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वैक्सीन की कमी दूर होने की फिलहाल उम्मीद नहीं, सरकार ने साध रखी है चुप्पी

देश में कोरोना के खिलाफ व्यापक वैक्सीनेशन की तत्काल जरूरत है, लेकिन जो हालत है उससे तीसरी लहर के पहले सबको वैक्सीन लग पाने की उम्मीद कम ही है।

Neel Mani Lal

Neel Mani LalWritten By Neel Mani LalShreyaPublished By Shreya

Published on 12 May 2021 5:07 PM GMT

वैक्सीन की कमी दूर होने की फिलहाल उम्मीद नहीं, सरकार ने साध रखी है चुप्पी
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वैक्सीनेशन करवाती युवती (फोटो- न्यूजट्रैक)

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लखनऊ: कोरोना (Corona Virus) त्रासदी ने भारत को घुटनों के बल बैठा दिया है। लोगों को बचाने के लिए व्यापक वैक्सीनेशन (Vaccination) की तत्काल जरूरत है लेकिन पर्याप्त वैक्सीनें हैं ही नहीं। दुनिया में वैक्सीनों का सबसे बड़ा निर्माता देश आज खुद दूसरों की तरफ ताक रहा है। वैक्सीन की कमी कैसे दूर होगी, इस दिशा में क्या किया जा रहा है, इस पर केंद्र सरकार एकदम चुप्पी साधे हुए है।

सरकार के रुख से लगता है कि उसे वैक्सीन की कमी एक अस्थायी समस्या लग रही है। देश की अनजान जनता को भी यही लग रहा है। ऐसा दर्शाया जा रहा है मानो जल्द ही विदेशों से वैक्सीनों का इम्पोर्ट होने वाला है या सीरम इंस्टीट्यूट (Serum Institute of India) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की निर्माण क्षमता रातों रात कई गुना बढ़ जाएगी। वास्तव में ऐसा कुछ होता प्रतीत नहीं हो रहा है। सरकार ने किसी इम्पोर्ट आर्डर का खुलासा या आश्वासन तक नहीं दिया है और न देश में प्रोडक्शन क्षमता तुरंत बढ़ने वाली है।

भारत को दो डोज़ वाली वैक्सीन की कम से कम 60 करोड़ डोज़ चाहिये और जनवरी से अभी तक सप्लाई हुईं हैं मात्र 12 करोड़ डोज़। कोरोना की तीसरी लहर चंद महीनों में आने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है। जो हालत है उससे तीसरी लहर के पहले सबको वैक्सीन लग पाने की उम्मीद कम ही है।

ये राज्य निकालेंगे ग्लोबल टेंडर

केंद्र से वैक्सीन सप्लाई पर कोई आश्वासन न मिलने पर महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा आदि राज्यों ने वैक्सीनों की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर निकालने की बात कही है। लेकिन इसमें दिक्कत ये है कि जिन वैक्सीनों का भारत में ट्रायल ही नहीं हुआ उनको मंजूरी कैसे मिलेगी। इसके अलावा क्या कंपनियां इस तरह सप्लाई करने में रुचि लेंगी ये भी बड़ा सवाल है क्योंकि मामला कीमत का भी है।

कोविशील्ड (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

भारत में अभी सिर्फ दो वैक्सीनें लग रहीं हैं - सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन। तीसरी वैक्सीन की मंजूरी रूसी स्पूतनिक 5 को मिली है। सीरम इंस्टीट्यूट सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है और उसकी क्षमता 6 से 7 करोड़ डोज़ प्रतिमाह की है जिसे बढ़ा कर जुलाई तक 10 करोड़ डोज़ प्रतिमाह किया जा सकता है।

सीरम जो वैक्सीन बना रहा है वह आस्ट्रा जेनका द्वारा डेवलप की गई है और कम्पनी ने सीरम से 50 फीसदी प्रोडक्शन अन्य देशों में निर्यात करने का करार किया हुआ है। सीरम के पास कई अन्य देशों के आर्डर पेंडिंग पड़े हुए हैं। उसे कोवैक्स को भी 20 करोड़ डोज़ देनी है। ऐसे में भारत को सीरम इंस्टीट्यूट से कितनी सप्लाई मिल पाएगी ये निश्चित नहीं है। आस्ट्रा जेनका या सीरम इंस्टीट्यूट ने भारत में किसी अन्य कम्पनी से प्रोडक्शन का करार भी नहीं किया है। केंद्र सरकार ने अब तक सीरम इंस्टीट्यूट को कुल 26 करोड़ 60 लाख डोज़ का आर्डर दिया है। अभी तक जितनी सप्लाई हुई है उसके अनुसार जुलाई तक 20 करोड़ डोज़ से कम ही मिल पाएगी।

कोवैक्सिन (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

भारत बायोटेक क्षमता बेहद कम

जहां तक भारत बायोटेक की बात है तो उसकी कैपेसिटी बेहद कम है। अप्रैल में उसने मात्र एक करोड़ डोज़ बनाई। जुलाई तक भारत बायोटेक द्वारा 6 से 7 करोड़ डोज़ प्रतिमाह और सितंबर तक 10 करोड़ डोज़ प्रतिमाह बनाई जाएगी। ऐसी उम्मीद है कि सरकार कोवैक्सिन का फार्मूला कुछ अन्य कंपनियों के साथ शेयर करेगी ताकि प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।

स्पूतनिक 5 वैक्सीन की बात करें तो अभी उसकी जांच ही चल रही है। मंजूरी के बाद कितनी खेप रूस से आएगी और कितनी डॉ रेड्डीज लैब में बनेगी और कब बनेगी इसका खुलासा नहीं हुआ है। जिस रूसी कम्पनी ने ये वैक्सीन डेवलप की है उसने स्पूतनिक लाइट वैक्सीन की 85 करोड़ डोज़ के प्रोडक्शन के लिए कई भारतीय कंपनियों से करार किया है। लेकिन ये पूरा प्रोडक्शन एक्सपोर्ट किया जाएगा, भारत को कुछ नहीं मिलेगा।

Shreya

Shreya

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