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Kisan Andolan Ka Ek Sal: किसान आंदोलन का एक साल पूरा, कृषि कानूनों की वापसी पर भी तेवर नरम नहीं, विरोध प्रदर्शन पर अड़े

Kisan Andolan Ka Ek Sal: तीन कृषि कानूनों को लेकर देशभर के किसानों ने आज ही के दिन अपना देशव्यापी आंदोलन शुरू किया था जिसको आज एक साल पूरा हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दिया है।

Kisan Andolan: One year completed of the farmers movement, not soft on the return of agricultural laws, adamant on the protest
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किसान आंदोलन का एक साल: photo - social media  

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Kisan Andolan Today Live Update 26 November: केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से पारित तीन नए कृषि कानूनों (three new agricultural laws) के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन (Kisan Andolan Ka Ek Sal Pura) का एक साल पूरा हो गया है। मोदी सरकार (Modi Government) की ओर से पिछले साल सितंबर में तीन नए कृषि कानून लागू करने का फैसला किया गया था। किसान संगठनों ने सरकार के इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई थी और उन्होंने पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर जुटकर आंदोलन छेड़ दिया था। किसान आंदोलन के एक वर्ष (One Year of the Farmer Movement) पूरा होने पर शुक्रवार को यूपी गेट पर महापंचायत के आयोजन का एलान किया गया है।

भारतीय किसान यूनियन (Indian Farmer Union) ने इस महापंचायत को सफल बनाने की रणनीति तैयार की है। इस महापंचायत (mahapanchayat) में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों से भाग लेने की अपील की गई है। सरकार की ओर से तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद अब किसान एमएसपी पर सरकार से गारंटी (Government guarantee on MSP) चाहते हैं। किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे दिल्ली की सीमाओं से हटने वाले नहीं हैं। किसान नेताओं का कहना है कि 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वे अपने पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक ही विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

किसान नेताओं ने घर लौटने की अपील ठुकराई

किसान आंदोलन (Kisan Andolan One Year Complete) का एक साल पूरा होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कृषि कानूनों की वापसी का एलान कर दिया था। अब मोदी कैबिनेट (Modi cabinet) ने भी इस पर मुहर लगा दी है और संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पहले दिन ही इन कानूनों की वापसी का प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है। सरकार की ओर से नरम रुख अपनाए जाने के बावजूद किसान नेताओं का तेवर अभी तक आक्रामक बना हुआ है।

photo - social media

प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि उनकी सरकार ने गांव गरीब और किसानों के हित में यह कानून बनता है बनाए थे मगर सरकार इस मुद्दे पर कुछ किसानों को समझाने में नाकाम साबित हुई। पीएम मोदी के मुताबिक शायद हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गई जिसके कारण हम इस मुद्दे पर किसानों को समझा नहीं सके। उन्होंने किसानों से घर लौटने की अपील करते हुए यह भी कहा था कि अब नई शुरुआत करने का समय आ गया है।

प्रधानमंत्री की घोषणा (Prime Minister announcement) के बाद किसानों के घर लौटने और किसान आंदोलन खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही थी मगर किसान नेता घर लौटने को तैयार नहीं है। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार एमएसपी (MSP) व किसानों से जुड़े हर मुद्दे का समाधान नहीं करती तब तक किसान घर नहीं लौटेंगे। भाकियू नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait News Today) ने लखनऊ में हुई किसान महापंचायत में भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा की थी।

photo - social media

संसद पर विरोध प्रदर्शन पर अड़े

किसान नेताओं (Kisan Neata) ने साफ कर दिया है कि वे 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार के रवैये पर अपना विरोध जताएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि अभी वे दिल्ली की सीमाओं से हटने वाले नहीं हैं। किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि एमएसपी (MSP has always been our issue) हमेशा से हमारा मुद्दा रहा है और हम इससे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की यह मांग पूरी करनी होगी और इससे पहले हम दिल्ली की सीमाओं से हटने वाले नहीं हैं।

टिकैत (Rakesh Tikait) ने बताया कि 27 नवंबर को होने वाली बैठक में आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने 29 नवंबर को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च आयोजित करने की घोषणा की है। टिकैत का कहना है कि किसान किसी भी सूरत में पीछे हटने वाले नहीं हैं और सरकार को एमएसपी पर गारंटी देनी ही होगी। 29 नवंबर के विरोध प्रदर्शन के लिए हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व कई अन्य राज्यों से किसानों ने हजारों ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ दिल्ली की ओर कूच कर दिया है।

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बातचीत बेनतीजा, दिल्ली पुलिस सतर्क

किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के जुटने से दिल्ली पुलिस भी सतर्क हो गई है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बाबत किसान नेताओं से संपर्क भी साधा है मगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। किसानों के भारी संख्या में दिल्ली पहुंचने की आशंका से बैरियर लगाने का काम एक बार फिर शुरू कर दिया गया है।

यूपी गेट फ्लाईओवर पर 15 दिन पहले ही बैरिकेड हटाए गए थे मगर अब बैरिकेड लगाने का काम फिर शुरू कर दिया गया है। इस बीच दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसान लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं मगर किसी को भी कानून व्यवस्था को तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

Shashi kant gautam

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