बिहार में महागठबंधन के पक्ष में हवा चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो चरणों में भी ऐसी ही हवा रहेगी और नीतीश सरकार की बिहार से विदाई होना तय है। तेजस्वी को अनुभवहीन बताए जाने पर पवन खेड़ा ने कहा कि हर व्यक्ति पद पर पहुंचने के बाद ही सीखता है। नरेंद्र मोदी भी गुजरात के मुख्यमंत्री के तजुर्बे के आधार पर ही प्रधानमंत्री बने थे।

नीतीश कुमार की विदाई तय

उन्होंने मतदाताओं से कोरोना के संबंध में जारी की गई गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करने का भी अनुरोध किया। प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद लेफ्ट की नेता कविता ने महागठबंधन के पक्ष में हवा होने का दावा किया। महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि पहले चरण से साफ हो गया है कि बिहार में नीतीश का कार्यकाल अब पूरा हो चुका है। गठबंधन के नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की इस फार्मूले पर चलें कि जब तक विदाई नहीं,ओ तब तक किसी प्रकार की ढिलाई नहीं।

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जदयू का दावा: नीतीश की वापसी तय

पहले चरण के मतदान के बाद एनडीए की ओर से भी बड़ा दावा किया गया है। बिहार जदयू के अध्यक्ष व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने दावा किया कि पहले चरण में ही बिहार के 16 जिलों की जनता ने एनडीए सरकार की वापसी का फैसला दे दिया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में ही जनता के मिजाज का पता चल गया है और राज्य में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार की वापसी तय है। जदयू नेता ने दावा किया कि एनडीए के 15 साल बनाम 15 साल के नारे को जनता ने बेहद गंभीरता से लिया है। लोग राज्य को एक बार फिर कुशासन की आग में नहीं झोंकना चाहते हैं और इसी कारण राज्य के लोगों ने एनडीए पर ही अपना भरोसा जताया है।

एनडीए व महागठबंधन में कांटे का मुकाबला

राज्य में तीन चरणों में होने वाले चुनाव का पहला चरण समाप्त हो चुका है जबकि दो और चरण 3 और 7 नवंबर को होने हैं। राज्य में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है और दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए जोरदार अभियान छेड़ रखा है।

कांटे का मुकाबला होने के कारण चुनाव मैदान में उतरे कई छोटे मोर्चे विभिन्न विधानसभा सीटों पर बड़े सियासी दलों का खेल बिगाड़ते दिख रहे हैं। ऐसी विधानसभा सीटें जहां प्रत्याशियों के बीच कम मार्जिन से फैसला होता दिख रहा है, वहां कई प्रत्याशी बड़े सियासी दलों का खेल बिगाड़ने में कामयाब होते दिख रहे हैं।

अंशुमान तिवारी

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