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बिहार में चुनाव टालने की मांग, तेजस्वी बोले-जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति शासन लगाएं

तेजस्वी यादव का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। सच्चाई यह है कि मौजूदा समय चुनाव के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 12 July 2020 4:25 PM GMT

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अंशुमान तिवारी

पटना: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राजद के नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि बिहार में चुनाव के लिए यह सही समय नहीं है। बिहार में इस साल अक्टूबर नवंबर के महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं। देश में कोरोना के संक्रमण के बीच चुनाव टलने की मांग भी तेजी से उठ रही है। तेजस्वी यादव का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। सच्चाई यह है कि मौजूदा समय चुनाव के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।

कोरोना संकट के बीच चुनाव कराना ठीक नहीं

एक अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्कार में तेजस्वी ने कहा कि देश और प्रदेश में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है। ऐसी स्थिति में बिहार में विधानसभा चुनाव कराना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर लाशों पर चलकर चुनाव कराने की बात होती है तो मैं ऐसा करने वाला आखिरी इंसान होऊंगा। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार कोरोना को संकट मानते हैं तो हालात सुधरने तक राज्य में चुनाव को टाला जा सकता है। लेकिन अगर उन्हें लगता है कि कोरोना से समस्या नहीं पैदा होने वाली है तो हमारी यह मांग है कि चुनाव उसी पारंपरिक तरीके से होना चाहिए जैसा अभी तक होता रहा है।

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राजद नेता ने कहा कि हमारी मांग है कि चुनाव कराने की स्थिति में डोर टू डोर संपर्क करने और चुनावी रैलियों के आयोजन की अनुमति भी दी जानी चाहिए। तेजस्वी ने भाजपा और राजद को पूजीपतियों की पार्टी बताते हुए कहा कि इन दोनों दलों के पास प्रचुर संसाधन है। ऐसे में पारंपरिक तरीके से चुनाव प्रचार पर रोक लगाना लोकतांत्रिक नजरिए से अनैतिक होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने की स्थिति में संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

राज्य में टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

उन्होंने कहा कि मैं कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग की मांग करता रहा हूं। इसके साथ ही मैं लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए सरकारी तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर देता रहा हूं मगर सरकार को मेरी बात सुनाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट काल में प्रवासी कामगारों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं और इन लोगों का संकट दूर करने में नीतीश सरकार पूरी तरह फेल रही है। अब राज्य में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और लोगों मैं असुरक्षा की भावना पैदा होती जा रही है। सही बात तो यह है कि कोरोना से निपटने के लिए सरकार के पास कोई नीति है ही नहीं।

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राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है और ऐसे में कोरोना से ज्यादा मौतें होने की आशंका है। राजद की चुनावी तैयारियों के बारे में तेजस्वी ने कहा कि हम गांव-गांव और गली-गली जाकर लोगों से संपर्क साधने पर जोर देंगे। हम शिक्षा, कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और औद्योगिक क्षेत्र में बिहार की तस्वीर बदलना चाहते हैं और इसके लिए मजबूत ब्लू प्रिंट के साथ मतदाताओं से संपर्क करेंगे। राजद नेता ने माना कि वर्चुअल तरीके से चुनाव प्रचार करना उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। उन्होंने कहा कि राजद के पास संसाधनों की कमी है और वर्चुअल तरीके से हम अपने प्रतिद्वंद्वियों को जवाब देने में सक्षम नहीं है।

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