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Bachchon ko Corona Vaccine: बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने में भारत लेगा बढ़त

Bachchon ko Corona Vaccine: कोरोना की तीसरी लहर (corona third wave) में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है।

Neel Mani Lal

Neel Mani LalWritten By Neel Mani LalMonikaPublished By Monika

Published on 13 Oct 2021 9:02 AM GMT

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कोरोना वैक्सीन (फोटो : सोशल मीडिया ) 

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दुनियाभर में कम से कम दस देशों में बच्चों को कोरोना वैक्सीन (bachchon ko corona vaccine) लगाई जा रही है । इनमें क्यूबा (Cuba) और चीन (China) सबसे आगे हैं । क्योंकि ये देश बहुत कम उम्र के बच्चों को भी वैक्सीन (दे रहे हैं। अब भारत में भी 2 साल से ऊपर के बच्चों को कोरोना की देशी कोवैक्सिन देने की सिफारिश की गई है। वैसे, कोवैक्सिन को अभी डब्लूएचओ की मंजूरी नहीं (Covaxin not approved by WHO) मिली है। इसी तरह क्यूबा में बच्चों को जो वैक्सीन लग रही है उसे भी डब्लूएचओ की मंजूरी मिलना बाकी है।

बच्चों को अब क्यों

दरअसल, कोरोना की तीसरी लहर (corona third wave) में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। जिस तरह वायरस म्यूटेट हो रहा है, उसके चलते पहले से ही एहतियात करना जरूरी है ताकि स्थिति बिगड़ने न पाए। चूंकि बच्चे परिवार में, स्कूल में और अन्य जगह हमेशा बड़ों के इर्दगिर्द रहते हैं, सो उनको संक्रमण होने का भी ज्यादा खतरा रहता है। भले ही अभी तक बच्चे कोरोना से काफी हद तक बचे रहे हैं । लेकिन वायरस के बदलते स्वरूप को देखते हुए भविष्य के जोखिमों से इनकार नहीं किया जा सकता है।

कोरोना वैक्सीन (फोटो : सोशल मीडिया )

जोखिम

कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स (Covaxin Side Effects) के बारे में तो नहीं पता । लेकिन अमेरिका के एफडीए ने कहा है कि बच्चों में कोरोना वैक्सीन के वही जोखिम हैं जो बड़ों के होते हैं। अमेरिका में फाइजर के ट्रायल से पता चला है कि 12 से 15 साल तक के बच्चों में बड़ों के मुकाबले ज्यादा बुखार आता है।

- बच्चों और टीनएजर्स में वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स एक से तीन दिनों तक रहते हैं।

- बच्चों को लगने वाली दोनों डोज के बाद इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द सामान्य बात है, मगर आमतौर पर किशोरों में दूसरी डोज लगवाने के बाद ज्यादा साइड इफेक्ट्स हुए।

भारत में चार शर्तें (Four Conditions in India)

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने बच्चों के वैकनीनेशन के लिए चार शर्तें लगाई हैं।

- वैक्सीन के ट्रायल की प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाए।

- वैक्सीन की जानकारी में ये भी जोड़ा जाए कि इसका बच्चों पर क्या प्रभाव होगा।

- वैक्सीन लगाए जाने के बाद हर 15 दिन में कोवैक्सीन की सुरक्षा और साइड इफेक्टस का डाटा इकट्ठा किया जाए।

- वैक्सीन निर्माता कंपनी रिस्क मैनेजमेंट प्लान के बारे में बताए। यानी अगर इसके साइड इफेक्ट हुए तो ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए, इसकी जानकारी कंपनी को देनी होगी।

कोरोना वैक्सीन (फोटो : सोशल मीडिया )

किसको लगेगी पहले

सबसे पहले 12 से 18 वर्ष के बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों (kamzor immunity wale baccho ko vaccine pehle) को यह वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके अलावा यह भी तय किया जाएगा कि हर बच्चे को वैक्सीन लगाने की जरूरत है भी या नहीं। मई से सितंबर के महीने के बीच भारत में बच्चों पर कोवैक्सीन के ट्रायल किए गए हैं। उसके बाद अक्टूबर में इसका डेटा डीसीजीआई के पास जमा कराया गया।

जायडस कैडिला को मंजूरी (Zydus Cadila ko mazuti)

कोवैक्सिन कोवैक्सीन के अलावा जायडस कैडिला की वैक्सीन को भी 12 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए मंजूरी मिल चुकी है। यह वैक्सीन तीन डोज में लगेगी। यह जो सिरिंज की जगह जेट इंजेक्टर से लगाई जाएगी।

दुनिया का हाल

अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के ज्यादतर देशों के अलावा चीन और क्यूबा में बच्चों का वैक्सीनेशन चल रहा है। अमेरिका में 12 साल से ऊपर के बच्चों को फाइजर कंपनी की वैक्सीन लगाई जा रही है, जबकि ब्रिटेन और यूरोप में 18 से कम उम्र के बच्चों को मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन लग रही है।

क्यूबा सबसे आगे

क्यूबा दो साल के बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने वाला दुनिया का पहला देश बना है। यहां 3 सितम्बर को 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू हुई थी। इसके बाद 6 सितंबर से दो से 11 साल के बच्चों को भी वैक्सीन लगानी शुरू कर दी गई। हालांकि, बच्चों को दी जा रही वैक्सीन क्यूबा में ही तैयार हुई है। इसे अभी विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी नहीं मिली है।

- यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर वैक्सीन को मंजूरी दी थी। तब से विभिन्न यूरोपीय देश बच्चों को वैक्सीन लगा रहे हैं।इसमें डेनमार्क में 12 से 15 साल के अधिकतर बच्चों को वैक्सीन की एक खुराक लगाई जा चुकी है। स्पेन में 12 से 19 साल के बच्चों को वैक्सीन दी जा रही है। फ्रांस में 12 से 17 साल के बच्चों को वैक्सीन लगाई जा रही है। अब तक 66 प्रतिशत बच्चों को पहली और 52 प्रतिशत को दोनों खुराकें मिल चुकी है। जर्मनी में 12 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए लागू कर दिया गया है।

स्वीडन में 12 से 15 साल के उन्हें बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है, जो फेफड़े की बीमारी, गंभीर अस्थमा या कोई अन्य गंभीर खतरे वाली बीमारी से ग्रसित है। नॉर्वे में 12-15 साल के बच्चों को वैक्सीन दी जा रही है, लेकिन यहां अभी तक बच्चों को वैक्सीन की एक ही खुराक देने का निर्णय किया गया है।

- अमेरिकी सरकार ने मई में फाइजर की वैक्सीन के साथ 12 साल से अधिक उम्र के सभी बच्चों का वैक्सीनेशन करने की मंजूरी दी थी। उसके बाद से जुलाई के अंत तक 12-17 साल के 52 प्रतिशत को पहली और 32 प्रतिशत को दोनों खुराकें दी जा चुकी थी।

चीनी सरकार ने जून में तीन से 17 साल के कुछ बच्चों को सिनोवैक की वैक्सीन लगाने की अनुमति देना शुरू कर दिया था। जिससे वह इतने कम आयु वर्ग के लिए वैक्सीन को मंजूरी देने वाला पहला देश बन गया था।इसी तरह चिली ने पिछले महीने छह से 17 साल तक के बच्चों को वैक्सीन देने की मंजूरी दी थी।इसी तरह दक्षिण अफ्रीका में भी इस उम्र के बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है।

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