बैंक में नया कानून: खाताधारकों के पैसों पर पड़ेगा सीधा असर, जानें कैसे

वित्त मंत्री ने इस विधेयक को पेश किया। यह जून में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा। उसी तरह अब सहकारी बैंकों पर भी आरबीआई की नजर रखेगा।

Published by suman Published: September 15, 2020 | 9:57 am
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आरबीआई के दायरे में कॉपरेटिव बैंक,सोशल मीडिया से फोटो

नई दिल्ली: आरबीआई जिस तरह सरकारी और प्राइवेट बैंक को रेगुलेट करता है। अब सरकार ने सहकारी बैंकों को आरबीआई के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट में संशोधन से संबंधित विधेयक को लोकसभा में पेश किया। इसका मकसद जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है। वित्त मंत्री ने इस विधेयक को पेश किया। यह जून में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा। उसी तरह अब सहकारी बैंकों पर भी आरबीआई की नजर रखेगा।

 

जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा

जानकारों का कहना है कि ये फैसला ग्राहकों के लिए फायदेमंद है क्योंकि अगर अब कोई बैंक डिफॉल्ट करता है तो बैंक में जमा 5 लाख रुपये तक की राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। वित्त मंत्री ने एक फरवरी 2020 को पेश किए बजट में इसे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है तो उसके जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये ही मिलेंगे, चाहे उनके खाते में कितनी भी रकम हो।

बता दें देश में 1482 शहरी सहकारी बैंक और 58 मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव बैंक हैं। कुल मिलाकर सभी 1540 सहकारी बैंक आरबीआई के सीधे रेगुलेशन में आ गए हैं। आरबीआई  की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के अनुसार, बीमा का मतलब है कि जमा राशि कितनी भी हो ग्राहकों को 5 लाख रुपये मिलेंगे।

 

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सोशल मीडिया से फोटो

अब क्या होगा ग्राहकों पर असर

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन( DICGC )एक्ट, 1961 की धारा 16 (1) के तहत, अगर कोई बैंक डूब जाता है या दिवालिया हो जाता है, तो  प्रत्येक जमाकर्ता को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होता है। उसकी जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा होता है। यही नहीं, अगर आपके किसी एक बैंक में एक से अधिक अकाउंट और FD हैं तो भी बैंक के डूब जाने के बाद आपको एक लाख रुपये ही मिलने की गारंटी है। यह रकम किस तरह मिलेगी, यह गाइडलाइंस (DICGC) तय करता है।

 

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पैसा सुरक्षित का संदेश

इस फैसले से जनता में यह संदेश जाएगा कि उनका पैसा सुरक्षित है। रिज़र्व बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि को-ऑपरेटिव बैंकों का पैसा किस क्षेत्र के लिए आवंटित किया जाना चाहिए।इन नियमों से देश की मौद्रिक नीति को सफल बनाने में आसानी होगी। साथ ही, इन बैंकों को भी अपनी कुछ पूंजी आरबीआई के पास रखनी होगी। ऐसे में इनके डूबने की आशंका कम होगी और बैंकों की वित्तीय हालात सुधरेंगे और ग्राहकों का  विश्वास बढ़ेगा।

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