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Amitabh Bachchan: बिग बी का कमला पसंद के विज्ञापन से छुट्टी, मजबूरी या ज़रूरी

Amitabh Bachchan Kamala Pasand Ad. : भारत में पान मसाले का व्यवसाय क़रीब 42 हज़ार करोड़ रुपये का है ।इसमें ज़्यादातर हिस्सा उत्तर प्रदेश का है।

Yogesh Mishra

Yogesh MishraWritten By Yogesh MishraVidushi MishraPublished By Vidushi Mishra

Published on 12 Oct 2021 10:16 AM GMT

Amitabh Bachchan
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अमिताभ बच्चन (फोटो- सोशल मीडिया)

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Amitabh Bachchan Kamala Pasand Ad. : बीते दिनों अमिताभ बच्चन ने फेसबुक (Amitabh Bachchan Facebook Post) पर पोस्ट डाला कि "एक घड़ी खरीदकर हाथ में क्या बाँध ली, वक्त पीछे ही पड़ गया मेरे।" इस पर एक यूजर ने लिखा, प्रणाम सर, सिर्फ एक बात ही पूछनी है आपसे। क्या जरूरत है कि आपको भी कमला पसन्द पान मसाले का विज्ञापन (Kamla Pasand Ka Vigyapan) करना पड़ा।

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan Tweet) ने कुछ इस तरह जवाब दिया-" मान्यवर, क्षमा प्रार्थी हूं, किसी भी व्यवसाय में यदि किसी का भला हो रहा है, तो यह नहीं सोचना चाहिए कि हम उसके साथ क्यों जुड़ रहे हैं। हां, यदि व्यवसाय है तो उसमें हमें भी अपने व्यवसाय के बारे में सोचना पड़ता है। अब आपको यह लग रहा है कि मुझे यह नहीं करना चाहिए था। लेकिन इसको करने से, हां मुझे भी धनराशि मिलती है। लेकिन हमारे उद्योग में बहुत से लोग काम कर रहे हैं।"

अमिताभ बच्चन (फोटो- सोशल मीडिया)

एक एड के 8 करोड़ रुपए (Amitabh Bachchan Advertising Fees)

अमिताभ बच्चन के इस तर्क में नि: संदेह दम है। जब से आर्ट फ़िल्मों का बाज़ार ख़त्म हुआ तब से फ़िल्मों में कलाकार नहीं, हीरो होने लगे। यह हीरो हम सब का रोल माडल बना । फ़िल्में संदेश देने के लिए नहीं बल्कि मनोरंजन के लिए बनने लगीं। कला की जगह धन ने ले ली। हीरो हिरोइन की सफलता का पैमाना उनका उनका अभिनय नहीं वरन लाइफ़ स्टाइल हो गयी।

फ़िल्मों से सामाजिक मूल्य तिरोहित हो गये।आर्थिक मूल्य ने इस ख़ाली होती जगह पर तेज़ी से क़ब्ज़ा जमा लिया। तभी तो हीरो हिरोइन का लक्ष्य ऐन केन प्रकारेण धन कमाना हो गया। तभी तो स्टेज शो व विज्ञापनों की ओर सबने रूख किया। विज्ञापनों में बहुतों को फ़िल्मों (advertisement actors salary in india) में मिलने वाले पारिश्रमिक से अधिक पैसे हासिल होते हैं।

ग़ौरतलब है कि मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक प्रोडक्ट एंडोर्स करने के लिए 11 करोड़ रुपए लेते (highest paid advertisement in india) हैं। शाहरुख खान एक ब्रांड से 9 करोड़ रुपए चार्ज करते हैं।रेट लिस्ट में अमिताभ बच्चन तीसरे नंबर पर हैं।वह (Amitabh Bachchan Ek Ad. Ka 8 Crore Lete) एक एड के लिए 8 करोड़ रुपए लेते हैं।

अमिताभ बच्चन का विज्ञापन (फोटो- सोशल मीडिया)

एक प्रमुख अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षय कुमार-7 करोड़ (Akshay Kumar Fees For Advertisement), सलमान खान-7 करोड़ (Salman Khan Fees For Advertisement), विक्की कौशल-3 करोड़ (Vicky Kaushal Fees For Advertisement), टाइगर श्रॉफ-2.5 करोड़ (Tiger Shroff Fees For Advertisement), आयुष्मान खुराना-2.25 करोड़ (Ayushman Khurana Fees For Advertisement), राजकुमार राव – 1.5 करोड़ (Raj Kumar Rao Fees For Advertisement) रुपए लेते हैं।

ऐसे में किसी प्रशंसक की ऐसी बात गले कैसे उतरने वाली हो सकती है। वह भी जिसका सीधा रिश्ता नफ़ा नुक़सान से जुड़ा हो। अनंत प्रशंसक ही नहीं, नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर इरेडिकेशन ऑफ टोबैको सरीखे स्वयंसेवी संगठनों की ओर से अमिताभ बच्चन से किये गये अनुरोध कैसे सुने जा सकते हैं, जिसमें यह नैतिक व ग़ैर आर्थिक बात हो कि "आप सरकार के हाई-प्रोफाइल पल्स पोलियो कैंपेन के ब्रांड एम्बेसेडर( Pulse Polio Abhiyan Brand Ambassador) हैं, ऐसे में पान मसाला के विज्ञापन Pan Masala Ka Vigyapan) को छोड़ देना चाहिए।"

इन बातों पर अमिताभ बच्चन ही क्यों, किसी के कान पर जूं क्यों रेगनी चाहिए ? पर आज जब अमिताभ बच्चन ने अस्सी साल में प्रवेश किया हो तब अचानक उनके इस बोधि सत्व के अहसास पर भरोसा कैसे और क्यों किया जाना चाहिए ? उनके इस कहे पर क्यों विश्वास किया जाना चाहिए कि कमला पसंद पान मसाला का विज्ञापन सरोगेट एड था?

अमिताभ बच्चन ने प्रशंसक के कमेंट का जवाब नहीं दिया (Amitabh Bachchan Post)

ऐसे विज्ञापन का मतलब है कि आप जिस ब्रांड के लिए विज्ञापन कर रहे हैं , उस ब्रांड के कई उत्पाद होते हैं। इसमें प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पाद भी होते हैं। लेकिन मॉडल के चित्र या वीडियो का प्रयोग अप्र​तिबंधित श्रेणी के लिए किया जाएगा। वैसे अमिताभ बच्चन ने फ़ेसबुक (Amitabh Bachchan Facebook Post) पर अपने किसी प्रशंसक के कमेंट का जवाब नहीं दिया होता तब शायद लोग यह यक़ीन करने को तैयार हो जाते कि यह सरोगेट एड था।

क्यों कि कमला पसंद पान मसाला की ओर से ऐसी शरारत की जा चुकी है। यह शरारत जेम्स बांड सीरीज के मशहूर ​एक्टर पियर्स ब्रासनन से भी जुड़ी है। उनसे भी इस कंपनी का प्रचार कराया गया।

अकेले कानपुर में क़रीब साठ लाख पाउच पान मसाला

पान मसाला (फोटो- सोशल मीडिया)

जब बवाल मचा तो पियर्स ब्रासनन (Pierce Brosnan) ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह माउथ फ्रेशनर (Mouth Freshener) है। हकीकत जानने के बाद ब्रासनन ने भी इस एड से अपना नाता तोड़ लिया था। पर यह अमिताभ बच्चन के लिए नहीं कही जा सकती है।

क्योंकि यह हर भारतवासी जानता है कि भारत में पान मसाले का व्यवसाय क़रीब 42 हज़ार करोड़ रुपये का है ।इसमें ज़्यादातर हिस्सा उत्तर प्रदेश का है। सरकार को इससे हर महीने क़रीब 130 करोड़ रूपये के राजस्व की प्राप्ति होती है।अकेले कानपुर में क़रीब साठ लाख पाउच पान मसाला (Pan Masala in Kanpur) हर महीने खाया जाता है। इसी उत्तर प्रदेश से अमिताभ बच्चन आते हैं।

मुंह के कैंसर के मरीजों में 30 फीसद की बढ़ोतरी

मुंह का कैंसर (फोटो- सोशल मीडिया)

भारत में 12.80 लाख लोग तंबाकू उत्पादों की वजह से हर साल मर जाते हैं। ज्यादातर मौत चबाने वाली तंबाकू सेवन से होनी वाली बीमारियों से होती है।कैंसर से मरने वाले लोगों में 40 प्रतिशत से अधिक तंबाकू गुटका खाने वाले होते हैं। तंबाकू खाने से 30 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है।पिछले 15 वर्षों में मुंह के कैंसर के मरीजों में 30 फीसद की बढ़ोतरी हुई है।

इसका मुख्य कारण गुटखा, तंबाकू और सिगरेट का सेवन करना है।वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण- 2 (2016-17) के अनुसार उत्तर प्रदेश में तंबाकू का सेवन करने वालों का आंकड़ा 2009-10 में करीब 33.9 फीसदी था। 2016-17 में यह बढ़कर 35.5 फीसदी पर पहुंच गया है। अब इसके 49 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू उपयोग करने वाला हर दूसरा व्यक्ति अकाल मौत का शिकार होता है। यह मौत तंबाकू में मौजूद होने वाले 4000 हजार से ज्यादा कैमिकल्स के शरीर के विभिन्न अंगो पर डालने वाले नकारात्मक प्रभावों की वजह से होती है। पर अमिताभ बच्चन को ही क्यों कहे, ऐसे तमाम नुक़सानदेह उत्पादों का प्रचार करने वाले हीरो हिरोइन भी इस ओर ध्यान नहीं देते क्योंकि उन उत्पादों का उपयोग उन्हें तो करना नहीं होता है।

अमिताभ बच्चन का जन्मदिन हमेशा नये ढंग से ((Amitabh Bachchan Ka Janmdin)

अमिताभ बच्चन (फोटो- सोशल मीडिया)

ख़ैर, हर आदमी को अपने जन्मदिन पर कोई न कोई बड़ा व सकारात्मक फ़ैसला लेना चाहिए । कुछ बुरी लत छोड़नी चाहिए । समाज के हित के कुछ काम अपनी जीवन चर्या में जोड़ना चाहिए।

इस लिहाज़ से देखें तो अमिताभ बच्चन का यह जन्मदिन हमेशा नये ढंग से उनके ज़िंदगी के साथ और ज़िंदगी के बाद भी (Zindagi Ke Saath Aur Zindagi Ke Baad Bhi) याद किया जाना चाहिए । याद किया जायेगा। पर कमला पसंद का विज्ञापन (Kamla Pasand Ka Vigyapan) छोड़ते समय अपने जन्मदिन पर जो तर्क उन्होंने दिये वे गले उतरने लायक़ नहीं है।

क्योंकि पहले वह व्यवसाय का सवाल उठा कर इसे ख़ारिज कर चुके हैं। अब यह बात तो बखूबी बिग बी ही जानते होंगे कि क्या इस प्रचार से कन्नी काटने के पीछे शाहरुख के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी है या कोई और कारण।

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Vidushi Mishra

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