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बिहार में 10 लाख नौकरी के लिए चाहिए इतने हजार करोड़ रुपए, सुशील मोदी ने बताया

सुशील मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की डपोरशंखी घोषणाओं के तहत अगर वास्तव में दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी तो राज्य के खजाने पर 58,415.06 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 21 Oct 2020 4:59 PM GMT

बिहार में 10 लाख नौकरी के लिए चाहिए इतने हजार करोड़ रुपए, सुशील मोदी ने बताया
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सुशील मोदी ने कहा कि अगर वास्तव में दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी तो राज्य के खजाने पर 58,415.06 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
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पटना: बिहार में इस महीने से विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने पूरा जोर लगा दिया है। राजनीतिक दलों द्वारा जनता से कई बड़े वादे किए जा रहे हैं। राजनेता अपने विरोधी दलों पर निशाना साध रहे हैं। अब उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तेजस्वी के नौकरी देने वाले बयान पर निशाना साधा है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की तरफ से 10 लाख रोजगार देने को डपोरशंखी घोषणा बताया है। सुशील मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की डपोरशंखी घोषणाओं के तहत अगर वास्तव में दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी तो राज्य के खजाने पर 58,415.06 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसके अलावा पूर्व से कार्यरत 12 लाख से ज्यादा कर्मियों के वेतन मद में होने वाले खर्च 52,734 करोड़ को इसमें जोड़ लें तो यह राशि 1,11,189.06 करोड़ हो जाती है।

वेतन में हर साल 58 हजार 415.06 करोड़ का खर्च होगा

सुशील मोदी ने बुधवार को कहा कि विपक्ष के झूठे वादों के मुताबिक, अगर 1.25 लाख चिकित्सक और 2.50 लाख पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाती है तो वेतन पर 22,270.95 करोड़ रुपए खर्च होगा। 2.50 लाख शिक्षकों व 50 हजार कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति पर वेतन मद में 20,352.66 करोड़, 95 हजार पुलिस की बहाली पर 3604.22 करोड़, इंजीनियर (जेई) के 75 हजार पदों की बहाली पर 5,780.43 करोड़ व दो लाख अनुसेवकों की नियुक्ति पर वेतन मद में हर साल 6,406.80 करोड़ यानी कुल 58 हजार 415.06 करोड़ का खर्च होगा।

Sushil Modi-Tejashawi Yadav

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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दरअसल झांसा देकर वोट लेने के मकसद से विपक्ष द्वारा मतदाताओं से ऐसा वायदा किया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसको कभी पूरा ही नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब वेतन पर ही बजट का ज्यादतर हिस्सा खर्च करेगा तो फिर पेंशन, छात्रवृत्ति, साइकिल, पोशाक, मध्याह्न भोजन, कृषि अनुदान, फसल सहायता, पुल-पुलिया, सड़क, बिजली आदि तमाम योजनाओं के लिए पैसे कहां से आएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बजट का आकार 2 लाख 11 हजार 761 करोड़ रुपए का है। अगर वेतन में ही 1 लाख 11 हजार करोड़ खर्च किया जाएगा तो फिर ब्याज, पुराने कर्ज के भुगतान समेत अन्य 1,28,979 करोड़ के प्रतिबद्ध व्यय के लिए राशि कहां से आएगी।

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तेजस्वी ने किया है 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा

गौरतलब है कि आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव लगातार बिहार सरकार को रोजगार के मुद्दे पर हमला बोल रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनती है तो पहली कैबिनेट बैठक में वह 10 लाख सरकारी नौकरी बेरोजगारों को देंगे।

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