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Delhi News: केजरीवाल सरकार ने पद्म पुरुस्कार के ल‍िए जनता से मांगे नाम, कोरोना काल में जिस डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी ने की जनता की ज्यादा सेवा

Delhi News: दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejariwal)ने इस बार पद्म पुरुस्कारों के लिए जनता से नाम मांगा हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने जनता की ज्यादा सेवा की है, वे उनका नाम दिल्ली सरकार को भेजें।

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Published on 27 July 2021 11:47 AM GMT

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पद्म पुरुस्कारों की चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल  (social media )

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Delhi News: दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejariwal) ने इस बार पद्म पुरुस्कारों (Padma Awards) के लिए जनता से नाम मांगे हैं। केजरीवाल ने एक् प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के नाम भेजे जाएं, जिन्होंने जनता की ज्यादा सेवा की है। वहीं इस बाबत सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई है।

बता दें कि द‍िल्‍ली सरकार (Delhi Government) ने पद्म अवॉर्ड (Padma Awards) के ल‍िए इस बार डॉक्‍टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के नाम केन्‍द्र सरकार को भेजने का फैसला किया है। वहीं इसके लिए एक ईमेल भी जारी किया गया है। एक प्रेस कॉफ्रेंस में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पद्मश्री पुरस्कार के लिए केंद्र सरकार जनता से भी नाम लेती है और राज्य सरकारों से भी नाम लिए जाते हैं। दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष हम सिर्फ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के नाम भेजेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस ईमेल एड्रेस (Padma [email protected]) पर कोई भी व्यक्ति किसी भी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी का नाम और आखिर इन्हें यह अवार्ड क्यों मिलना चाहिए उसके बारे में जानकारी भेज सकता है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष मनीष सिसोदिया हैं। इस कमेटी में जनता के द्वारा भेजे गए नामों पर चर्चा की जाएगी। 15 सितम्बर केंद्र को नाम भेजने की अंतिम तिथि है। हम चाहते हैं कि 15 अगस्त तक सभी नाम आ जाएं।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कोरोना काल में डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों ने बहुत लोगों की जान बचाई है। जबकि कई ऐसे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मैं जानता हूं, जो लोगों की सेवा करते उन्हें खुद कोरोना हो गया और वे दुनिया छोड़कर चले गए। पूरा देश और सारी इंसानियत इनकी कर्जदार है, इनका शुक्रिया अदा करने के लिए शब्द नहीं हैं।

पूरे देश में दिल्ली सरकार अकेली सरकार है, जिसने एक-एक करोड़ रुपए की सहायता उन लोगों को यानि सभी फ्रंट लाइन वर्कर्स को दी, जिन्हें लोगों की सेवा करते हुए कोरोना हुआ और वे शहीद हो गए। ऐसे लोगों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए की सम्मान राशि दी।

पद्म पुरुस्कारों की चयन प्रक्रियाः

पद्म पुरस्कार भारत के नागरिक सम्मान होते हैं। इनके अन्तर्गत ये पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं। पद्म पुरस्कारों की घोषणा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस पर की जाती है। सन् 1954 में पद्म पुरस्कार प्रारम्भ किए गए थे।

ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों जैसे कला, सामाज सेवा, लोक कार्य, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल-कूद और नागरिक सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रदान किए जाते हैं। यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियों में पुरुष्कार प्रदान किए जाते हैं।


ये हैं पद्म पुरुस्कार


पद्म विभूषण- यह पद्म श्रेणी का सर्वश्रेष्ठ पुरुष्कार है। यह असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।

पद्म भूषण- पद्म श्रेणी का यह दूसरा पुरुष्कार है, जो उत्कृष्ट कोटि की विशिष्ट सेवा देने के लिए प्रदान किया जाता है।

पद्म श्री- पद्म श्रेणी का यह तीसरा पुरुष्कार है, जो किसी भी श्रेत्र में विशिष्ट सेवा के फलस्वरूप प्रदान किया जाता है।

पद्म पुरुष्कारों से सम्मानित करने के लिए पहले शख्सियतों का चयन किया जाता है। इसके लिए नामों का चयन करने के लिए प्रधानमंत्री प्रत्येक वर्ष एक समिति का गठन करते हैं। इस समिति के पास पद्म पुरुस्कारों के लिए लोगों के नाम की सिफारिश आती है। यह सिफारिश राज्य सरकार, संघ राज्य प्रशासन, केंद्रीय मंत्रालय के साथ-साथ उत्कृष्टता संस्थानों आदि से प्राप्त की जाती है।

इसके बाद एक तय समय के पश्चात समिति उन नामों पर विचार करती है। इसके बाद पुरुस्कार समिति लोगों की कार्यकुशलता को देखते हुए उनके नाम की सिफारिश करती है, जिसपर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रपति इस पर अपना अनुमोदन देते हैं। उसके बाद गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस सम्मान से सम्मानित शख्सियतों के नाम की घोषणा की जाती है।

ये पुरस्कार सरकारी कर्मचारियों (डॉक्टरों तथा वैज्ञानिकों को छोड़कर) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों को नहीं दिए जा सकते हैं। प्रायः पद्म पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान नहीं किए जाते हैं। लेकिन फिर भी कभी कभी विशेष परिस्थितियों में अब ये दिए जाने लगे हैं।

इसमें इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि सम्मानित किए जाने वाला व्यक्ति यदि योग्यता की उत्कृष्टता से परे है, तब उसकी असाधारण प्रतिभा को दृष्टिगत रखते हुए सरकार मरणोपरांत भी उस व्यक्ति को पद्म पुरस्कार प्रदान करने के लिए विचार कर सकती है।

हांलाकि, इसमें भी एक शर्त यह होती है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि सम्मानित किए जाने वाले व्यक्ति का निधन हाल ही अर्थात उस वर्ष के गणतन्त्र दिवस से एक वर्ष पूर्व की अवधि में हुआ हो, जिस पर उक्त पुरस्कार को घोषित किया जाना प्रस्तावित हो, तो उसे पद्म पुरस्कार मरणोपरांत दिए जा सकते हैं।

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