बिहार में आ गए चुनावः सियासत में उछलने लगे घोटाले, असर नतीजे बताएंगे

विधानसभा चुनाव सिर पर हैं तो बिहार की सियासत में घोटाले एक बार फिर उछाले जाने लगे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और दिनोंदिन यह तेज ही होता जाएगा। बिहार की भाजपा नीत गठबंधन वाली एनडीए सरकार के घटक दलों के नेता राज्य की प्रमुख व मुखर विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निशाना साधते रहते हैं।

Published by suman Published: August 14, 2020 | 8:28 pm
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बिहार में चुनावी राजनीति

पटना: अब जब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं तो बिहार की सियासत में घोटाले एक बार फिर उछाले जाने लगे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और दिनोंदिन यह तेज ही होता जाएगा। बिहार की भाजपा नीत गठबंधन वाली एनडीए सरकार के घटक दलों के नेता राज्य की प्रमुख व मुखर विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निशाना साधते रहते हैं।

इनके टारगेट पर राजद के युवा नेता, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव व उनका परिवार होता है। हर वार में उन्हें उनके पिता लालू प्रसाद व माता राबड़ी देवी के शासन काल के दौरान हुए घोटाले व अन्य अनियमितताओं की याद दिलाई जाती है।

 

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फिर सत्ता में आना चाहते हैं नीतीश

तेजस्वी ने बाढ़ के दौरान सरकार की नाकामी की चर्चा भर क्या की, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी अपने अगले ट्वीट में उनको सीधा जवाब देते हैं। वे कहते हैं, जिनके माता-पिता के राज में करोड़ों का बाढ़ राहत घोटाला हुआ, वे कुछ बाढ़ पीड़ितों को एक शाम का भोजन कराते हुए फोटो खिंचवा कर पाप धोने की कोशिश कर रहे हैं।” उनका आरोप है कि 1996-99 के बीच उस वक्त की लालू-राबड़ी सरकार ने चारा घोटाला की तर्ज पर बाढ़ राहत घोटाला किया था।

साफ है प्रहार का केंद्र घोटाला ही रहता है। हालांकि तेजस्वी यादव ने भी नीतीश शासन के पंद्रह साल के दरम्यान 55 घोटाले किए जाने का आरोप लगा दिया। वे कहते हैं, अगर नीतीश जी में हिम्मत है तो वे कहें कि लाखों करोड़ के ये 55 घोटाले उनके संरक्षण में नहीं हुए। तेजस्वी ने इन पचपन घोटालों में सृजन घोटाला, छात्रवृत्ति घोटाला, धान घोटाला व दवा घोटाले का जिक्र किया है। सच है कि ये घोटाले अपने-अपने समय पर सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बने रहे थे।

 

घोटालों का राज्य है बिहार

चारा घोटाला, बाढ़ राहत घोटाला, अलकतरा घोटाला, मेधा घोटाला, गर्भाशय घोटाला, सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला, सोलर प्लेट घोटाला, धान घोटाला, मिट्टी घोटाला, जमीन घोटाला जैसे घोटालों की लंबी लिस्ट समय-समय पर प्रदेशवासियों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनती रही है। राजनीतिक पार्टियां इसके लिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करती रहती है। खासकर चुनावों के समय में इन घोटालों की अहमियत बढ़ जाती है।

महादलित विकास मिशन घोटाले में बिहार विजिलेंस द्वारा आईएएस अधिकारी एसएम राजू एवं तीन रिटायर्ड आईएएस अफसरों समेत छह लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराए जाने की घटना ने इन घोटालों की याद ताजा कर दी है। प्रकारांतर में होने वाले इन घोटालों ने प्रदेश के आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाला है।

 

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महादलित विकास मिशन

ताजा घटनाक्रम नौ साल पहले महादलित विकास मिशन में हुए 17 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है। नीतीश सरकार द्वारा महादलित युवाओं के उत्थान के उद्देश्य से 2011 में गठित महादलित विकास मिशन के जरिए उन्हें स्पोकेन इंग्लिश कोर्स समेत कम्प्यूटर आधारित एमएस ऑफिस, टैली आदि समेत 22 तरह के कोर्स कराने का निर्णय लिया गया ताकि वे अपनी रोजी-रोटी चला सकें।

इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने भी धनराशि दी। मिशन द्वारा 15000 छात्रों को प्रशिक्षित करने के दावे के विपरीत कई छात्रों द्वारा विजिलेंस से शिकायत की गई कि जिन छात्रों का नाम प्रशिक्षितों की सूची में शामिल है उन्हें वास्तव में प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया। जांच के दौरान छात्रों की शिकायत सही पाई। आरोप सही पाए जाने के बाद अंतत: आईएएस अधिकारी एसएम राजू , तीन पूर्व आईएएस अफसर व ब्रिटिश लिंगुआ संस्थान के निदेशक के समेत छह लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने एफआइआर दर्ज कराई। मिशन में यह घोटाला वर्ष 2016 तक चला और 17 करोड़ की कुल राशि का गबन किया गया।

 

 मशहूर चारा घोटाला

लालू-राबड़ी के शासन काल में यूं तो कई घोटाले हुए किंतु उनमें सबसे ज्यादा चर्चा चारा घोटाले की रही जिसकी वजह से लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी और जेल जाना पड़ा। इस घोटाले के पूरे मामले में लालू प्रसाद के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, विद्यासागर निषाद, जगदीश शर्मा, ध्रुव भगत और भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारी बेक जूलियस, महेश प्रसाद और फूलचंद सिंह समेत कुल 38 आरोपी थे जिनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 960 करोड़ के इस घोटाले में 53 मामले दर्ज किए गए थे।

वहीं नीतीश कुमार के शासन काल में हुए जिस घोटाले की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दी, वह सृजन घोटाला रहा। यह घोटाला भागलपुर के सबौर के सृजन नामक संस्था से जुड़ा है। इस घोटाले की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी नामक महिला थी जिनका निधन हो गया। उनके बेटे अमित व बहू प्रिया इस घोटाले के सूत्रधार बने। जांच के दौरान यह पाया गया था कि सरकारी राशि को सरकारी बैंक में जमा करने के बाद सृजन के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था।

 

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इस साजिश में सरकारी अधिकारी व बैंक के कर्मचारी भी शामिल थे। बाद में इन पैसों को या तो ऊंचे सूद पर बाजार में या फिर अन्य को व्यापार, निवेश या अन्य धंधों के लिए दिया जाता था। जब सरकार के चेक बाउंस होने लगे तब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ और फिर एक-एक करके परत-दर-परत उघड़ती चली गई। यह घोटाला चारा घोटाले से लगभग दोगुनी रकम का बताया जाता है।

 

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जांच दर जांच

 

जाहिर है, इन घोटालों की जांच चलती रहती है और समय-समय पर घोटाले सामने आते रहते हैं। हाल में ही धान घोटाला या राइस मिल घोटाला में ईडी ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देवेश नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले को बिहार के दूसरे चारा घोटाले के रूप में देखा जा रहा है और यह मामला इतना बड़ा हो गया है कि इस संबंध में हजार से ज्यादा एफआइआर दर्ज किए जा चुके हैं।

जिस तरह चारा घोटाले में स्कूटर पर सैकड़ों टन चारा ढोया गया, उसी तरह फर्जी राइस मिल व नकली ट्रांसपोर्टर बनकर करीब छह सौ करोड़ से ज्यादा के इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

 

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राजनीति और घोटाले

राजनीति व घोटाले का चोली-दामन का साथ रहा है। यही वजह है कि सत्ता से हटने के बाद कई दिग्गजों को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ती है जिसे वे अपनी सरकार के दिनों में लोकोपयोगी बताते रहे।

यह सच है कि समय के साथ घोटाले भी स्वाभाविक प्रक्रिया के तहत चलते रहेंगे तथा चुनावी आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनते रहेंगे। हां, आम जनता किस पर कितना भरोसा करेगी यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा।

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