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कोविड-19 का शिक्षा पर तीखा हमलाः देश के पिछड़ों जिलों में बच्चों की सीखने की क्षमता घटी, संख्या पहचानने में असमर्थ

Impact of Covid-19 on Education in India: देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक में कोविड के चलते बच्चों के सीखने के कौशल पर यह बड़ा आघात देखने को मिला है।

Ramkrishna Vajpei
Published on 26 Jan 2022 3:52 AM GMT
covid-19 on education
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शिक्षा पर कोविड-1ा9 का प्रभाव (फोटो-सोशल मीडिया)

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Impact of Covid-19 on Education in India: नवीनतम वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कक्षा दो, तीन और छह में छात्रों का अनुपात जो अक्षरों को पहचानने में असमर्थ हैं, 2018 के बाद से उनके बुनियादी गणितीय कौशल (basic mathematical skills) में तेज गिरावट के साथ दोगुना हो गया है। देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक में कोविड के चलते बच्चों के सीखने के कौशल पर यह बड़ा आघात देखने को मिला है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सर्वे अक्टूबर-नवंबर 2021 में छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में 33 हजार 432 घरों में 3-16 वर्ष की आयु के 46 हजार 21 बच्चों को कवर करते हुए किया गया था। असर के सर्वेक्षण के अनुसार, कक्षा एक-सात तक छात्रों के बीच वर्तमान मूलभूत पढ़ने का स्तर पिछले एक दशक में सबसे कम पाया गया है।

कोविड का शिक्षा पर बुरी तरह प्रहार

रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा दो, कक्षा तीन और कक्षा छह में बच्चे 'शुरुआती' स्तर यहां तक कि अक्षरों को पहचानने में असमर्थ मिले। बच्चों का यह अनुपात 2018 में इसी स्तर के छात्रों से लगभग दोगुना है। यह कक्षा दो के बच्चों में 19.5% से बढ़कर 37.6% हो गया है। कक्षा III में 10.4% से बढ़कर 22.5% और कक्षा छह में 2.5% से 4.8% तक हो गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा तीन में कक्षा दो के स्तर के पाठ को धाराप्रवाह पढ़ने वाले बच्चों का अनुपात 2018 के 29.8 प्रतिशत से गिरकर 2021 में 12.3 प्रतिशत हो गया है, यह दर्शाता है कि छोटे बच्चों, विशेष रूप से सरकारी स्कूलों में सीखने के परिणामों में कमी आई है। कोविड ने इनकी शिक्षा पर बुरी तरह प्रहार किया है।

आंकड़े बताते हैं कि 2018 तक सभी आयु वर्ग के बच्चों में सीखने की क्षमता बढ़ रही थी। लेकिन कोविड ने इस पर बुरी तरह असर डाला है। उदाहरण के लिए, 2014 में सरकारी स्कूलों की दूसरी कक्षा के 70.7 प्रतिशत बच्चे पत्र पढ़ सकते थे, 2016 में यह बढ़कर 77.1 प्रतिशत हो गया, 2018 में मामूली गिरावट के साथ 76.3 प्रतिशत था और 2021 में घटकर 57 प्रतिशत रह गया है।

एक अंक की भी संख्या को पहचानने में असमर्थ बच्चे

गणित के मामले में, 2014 में कक्षा तीन (सरकारी और निजी स्कूल संयुक्त) में 14.2 प्रतिशत बच्चे घटाव कर सकते थे; 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया; 2016 में थोड़ा कम होकर 19.3 प्रतिशत पर आ गया; और 2021 में यह 9 फीसदी पर था।

2018 में कक्षा पांच के 18 प्रतिशत छात्र भाग के सवाल कर सकते थे; 2016 में यह बढ़कर 23.1 प्रतिशत हो गया; 2018 में 26.9 प्रतिशत; और 2021 में गिरकर 13 प्रतिशत हो गया।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि जो बच्चे एक अंक की भी संख्या को पहचानने में असमर्थ हैं, उनके अनुपात में सभी ग्रेड में वृद्धि हुई है, और ऐसा कक्षा I-V के छात्रों में अधिक हुआ है। उदाहरण के लिए, इस स्तर पर बच्चों का अनुपात कक्षा II में 11.4 प्रतिशत से बढ़कर 24.3 प्रतिशत हो गया, और कक्षा V में 1.7 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले एक दशक में देखा जाए, तो प्राथमिक ग्रेड (कक्षा I-V) में बच्चों के बीच मूलभूत अंकगणितीय क्षमता में तेज गिरावट दिखाई दे रही है, सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रदर्शन निजी स्कूलों की तुलना में काफी खराब है।

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Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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