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बैकफुट पर नीतीशः बिगड़ गया सारा खेल, शिक्षा मंत्री को हटाने की अटकलें तेज

सियासी जानकारों का कहना है कि मेवालाल चौधरी को लेकर हो रहे लगातार हमलों के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उन्हें हटाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इसी सिलसिले में उन्हें तलब किया था।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 19 Nov 2020 4:12 AM GMT

बैकफुट पर नीतीशः बिगड़ गया सारा खेल, शिक्षा मंत्री को हटाने की अटकलें तेज
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Nitish on backfoot, speculation to remove education minister intensifies
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पटना। बिहार के नए शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैकफुट पर जाते दिखाई पड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपी मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाए जाने के बाद ही विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है और उन्हें मंत्री पद से हटाने के लिए नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ा दिया है।

एनडीए की सरकार बनते ही मेवालाल चौधरी को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद उन्हें हटाने की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चौधरी से मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।

चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाने पर विवाद

दरअसल मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपने के बाद ही विवाद पैदा हो गया है और विपक्ष की ओर से लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमले किए जा रहे हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाने पर नीतीश कुमार को घेरा है। राजद के अन्य नेता भी इस मुद्दे को लेकर नीतीश सरकार पर लगातार हमलावर हैं।

मुलाकात के बाद हटाने की अटकलें

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को चौधरी को तलब किया। मुख्यमंत्री आवास पर दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। हालांकि अभी इस बात का खुलासा नहीं हो सका है कि दोनों नेताओं की बातचीत में क्या फैसला हुआ मगर ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मेवालाल चौधरी को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की मुलाकात के बाद ही शिक्षा मंत्री को हटाने की अटकलें तेज हो गई हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री कोई बड़ा फैसला लेकर अपनी कैबिनेट के साफ-सुथरी होने का संकेत दे सकते हैं।

चौधरी पर घपलेबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप

नीतीश कैबिनेट में विभागों के बंटवारे के साथ ही मेवालाल चौधरी को लेकर विवाद पैदा हो गया है। मेवालाल चौधरी पर 2017 में भागलपुर के कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान नौकरियों में भारी घपलेबाजी करने का आरोप है। उन पर 161 असिस्टेंट प्रोफेसरों की गलत तरीके से नियुक्ति करने का आरोप है और इस मामले में उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।

मामले का खुलासा होने के बाद तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने इस मामले में जांच के आदेश भी दिए थे। जांच में चौधरी के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए थे। इसके साथ ही चौधरी पर विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में भी भ्रष्टाचार का आरोप है।

लालू ने साधा नीतीश पर निशाना

चौधरी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपने के बाद ही राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला था। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है।

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उनका कहना है कि जहां तेजस्वी ने पहली कैबिनेट में 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, वहीं नीतीश ने घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपी मेवालाल को मंत्री बनाकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि मेवालाल चौधरी को मेवा मिल गया है।

नीतीश पर चौधरी को हटाने का दबाव

सियासी जानकारों का कहना है कि मेवालाल चौधरी को लेकर हो रहे लगातार हमलों के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उन्हें हटाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इसी सिलसिले में उन्हें तलब किया था।

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दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद शिक्षा मंत्री को हटाने की अटकलें और तेज हो गई हैं। सोमवार को नीतीश कुमार की अगुवाई में 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी और फिर मंगलवार को विभागों का बंटवारा किया गया था। इस बंटवारे में मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई थी और इसी के बाद नीतीश विपक्ष के निशाने पर आ गए थे।

अंशुमान तिवारी की रिपोर्ट

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