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Coronavirus: हवा और एसी से फैल रहा कोरोना, जानें कैसे करें बचाव

Coronavirus: सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी कर बताया है कि बंद कमरे में एसी के इस्तेमाल से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

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NetworkNewstrack NetworkShreyaPublished By Shreya

Published on 20 May 2021 5:40 PM GMT

Coronavirus: हवा और एसी से फैल रहा कोरोना, जानें कैसे करें बचाव
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रिमोट का बटन दबाता शख्स (सांकेतिक फोटो साभार- सोशल मीडिया)

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Coronavirus: देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की दस्तक के बाद संक्रमण की रफ्तार बेकाबू हो चुकी है। लोग तेजी से कोरोना की चपेट में आ रहें हैं, साथ ही मृतकों के आंकड़े भी रोजाना नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं। ऐसे में संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। इस बीच अब सरकार ने कोरोना के प्रसार की दो मुख्य वजहें बताई हैं।

केंद्र (Central Government) ने नई गाइडलाइंस जारी कर एयरोसोल और ड्रॉपलेट्स ट्रांसमिशन को कोविड-19 संक्रमण फैलने की मुख्य वजह बताई है। पहले लोग केवल ड्रॉपलेट्स (Droplets) यानी मुंह और नाक से निकलने वाली छीटें, को ही कोरोना फैलने का प्रमुख कारण मानते थे, जबकि एयरोसोल को ज्यादा महत्व नहीं देते थे। लेकिन अब ये बात सामने आई है कि कोरोना को फैलाने में ड्रॉपलेट्स और एयरोसोल दोनों ही मुख्य कारण हैं।

बिना लक्षण वाले मरीज भी फैला सकते हैं कोरोना

मोदी सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकारों ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि एयरोसोल हवा में दस मीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण व्यक्ति के लार और नाक से निकले ड्रॉपलेट्स और एयरोसोल कोविड-19 संक्रमण का प्राथमिक तरीका है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कोरोना से संक्रमित बिना लक्षणों वाले मरीज भी वायरस को ट्रांसमिट कर सकते हैं।

सरकार द्वारा तय दिशानिर्देशों में कहा गया है कि अगर हम बात करें ड्रॉपलेट इंफेक्शन की तो यह पांच माइक्रोन से ज्यादा बड़े हो सकते हैं। किसी व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान कुछ बूंदें या छींटे बाहर निकलती हैं, इन्हें ही ड्रॉपलेट कहते हैं। जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके मुंह या नाक से ड्रॉपलेट निकलकर सीधे सतह पर गिर जाते हैं, जो संक्रमित व्यक्ति से दो मीटर की दूरी तय करते हैं, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं, एयरबोर्न को एयरोसोल ट्रांसमिशन कहा जाता है। इसमें वायरस का साइड 5 माइक्रोन से कम होता है। इसलिए ये हवा के साथ मिलकर करीब दस मीटर की दूरी तय करने में सक्षम रहता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अब ड्रॉपलेट्स के साथ साथ एयरोसोल को भी खतरनाक माना जा रहा है।

खिड़की के पास खड़ी युवती (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

घर में क्रॉस वेंटिलेशन होना जरूरी

इससे सावधानी बरतने के लिए सरकार ने कहा है कि घर में क्रॉस वेंटिलेशन का होना जरूरी है यानी घर के अंदर बाहर से हवा आती रहे। वेंटिलेशन के जरिए वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि घर की खिड़कियां खोलकर रखें, ताकि स्वच्छ हवा अंदर आती रहे। इसके साथ ही घरों की खिड़की, दरवाजे बंद कर एसी या कूलर में रहने को लेकर चेताया गया है।

दरअसल, गर्मी में कोरोना से बचने के लिए लोग अपने घरों की खिड़की, दरवाजे बंद कर एसी-कूलर की हवा में रह रहे हैं। लेकिन ऐसा करने से कोरोना का खतना बढ़ भी सकता है। केंद्र द्वारा जारी दिशानिर्देशों में इसे लेकर चेताया गया है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिन कमरों में वेंटिलेशन की कमी है या ज्यादा एसी कूलर का इस्तेमाल हो रहा है तो इससे भी कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।

कमरे में रखे फर्नीचर (सांकेतिक फोटो साभार- सोशल मीडिया)

AC से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार विजयराघवन के कार्यालय की ओर से जारी नई गाइडलाइंस मे कहा गया है कि उचित वेंटिलेशन होने से कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है। वहीं, जो लोग खिड़कियों और दरवाजों को बंद कर एयर कंडीशनर या कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे संक्रमित हवा घर कमरे के अंदर ही रह जाती है, बाहर नहीं निकल पाती है, इससे दूसरों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी छोटी जगह पर एसी के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। क्योंकि कोरोना से संक्रमित के मुंह या नाक से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स एसी की हवा के साथ मिल जाते हैं और घर के अंदर दूसरों को भी आसानी से संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे में एडवाइजरी में लोगों को सलाह दी गई है कि कोरोना से बचाव के लिए घर की खिड़कियों को खुली रखें।

इन नियमों का करें पालन

इसके साथ ही लोगों को कोरोना संबंधी गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया है। सरकार ने कहा है कि कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। बार बार हाथों को धोते रहें। मुंह और चेहरे को हाथ से ना छुएं। इसके अलावा कहीं बाहर जाने पर डबल मास्क का इस्तेमाल करें। दरवाजों के हैंडल, लिफ्ट के बटन और स्विच, मेज, कुर्सियों और फर्श को ब्लीच या फिनाइल से डिसइंफेक्ट करते रहें। इन नियमों का पालन कर कोरोना से बचा जा सकता है।

Shreya

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