अभी-अभी बड़ी खबर: आम आदमी को मिलेगी रहत, जल्द अर्थव्यवस्ता में होगा सुधार

नए ऑर्डर मिलने से उत्पादन में आए उछाल के चलते दिसंबर में पीएमआई 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जिसके कारण आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग का पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक दिसंबर में बढ़ कर 52.7 रहा। मई महीने के बाद यह सबसे ऊपर है।

Published by SK Gautam Published: January 2, 2020 | 9:06 pm
Modified: January 2, 2020 | 9:22 pm

नई दिल्ली: धीमी पड़ी देश की अर्थव्यवस्ता को देखते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों को फिर से तेज करने के लिए वित्त मंत्रालय ने नए कदम उठाये हैं। बता दें कि नए ऑर्डर मिलने से उत्पादन में आए उछाल के चलते दिसंबर में पीएमआई 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जिसके कारण आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग का पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक दिसंबर में बढ़ कर 52.7 रहा। मई महीने के बाद यह सबसे ऊपर है।

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उत्पादन में विस्तार का सूचक

नवंबर में पीएमआई 51.2 अंक पर दो वर्ष के न्यूनतम स्तर पर था। सूचकांक का 50 से ऊपर होना उत्पादन में विस्तार का सूचक है। विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई लगातार 29वें महीने 50 अंक से ऊपर है।

जीएसटी (GST) कलेक्शन, कोर सेक्टर इंडस्ट्रीज, ऑटो सेल और नॉन-ऑयल मर्केंडाइज एक्सपोर्ट्स के बेहतर आंकड़ों से दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखने को मिला। हालांकि बिजनेस ऑप्टिमिज्म लगभग तीन साल के निचले स्तर पर गिर गया।

आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पोलियाना डी लीमा ने कहा, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में नवीनतम पीएमआई परिणामों से संकेत मिलता है, जो नीति निर्माताओं द्वारा स्वागत किया जाएगा। लीमा ने कहा कि सर्वेक्षण में कारोबारी विश्वास के मोर्चे पर कुछ सतर्कता दिखाई दी है। दिसंबर में रोजगार और खरीद के मोर्चे पर भी नए सिरे से बढोतरी हई है।

2020 के शुरू में निवेश और रोजगार सृजन में कुछ अड़चनें आ सकती हैं

साल 2019 के अंत में कारोबार को लेकर कंपनियों का आत्मविश्वास करीब तीन साल में सबसे निचले स्तर पर रहा। यह बाजार स्थितियों को लेकर उपजी चिंताओं को दर्शाता है। इससे 2020 के शुरू में निवेश और रोजगार सृजन में कुछ अड़चनें आ सकती हैं।’ सर्वेक्षण के मुताबिक, आगामी 12 महीनों में उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है लेकिन कंपनियों का आगे के बाजार को लेकर आत्मविश्वास का स्तर कमजोर होकर 34 महीने के निम्न स्तर पर है। इसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति की दर 13 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

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आईये जानते हैं क्या होता है पीएमआई?

पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (PMI) मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने का एक इंडिकेटर है। इसके जरिए किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। पीएमआई सेवा क्षेत्र समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है। इसमें शामिल तकरीबन सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है।50 से ऊपर PMI माना जाता है बेहतर

पीएमआई आंकड़ों में 50 को आधार माना गया है। साथ ही इसको जादुई आंकड़ा भी माना जाता है। 50 से ऊपर के पीएमआई आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देखा जाता।

जबकि 50 से नीचे के आंकड़े को कारोबारी गतिविधियों में गिरावट के तौर पर देखा जाता है। यानी 50 से ऊपर या नीचे पीएमआई आंकड़ों में जितना अंतर होगा, कारोबारी गतिविधि में क्रमश: उतनी ही वृद्धि और कमी मानी जाएगी।

 

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