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Coronavirus Antibody : वैक्सीन- कोविड एंटीबाडी पर बड़ी खबर, सीरो सर्वे की चौथी रिपोर्ट जारी, नतीजा जान मिलेगी राहत

Corona Antibody: ICMR के सीरो सर्वे के मुताबिक, देश में 33 फीसदी यानि लगभग 40 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनमें कोरोना की एंटीबाडी अब तक नहीं पाई गई। ऐसे लोगों में कोरोना की चपेट में आने का खतरा अधिक है।

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Published on 21 July 2021 6:10 AM GMT
Coronavirus Antibody
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Coronavirus Antibody: कोरोना वायरस के संकट के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। वैक्सीन की जरूरत और विश्वसनियता के पक्ष में एक रिपोर्ट में सकारात्मक खुलासा हुआ है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना को लेकर चौथा सीरो सर्वे किया। सीरो सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर तीन लोगों में से दो व्यक्तियों की कोरोना से एंटीबाॅडी बन चुकी है, जो कोरोना से जंग के लिहाज से कारगर है।

दरअसल, ICMR के सीरो सर्वे के मुताबिक, देश में 33 फीसदी यानि लगभग 40 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनमें कोरोना की एंटीबाडी अब तक नहीं पाई गई। ऐसे लोगों में कोरोना की चपेट में आने का खतरा अधिक है। एंटीबाॅडी न बनने वाले लोगों को ICMR ने सलाह दी है कि वे गैरजरूरी यात्राएं करने से बचें। साथ ही कोरोना से बचाव के लिए सख्ती से नियमों व गाइडलाइन का पालन करें।

21 राज्यों के 70 जिलों में चौथा राष्ट्रीय सीरो सर्वे

बता दें कि ICMR ने पिछले दिनों देश के 21 राज्यों के 70 जिलों में चौथा राष्ट्रीय सीरो सर्वे करवाया था। ये वही जिले हैं जहां पहले भी बाकि के तीन सीरो सर्वे कराए गए थे। सर्वे कराने के लिए रिसर्चर्स ने हर जिले से 10 गांव या वार्ड में से 40-40 लोगों का चुनाव किया। ऐसे में हर जिलों से 400 लोगों के बल्ड सैंपल लिए गए और उनका एंटीबाडी परीक्षण किया गया। ये चौथा सीरो सर्वे जून-जुलाई में हुआ, जिसमें पहली बार 6 साल से 9 साल तक की उम्र के बच्चों को भी शामिल किया गया। यानि इस बार 6 से 17 साल के बच्चों के खून के नमूने लिए गए। सर्वे में कुल 28,975 लोग और 7,252 स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया।


चौथे सीरो सर्वे का परिणाम

-चौथे सीरो सर्वे के जो नतीजे सामने आए वह राहतपूर्ण रहे। सर्वे में दावा किया गया कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 69.6 फीसदी लोगों मे एंटीबाॅडी बनी है तो वहीं ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 66.7 फीसदी लोगों में एंटीबाडी मिली। यानि शहर और गांव के लोगों ने ज्यादा फर्क देखने को नहीं मिला।

-पहली बार 6 से 9 साल के बच्चों को भी इस सर्वे में शामिल किया गया और पाया गया कि 57.2 फीसद 9 साल तक के बच्चों में कोरोना की एंटीबाडी मिली है। इसके अलावा 10 से 17 साल के 61.6 फीसद बच्चों में भी एंटीबाडी पाई गई।

-सर्वे में शामिल 18 से 44 साल के 66.7 प्रतिशत लोगों में एंटीबाडी मिली। साथ ही 45 से 60 साल के 77.6 फीसद और 60 साल से अधिक 76.7 फीसदी बुजुर्गों में एंटीबाडी मिली।

-वहीं अगर महिलाओं और पुरुषों में एंटीबाडी बनने के प्रतिशत पर नजर डालें तो 69.2 फीसद महिलाओं में कोरोना के खिलाफ एंटीबाडी पाई गई, जबकि सर्वे में शामिल 65.8 फीसद पुरुषों में कोरोना की एंटीबाडी मिली है।

हर्ड इम्युनिटी के करीब पहुंचा देश

सीरो सर्वे से एक बात स्पष्ट हो गई कि देश की दो तिहाई आबादी कोविड-19 संक्रमित हो चुकी है। ऐसे मे अब जब देश में तीसरी लहर आने वाली है तो भारत हर्ड इम्युनिटी के करीब पहुंच चुका है। होता ये है कि जब किसी देश की 70 प्रतिशत आबादी में एंटीबाडी बनने लगती है तो माना जाता है कि सोसाइटी वायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी के दौर में पहुंच गई। सवाल है कि हर्ड इम्युनिटी क्या है (Herd Immunity Kya hai)। हर्ड इम्युनिटी का मतलब है, सामुदायिक प्रतिरक्षा विकसित होना।

सर्वे के मुताबिक, भारत में लगभग 70 फीसदी लोगों में एंटाबाडी बनने के कारण सामान्य तौर पर कह सकते हैं कि देश में हर्ड इम्युनिटी की स्थिति पैदा हो गई है, लेकिन भारत की आबादी अधिक होने के कारण आईसीएमआर ने अब तक हर्ड इम्युनिटी पर कोई दावा नहीं किया।


आइसीएमआर के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव के बताया कि देश की दो -तिहाई आबादी में एंटीबाडी बनने के बाद भी बड़ी तादात में लोग आसानी से कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। सवा लाख करोड़ की आबादी वाले देश में लगभग 40 करोड़ लोग ऐसे है, जो संक्रमित हो सकते है।

कब -कब हुआ सीरो सर्वे

गौरतबल है कि इसके पहले IMRC का पहला सीरो सर्वे पिछले साल मई-जून में हुआ था, तब मात्र 0.7 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटीबाडी पाई गई थी। दूसरा सर्वे पिछले साल अगस्त-सितंबर में हुआ, तब तक 7.1 फीसदी आबादी में एंटीबाडी बनी थी। वहीं दिसंबर-जनवरी में तीसरे सीरो सर्वे में 24.1 फीसद लोग ही कोरोना की एंटीबाडी विकसित करने में सफल रहे थे।

टीकाकरण आया काम, साबित हुई वैक्सीन की अहमियत

भारत में टीकाकरण की अहमियत भी इस सर्वे से सामने आ गई। जिन लोगों के अब तक वैक्सीन नहीं लगी है, उनमें से 62.3 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटीबाडी बनी है। जबकि कोरोना वैक्सीन की एक डोज लेने वाले 81 फीसदी लोगों में एंटीबाडी पाई गई। वहीं जो लोग वैक्सीन की दोनो डोज ले चुके हैं, उनमें से 89.9 फीसद में एंटीबाडी पाई गई।


सरकार ने बड़ा टीकाकरण अभियान चला कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन के डोज देने की कोशिश की, इसका नतीजा है कि 85 फीसदी स्वास्थ्यकर्मियों में एंटीबाडी विकसित हो गई है।

Shivani

Shivani

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